मध्य प्रदेश में पूरे वर्ष सिर्फ किसान ही रहा सुर्खियों में 

मध्य प्रदेश में पूरे वर्ष  सिर्फ किसान ही रहा सुर्खियों में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान।

भोपाल (भाषा)। मध्य प्रदेश, वर्ष 2017 के लिए किसान, किसान आंदोलन, और किसान से संबंधित मुद्दों के लिए पूरे देश में सुर्खियों में रहा। कर्ज एवं फसल खराब होने से परेशान 160 से अधिक किसानों की कथित आत्महत्या की खबरें भी छाई रहीं। और इस पर राजनीतिक दलों ने खूब रोटियां सेंकी।

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मध्यप्रदेश के हक में एक अच्छी बात ये रही कि इस प्रदेश ने फसल के लिए लगातार पांचवीं बार कृषि कर्मण पुरस्कार जीता। पर फसलों के वाजिब दाम और कर्जमाफी सहित अन्य मांगों को लेकर किसानों का राज्यव्यापी आंदोलन और मंदसौर में छह जून को पुलिस की गोलीबारी में छह किसानों की मौत, कर्ज एवं फसल खराब होने से परेशान करीब 160 किसानों की कथित आत्महत्या की खबरों की पूरे देशभर में चर्चा रही।

वर्ष 2018 के नवंबर-दिसंबर में प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं हो सकता है कि इन चुनावों में किसान संबंधित मुद्दे ख्य मुद्दे के रूप में नजर आएं।

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मध्य प्रदेश में वर्ष 2017 साग-सब्जी, फलों, गेहूं एवं दलहनों की अच्छी उपज हुई, पर लागत से बहुत कम मूल्य मिलने के कारण किसान मध्यप्रदेश सरकार से नाखुश रहे और उन्होंने विरोधस्वरुप प्याज, टमाटर, दूध एवं पपीते की फसल को सड़कों पर फेंका। इसके अलावा, किसानों ने अरहर, उडद एवं मसूर के साथ-साथ गेहूं को बाजार में बेचने पर लागत से कम मूल्य मिलने की शिकायत की।

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मध्यप्रदेश में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने पिछले 14 साल से सत्ता पर काबिज भाजपा नीत सरकार को किसान विरोधी सरकार करार देकर उसे घेरने की कोशिश की और वह अगले साल नवंबर-दिसंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव में किसानों से जुडे इन्हीं मुद्दों को मुख्य मुद्दा बनाकर सत्ता में वापस आने की राह देख रही है।

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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सरकार के लिए किसानों का आंदोलन एवं प्रदर्शन इस साल सबसे बड़ी चुनौती रहे। इस कमी को पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री किसानों के लिए भावांतर योजना जैसी कई योजनाएं लेकर आए, ताकि किसानों को फसल बेचने पर नुकसान नहीं हो। किसानों ने कड़ी मेहनत से पैदा किए गए प्याज को जब सड़कों पर फेंकना शुरू किया तो राज्य सरकार ने किसानों से आठ रुपए प्रति किलोग्राम प्याज खरीद कर किसानों की नाराजगी दूर करने की कोशिश की।

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इस बीच, मंदसौर में पुलिस गोलीबारी में छह किसानों के मारे जाने के तुरंत बाद राज्य में किसानों का आंदोलन हिंसक हो गया। किसानों ने प्रदेश के कई हिस्सों में दुकानों एवं वाहनों में आगजनी, तोड़फोड़ और लूटपाट की, जिससे व्यथित होकर मुख्यमंत्री शिवराज चौहान प्रदेश में शांति बहाली के लिए भोपाल में अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे। उन्होंने बाद में शांति बहाल होने पर डेढ़ दिन में ही अपना धरना समाप्त कर दिया था। मुख्यमंत्री ने मारे गए किसानों के परिजन से उनके घर जाकर भेंट की और उन्हें सांत्वना देने के साथ-साथ एक-एक करोड़ रुपए मुआवजा भी दिया।

मंदसौर में आंदोलन कर रहे किसानों पर छह जून को की गई पुलिस की गोलीबारी के बाद प्रदेश में किसानों की आत्महत्या के मामले अचानक बढ़ गए।
अजय सिंह कांग्रेस नेता नेता प्रतिपक्ष मध्यप्रदेश विधानसभा

उन्होंने दावा किया कि कर्ज एवं फसल के खराब होने से परेशान होकर मंदसौर की घटना के बाद से लेकर अब तक प्रदेश के 160 से अधिक किसानों ने आत्महत्या की है।

उन्होंने कहा कि भाजपा नीत राज्य सरकार किसान विरोधी है और अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी प्रदेश में हो रहे भ्रष्टाचार, मंदसौर पुलिस गोलीबारी और किसानों की आत्महत्याओं को मुख्य मुद्दा बनाएगी।

हालांकि, मध्यप्रदेश सरकार एवं भाजपा नेताओं का कहना है कि इन किसानों ने कर्ज और फसल खराब होने के कारण आत्महत्या नहीं की है, बल्कि पारिवारिक कलह सहित अन्य व्यक्तिगत कारणों से खुदकुशी की है।

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इसके अलावा, मध्यप्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) द्वारा विभिन्न सरकारी पदों पर भर्ती के लिए ली गई परीक्षाओं में हुए कथित बहुचर्चित घोटाले में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को क्लीन चिट मिलना और व्यापमं द्वारा मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए ली गई प्री-मेडिकल परीक्षा में हुए घोटाले में प्रदेश के चार निजी मेडिकल कॉलेजों के अध्यक्षों एवं चिकित्सा विभाग के दो अधिकारियों सहित 592 आरोपियों के खिलाफ सीबीआई द्वारा स्थानीय अदालत में आरोपपत्र दाखिल करने की खबरें भी चर्चा में रहीं।

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