बीएचयू की कहानी 4 लड़कियों की जुबानी... ‘हां हम हर वक्त छेड़खानी की दहशत में जीते हैं’, देखें वीडियो

बीएचयू की कहानी 4 लड़कियों की जुबानी... ‘हां हम हर वक्त छेड़खानी की दहशत में जीते हैं’, देखें वीडियोबीएचयू में प्रदर्शन के दौरान आमने सामने पुलिस और छात्राएं। फोटो- पीटीआई

लखनऊ/बनारस। बीएचयू में आखिर ऐसा क्या हुआ या होता आ रहा है जो हजारों लड़कियां सड़क पर उतर पड़ीं। क्या वजह सिर्फ दो दिन पहले हुई फाइन आर्ट की छात्रा से छेड़खानी थी या फिर कुछ और।

लाठीचार्ज पर सियासत भी शुरु हो गई है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। लेकिन हमारा मुद्दे में सिर्फ वहां पढ़ने वाली हजारों छात्राएं हैं। गांव कनेक्शन ने बीएचयू की 4 लड़कियों से बात, इन लड़कियों ने माना कि वो बीएचयू कैंपस और उसके बाहर का इलाका बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है, इन्होंने जो बताया वो लिखना भी नहीं जा सकता है। वो शायद बोल भी नहीं पाती अगर पानी उनके सिर के ऊपर से न निकल जाता है। पढ़िए और सुनिए आपबीती और आंखों देखी चार कहानियां-

बीएचयू में धारा 144 लागू।

1. त्रिवाणी हॉस्टल में रहने वाली पूर्वांचल की छात्रा ने कहा- बीएचयू में लड़कियां सुरक्षित नहीं

मैं उसी हास्टल में रहती हूं, जहां रहने वाली फाइन आर्ट की छात्रा से छेड़खानी के बाद विवाद हुआ। ये सच है कि बीएसचू का माहौल लड़कियों के लिए सुरक्षित नहीं है। अगर शाम 6 बजे के बाद लड़कियां बाहर जाती हैं और कोई दिक्कत होती है, तो लड़की को ताना दिया जाता है। प्राक्टर और वार्डन उसे कहते हैं, देर से क्यों आई, छेड़खानी करने वाले को पकड़ा क्यों नहीं, गाड़ी का नंबर क्यों नहीं नोट किया।

कैंपस का माहौल आज ही खराब नहीं हुआ। करीब साल भर पहले कुछ लड़कों ने रिक्शे से जा रही लड़की का दुपट्ट खींच लिया था, वो नीचे गिर गई, उसका पैर टूट गया। लेकिन कोई केस नहीं हुआ। सब जानते ये छेड़खानी की घटना है लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।

ज्यादातर बार गार्ड सब देखते हुए बोलते नहीं तो कई बार जो गार्ड बोलते हैं। आरोपी लड़के उनसे भी मारपीट करते हैं। अभी कुछ दिनों पहले एक लड़की को लड़कों ने अकेले पाकर घेर लिया। वो किसी तरह गार्ड तक पहुंची तो गार्ड सबसे पहले लड़की से कहा- ‘तुम हॉस्टल जाओ।’ उसने लड़कों से कुछ नहीं कहा- लेकिन बाद में उसे गालियां दी और उसकी कुर्सी तोड़ दी।

बाहरी लड़के भी कैंपस में आते हैं। लड़कियां पढ़े या शिकायत कर कानूनी पचड़ों फंसे ? वो ज्यादातर बार ये सब अवाइड करती हैं। लड़कियां परेशान हो गई हैं। कैंपस में बाहरी फोर्स को बुलाना अच्छा नहीं माना जाता। शाम 6 बजे के बाद हॉस्टल से नहीं निकलने पर पाबंदी के चलते हमारी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। मैं पूरी कोशिश करती हूं कि अकेले बाहर न जाऊं, सब लड़कियां ग्रुप में निकलने की कोशिश में रहती हैं।

हम लोग हंगामा नहीं चाहते थे, बाहरी लोगों ने बवाल किया”

हम लोग इतना बड़ा आंदोलन नहीं करना चाहते थे, बस अपनी आवाज़ अधिकारियों तक पहुंचाना चाहते थे। हम वीसी सर का भी सम्मान करते हैं। वो हम लोगों से उस दिन ( लाठीचार्ज वाले दिन) बात करने आने वाले को बोले थे, लेकिन दूसरे हास्टल के नेता टाइप लड़के-लड़कियों और कुछ बाहरी लोगों ने इतना हंगामा करवा दिया। इसीलिए जरुरी है बाहरी लोगों के आने पर सख्ती हो और लड़कियों की सुरक्षा दी जाए।

2.‘लड़के हमेशा छूने के फिराक में रहते हैं’

जैसे ही हम बाहर निकलते हैं, डर लगने लगता है। चाहे लंका ही क्यों न जाना हो। ऑटो में बैठो तो बाइक वाले लड़के आकर बोलेंगे मेरे साथ क्यों नहीं चलती। लंका गेट के बस स्टॉफ पर लड़कों का झुड़ जमा रहता है। वो हर लड़की पर कमेंट करते हैं। लंका में घूम रहे हैं तो छूकर निकल जाएंगे। टकरा कर जाएंगे। मतलब कि शरीर को छूने की कोशिश करते हैं।

