हरिद्वार से भारतीय किसान यूनियन ने किया कूच, गांधी जयंती पर दिल्‍ली में डालेंगे डेरा

भारतीय किसान यूनियन का कहना है कि केंद्र और राज्य की सरकारें किसानों से किए वायदे को निभाने में नाकाम रही हैं। उन्होंने किसानों की समस्याओं पर संसद का विशेष संयुक्त अधिवेशन बुलाने की मांग की है।

Ranvijay SinghRanvijay Singh   27 Sep 2018 11:50 AM GMT

हरिद्वार से भारतीय किसान यूनियन ने किया कूच, गांधी जयंती पर दिल्‍ली में डालेंगे डेरा

लखनऊ। अपनी मांगों को लेकर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के हजारों किसान ने दिल्ली की तरफ कूच कर दिया है। 23 सितंबर को हरिद्वार से शुरु हुई पदयात्रा 28 सितंबर को मेरठ पहुंचेगी और 2 अक्टूबर को दिल्ली में। गांधी जयंती के दिन किसान संसद के सामने अपनी आवाज बुलंद करेंगे।

भारतीय किसान यूनियन का कहना है कि केंद्र और राज्य की सरकारें किसानों से किए वायदे को निभाने में नाकाम रही हैं। उन्होंने किसानों की समस्याओं पर संसद का विशेष संयुक्त अधिवेशन बुलाने की मांग की है। यात्रा में भाकियू के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष नरेश टिकैत, राष्‍ट्रीय प्रवक्‍ता राकेश टिकैत समेत देश के कोने से कोने से आए किसान शामिल हैं।


मुजफ्फरनगर में हुआ स्‍वागत

इससे पहले 'किसान क्रांति यात्रा' गुरुवार को मुजफ्फरनगर पहुंची। यहां जगह-जगह यात्रा का स्‍वागत किया गया। यात्रा में शामिल किसानों के विश्राम के लिए भी व्‍यवस्‍था की गई थी। इस दौरान पुलिस प्रशासन ने शहर में कड़ी सुरक्षा व्‍यवस्‍था रखी थी। भारतीय किसान यूनियन से जुड़े आशीष यादव ने कहा, ''अभी किसानों का पड़ाव मुजफ्फरनगर के भैंसी में लगा है। अगला पड़ाव दैराला में लगेगा। देश भर से हजारों की संख्‍या में किसान अपनी आवाज संसद तक पहुंचाने के लिए इस यात्रा से जुड़े हैं। यात्रा कल मेरठ पहुंचेगी।''

पतंजलि योगपीठ में किसानों ने डाला था डेरा

हरिद्वार से चलने के बाद किसान क्रांति यात्रा ने पहला पड़ाव योग गुरु बाबा रामदेव के पतंजलि योगपीठ में डाला था। रविवार को पतंजलि पहुंचे किसानों ने यहां रात्रि विश्राम किया। सोमवार सुबह यात्रा को रुड़की के लिए निकलना था, लेकिन लगातार बारिश के कारण बाबा रामदेव ने यात्रा को रोक लिया था। इसके बाद बाबा रामदेव ने किसानों को योगाभ्‍यास भी कराया था। बाबा रामदेव ने कहा था, ''किसी भी देश के किसान उस देश की रीढ़ की हड्डी होते हैं। किसान अगर भूखा और गरीब रहे तो ऐसा देश कभी विकास नहीं कर सकता है।''



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भाकियू की मांग

- किसानों की न्यूनतम आमदनी सुनिश्चित की जाए

- लघु एवं सीमांत किसानों को 60 वर्ष की आयु के बाद 5 हजार रुपये मासिक पेंशन दी जाए

- दिल्ली-एनसीआर में एनजीटी की 10 साल से पुराने डीजल वाहनों के संचालन पर लगाई गई पाबंदी को हटाया जाए

- सरकार देश में पर्याप्त मात्रा में पैदावार होने वाली फसलों का आयात बंद करे

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