पेट्रोल-डीजल की जगह बैट्री वाली गाड़ियों को दी जानी चाहिये प्राथमिकता : सुप्रीम कोर्ट

पेट्रोल-डीजल की जगह बैट्री वाली गाड़ियों को दी जानी चाहिये प्राथमिकता : सुप्रीम कोर्टप्रतीकात्मक तस्वीर।

लखनऊ। वातावरण में बढ़ते प्रदूषण को लेकर उच्च न्यायालय ने भी चिंता जाहिर की है। न्यायालय ने कहा है कि इसके लिये कदम उठाना बेहद जरूरी है। कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि पेट्रोल-डीजल से चलने वाली गाड़ियों की जगह बैट्री वाली गाड़ियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि आखिर क्यों बैट्री से चलने वाली गाड़ियों का बड़े पैमाने पर निर्माण नहीं किया जा रहा है।

दूसरे देशों में इन गाड़ियों का चलन काफी बढ़ गया है, लेकिन भारत में इन्हें साइडलाइन किया हुआ है। कोर्ट ने कहा कि दूसरे देशों की तरह देश को आगे ले जाना है तो इस तरह के तरीकों को आजमाया जाना चाहिए। जज मदन लाल लोकुर और दीपक गुप्ता की पीठ ने सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्यूफेक्चर को ये निर्देश दिए।

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बताया जा रहा है कि कोर्ट ने इसके लिए 1 अप्रैल 2020 डेडलाइन रखी है। वहीं वकील हरीश साल्वे ने कोर्ट से कहा कि जो पैसा पेट्रोल और डीजल में बर्बाद होने से बचेगा उसका इस्तेमाल लोगों को जागरूक करने में किया जा सकेगा।पिछले हफ्ते दिल्ली-एनसीआर में स्मॉग के कहर की वजह से पॉल्यूशन काफी खतरनाक स्थिति पर पहुंच गया है। पीएम 2.5 का स्तर 600-700 माइक्रोग्राम तक पहुंच गया था, जो कि सामान्य से 7 गुना ऊपर माना गया। स्मॉग के आतंक के बाद दिल्ली सरकार को एनजीटी की फटकार का सामना करना पड़ा था।

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