कुछ लोग कह रहे हैं बीएचयू में राजनीति हो रही है, लेकिन ये इतना सेंसेटिव मामला है हम क्यों राजनीतिक रुप देंगे। मोदी जी के आने न आऩे का कोई मतलब नहीं। क्योंकि त्रिवेणी हॉस्टल की लड़की के साथ इतनी शर्मनाक घटना हुई थी, उसके कुर्ते में हाथ डाला था, सलवार में हाथ डालने की कोशिश की, ये इंतहा थी। कुछ लोग हो सकता है इस मुद्द से ध्यान भटकाना चाहते हों लेकिन हमें सिर्फ सुरक्षा चाहिए।

( झारखंड की मूल निवासी सोशल साइंस में फाइनल ईयर की छात्रा)

गांव कनेक्शन ने बीएचयू की 4 छात्राओं से बात कर उनकी आवाज़ को रिकार्ड किया है।

3. मेल फ्रेंड के साथ होने पर गार्ड जरुर टोकेंगे, मॉरल पुलिसिंग भी बहुत है- शिवांगी

जब मैं अपने किसी मेल फ्रेंड, सहपाठी के साथ होती हूं तो गार्ड जरुर कुछ न कुछ बोलेंगे। और वही गार्ड छेड़खानी करने वाले लड़कों को देखकर आवाज नहीं निकालते। दोस्त के साथ होने पर बाकी लड़के भी कमेंट करते हैं। मॉरल पुलिसिंग भी बड़ी समस्या है।

4. दो लड़के बाइक से आए बोले- 5000 दूंगा, चलोगी- मिनिश्री

मैं रिक्शे पर थी और लंका गेट के पास बाइक से दो लड़के आए। एक बोला- एक रात के 5000 रुपए दूंगा चलोगी क्या। बहुत गुस्सा आया, लेकिन क्या करती। उस दिन मैं बहुत रोई थी। कैंपस और उसके बाहर कई जगह कई जगह इस फिराक में रहते हैं कब फिजिकल छूने को मिले।

कुछ लड़के तो बहुत बद्तमीज हैं। नवीन गर्ल्स हास्टल के बाहर कई लड़के मास्टरबेट इन (हस्तमैथुन) करते हैं। हम लोगों ने शिकायत की तो प्रॉक्टर ने कहा- पकड़ों उन्हें, लेकिन गेट बंद होता है तो क्या खिड़की से कूदकर पकड़ लें। हम लोगों ने लिखित में शिकायत की। कोई कार्रवाई नहीं हुई।

कैंपस में कोई एक जगह नहीं है, यहां छेड़खानी बहुत रेग्लुलर है। ये पहला मामला नहीं था छेड़खानी का, बस ये ईशु बड़ा हो गया है। आप ये समझिए वार्डन तक कमेंट करती है। “ अरे क्या हुआ कोई पहाड़ थोड़े टूटा है, प्राइवेट पार्ट ही तो छुए हैं। हम (वार्डन, दूसरी महिला कर्मचारी) खुद कई बार छेड़खानी का शिकार हुई हैं।”

हम हिंसा नहीं चाहते थे, इसका अफसोस है’

हम सब परेशान हो गई हैं इसलिए इस बार सड़क पर उतना पड़ा। लेकिन हम लोग हिंसा नहीं चाहते थे। विवाद कैंपस के अंदर हुआ। दरअसल उस दिन (लाठीचार्ज वाले दिन) वीसी लॉज के प्रदर्शन चल रहा था, कई लड़के-लड़कियां फेसबुक लाइव कर रहे थे, इसी दौरान कुछ पुलिसवाले आए और कहा यहां से जाओ, तो प्रदर्शन करने वालों ने कहा- कैंपस हमारा हम कहीं भी प्रदर्शऩ करेंगे। इसी पर लाठीचार्ज हुआ।

पुलिसवाले की इंटेशन लड़कियों को मारने की नहीं थी, वो उस वक्त लड़कों को मार रहे थे। लेकिन लड़कियां उन्हें बचाने पहुंची तो उन्हें भी चोट आई। ये बात जब दूसरे हास्टल और मुख्य प्रदर्शन स्थल (बिड़ला, एमएमबी, लंका) आ तक पहुंची तो विवाद हो गया। यहां लाठीचार्ज हुआ। क्रिया की प्रतिक्रिया में मारपीट हुई। हम (लड़कियां) हिंसा नहीं चाहते थे, इसका हमें अफसोस है।

नोट- सुरक्षा के लिहाज से ऊपर की लड़कियों की पहचान गुप्त रखी गई है। जिन्हें नाम देने में परहेज नहीं था उनका नाम शामिल है।

आखिर क्या चाहती हैं बीएचयू की छात्राएं ?

  1. कैंपस में सुरक्षा के पूरे इंतजाम
  2. अंधेरी जगहों पर लाइट की पूरी व्वयस्था
  3. कैंपस में पर्याप्त सीसीटीवी कैमरे
  4. आने-जाने वालों का पूरा रिकार्ड
  5. 24 गुणा 7 की सिक्योरिटी

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