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किसानों के लिए भारतीय किसान यूनियन की सरकार से 1.5 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज की मांग

कोविड 19 महामारी के चलते हो रहे नुकसान से किसानों को कैसे बचाया जाए? वे क्या कदम उठाए जाने चाहिए जिससे कृषि संकट से किसानों को उबारा जा सके, गांव कनेक्शन आर्थिक पैकेज की उठ रही मांगों के बीच देश के कृषि जानकारों, अर्थशास्त्रियों और किसान नेताओं से उनकी राय जान रहा है। सीरीज कोरोना और किसान के दूसरे पार्ट में पढ़िए भारतीय किसान यूनियन ने इस महामारी से निपटने के लिए सरकार को क्या सुझाव दिए हैं क्या मांगे रखी हैं।

भारतीय किसान यूनियन ने 17 अप्रैल को अन्तर्राष्ट्रीय किसान संघर्ष दिवस दिवस मनाया। इस दौरान देश के कई इलाकों में किसान अपने घरों और खेतों में कृषि यंत्रों के साथ खड़े होकर अपनी बात सरकार तक पहुंचाने की कोशिश करते नजर आए। ये किसान कोविड-19 महामारी से किसानों को हो रहे नुकसान के लिए आर्थिक पैकेज की मांग कर रहे थे।

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने प्रदेश और केंद्र सरकार को लिखी चिट्टी में कृषि में संरचनात्मक सुधारों की मांग की है।

खेती और किसानों की बेहतरी के लिए दीर्घकालीन सुधारात्मक मुद्दे

1.सरकार को अंतर्राष्ट्रीय कृषि कंपनियों के उपयोगी वस्तुओं पर किसी भी प्रकार के एकाधिकार को खत्म करने की तरफ कार्य करना चाहिए, जिससे कि भूख के विरूद्ध इस लड़ाई में स्वास्थ्य की जरूरत को ध्यान में रखते हुए हमें किसानों, कृषि और स्थानीय कृषि - बाज़ार को बढ़ावा देना चाहिए एवं उन्हें सहायता प्रदान कराना चाहिए।

2.किसान के रूप में हमारा काम लोगों को भोजन उपलब्ध करना है, और हम ऐसा करना जारी रखेंगे। हम समझते हैं कि स्वस्थ भोजन का उत्पादन बंद नहीं हो सकता है और यह कोविड-19 के खिलाफ रक्षा का पहला चरण है। इसके लिए संकट के दौरान और इसके बाद भी किसानों के लिए सुरक्षित और गरिमापूर्ण जीवन-यापन की व्यवस्था होना आवश्यक है।

3.जुताई से जवाब की तलाश तकः- हमें अपने इतिहास से सीखने की जरूरत है। सामूहिक रूप से काम करना आवश्यक है क्योंकि कई हजार वर्षों से यह प्रथा चलती आ रही है। सिविल सोसायटी, संगठित लोगों और राष्ट्रों को न्याय और गरिमा के लिए व्यापक रूप से मिलकर काम करना होगा।

कोरोना और किसान सीरीज भाग एक- किसानों को संकट से उबारने के लिए किसान शक्ति संघ के 20 सुझाव

भाग एक यहां पढ़ें- किसानों को संकट से उबारने के लिए किसान शक्ति संघ के 20 सुझाव

4. खाद्य संप्रभुताः मानवजाति को निरोग और निरंतर रूप से खाद्यान आपूर्ति करना अति महत्वपूर्ण है। ग्रामीण किसान बाजार और स्थानीय मेलों को शहरों के लिए खाद्यान आपूर्ति और भूख को रोकने के लिए तुरंत खोलना चाहिए। इस संकट के दौरान सरकारों को छोटे पैमाने पर किसानों द्वारा उत्पादित भोजन की सार्वजनिक खरीद सुनिश्चित करनी चाहिए। हमें एग्रोकोलॉजी के सिद्धांतों को अपनाना चाहिए और अपनी शारीरिक प्रतिरक्षा को बेहतर बनाने के लिए हमारे समुदायों को पौष्टिक, स्वस्थ भोजन खिलाना चाहिए जो सुपरमार्केट और फास्ट फूड चेन कभी उपलब्ध नहीं करा सकते।

5.भारत सरकार को क्वालिटी पब्लिक हेल्थ केयर में निवेश की गारंटीः- कोविड-19 संकट के संदर्भ में, जीवन की रक्षा में दृढ़ प्रतिबद्धता और बिना भेदभाव के साथ, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में, निः शुल्क परीक्षण और पूर्ण उपचार सुनिश्चित कराना अति आवश्यक है। इस संकट में हम किसी भी सार्वजनिक सेवाओं के निजीकरण या उससे लाभ उठाने के सभी प्रयासों भरपूर विरोध करना चाहिए।

6.यह संकट हमें परिवर्तन के बीज फैलाने का एक अवसर भी देता है। हमें समाज के विभिन्न मॉडल और कृषि-खाद्य प्रणालियों के लिए भूमि तैयार करनी चाहिए। यह कार्य उन गठबंधनों के निर्माण की कामना करता है जो आगे बड़े उपयोगी हैं। एकजुटता और अंतर्राष्ट्रीयता हमारे समाजों के इस पुनः निर्माण के प्रेरक मूल्य होने चाहिएः

7.निर्माता/ उपभोक्ता - हमें कृषि को वायदा बाजारी और इसे सिर्फ खरीदने और बेचने की वस्तु समझने वाली सोच का विरोध करना चाहिए। हमें व्यापार के लिए अपने स्थानीय नेटवर्क को बढ़ावा देना चाहिए। स्थानीय किसान बाजारों को मजबूत करते हुए उचित व्यापार और वस्तु विनिमय व अन्य अन्य प्रणालियों को बढ़ावा देना चाहिए।


भारतीय किसान यूनियन की प्रमुख मांगेः

1- 1.5 लाख करोड़ (सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 5 प्रतिशत) का आर्थिक पैकेज किसानों के लिए भारत सरकार मुहैया कराएं।

2.गांव स्तर पर कृषि उत्पादों का न्यूनतम सहायता मूल्य पर खरीद हो।

3.हमारे किसानों को प्रोत्साहित करे और कृषि उत्पादों के आयात पर निर्भरता को समाप्त कर कृषि आयात पर रोक लगाई जाए।

4.दुग्ध, सब्जियों एवं फल-फूल उत्पादक किसानों की सहायता की जानी चाहिए। दुग्ध एवं फल-फूल की खरीद गांव-गांव से होना चाहिए। साथ ही साथ इन खराब होने वाली वस्तुओं का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित होना चाहिए।

5.पिछले दिनों भारी ओलावृष्टि और बारिश के चलते किसानों को हुए भारी नुकसान की भरपाई सरकार उनके एक साल तक का बिजली, पानी, और बैंक लोन पर ब्याज को माफ किया जाए।

6.विदेशी ऋणों का भुगतान नहीं करके स्वास्थ्य, शिक्षा, श्रम और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सार्वजनिक नीतियों में पुनर्निवेश को प्राथमिकता दे।

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