किसानों के लिए बड़ी ख़बर, योगी की तर्ज पर फड़नवीस सरकार ने किया कर्ज़ा माफ

किसानों के लिए बड़ी ख़बर, योगी की तर्ज पर फड़नवीस सरकार ने किया  कर्ज़ा माफmaharashtra govt announces loan waiver

मुंबई। महाराष्ट्र के लाखों किसानों के लिए राहत की ख़बर है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की राह पर चलते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने छोटे और मंझोले किसानों का कृषि ऋण माफ कर दिया है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार महाराष्ट्र में 4067200 किसान परिवार कर्ज में डूबे हैं।

महाराष्ट्र में कर्ज़माफी, दूध के दाम बढ़ाने और लाभकारी मूल्य के लिए किसान संगठनों ने 12 जून से फिर राज्यव्यापी हड़ताल करने करने का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन उससे पहले किसान संगठनों से वार्ता के बाद सरकार ने कर्ज माफी का ऐलान कर दिया। जिसके बाद किसानों ने अपना आंदोलन वापस ले लिया।

‘‘सरकार ने किसानों का कर्ज माफ करने का निर्णय किया है। सीमांत किसानों का सारा कर्ज आज से ही माफ किया जाता है।'' मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस द्वारा गठित उच्च-स्तरीय समिति के अध्यक्ष और राजस्व मंत्री रविकांत पाटिल रविवार को किसान नेताओं से चर्चा के बाद संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे। इस बैठक किसानों की तरफ से शामिल हुए स्वाभिमानी शेतकारी संगठन के नेता और लोकसभा सदस्य राजू शेट्टी ने कहा कि वह खुश हैं कि उनकी मांगें मान ली गयी हैं। शेट्टी ने कहा, ‘‘हमारे मुद्दे सुलझ गये हैं। हमने धरना प्रदर्शन सहित अपना आंदोलन अस्थाई रुप से वापस लेने का फैसला लिया है। लेकिन, यदि 25 जुलाई तक (कर्जमाफी) कोई संतोषजनक फैसला नहीं लिया गया तो हम अपना आंदोलन फिर शुरु करेंगे।''

महाराष्ट्र की महिला किसान

केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार महाराष्ट्र में 4067200 किसान परिवार कर्ज में डूबे हैं। बढ़ते कर्ज के बोझ और उपज का मूल्य न मिलने से 1 जून को पश्चिमी महाराष्ट्र से आंदोलन शुरु किया था। आज किसान प्रतिनिधियों से वार्ता के बाद मुख्यमंत्री ने किसानों को ये भरोसा दिया। सरकार लोन माफ करने के लिए एक कमेटी बनाएगी तो कर्जमाफी के मानक तैयार करेगी। किसान संगठनों ने इस फैसले के बाद 12 जून से अपने राष्ट्रव्यापी आंदोलन को वापस ले लिया है। इस बारे में बात करते हुए स्वाभिमानी शेतकारी संगठन के नेता राजू शेट्टी ने कहा कि मुख्यमंत्री फडनवीस की सरकार ने हम पूर्ण कर्ज माफी का वादा किया है। किसानों के मामले में देवेंद्र फडनवीस सरकार की सहयोगी शिवसेना भी सरकार को धमका रही थी।

सरकार ने किसानों का लोन माफ करने का निर्णय किया है। सीमांत किसानों का सारा लोन आज से ही माफ किया जाता है।
चन्द्रकांत पाटिल, राजस्व मंत्री, महाराष्ट्र

अन्य किसान नेता रघुनाथदादा पाटिल ने कहा कि मंत्री ने आश्वासन दिया है कि किसानों का ‘‘सारा कर्ज'' माफ होगा। फिलहाल दीवाली के त्योहार जैसा माहौल है। हमारी सभी, 100 प्रतिशत, मांगें मान ली गयी हैं।'' मंत्रीसमूह ने किसानों को आज से ही नये सिरे से कर्ज देना शुरु करने का फैसला लिया है।

पिछले वर्ष भी किसानों ने किया था प्रदर्शन

पूरे भारत में करीब 4.68 करोड़ परिवार कर्ज में डूबे हैं, देश के 10 बड़े कर्जदार राज्यों में उत्तर प्रदेश का पहला स्थान है। इस संबंध में 30 सितंबर 2016 को जारी अंतिम आंकड़े के अनुसार यूपी के 79,08,100 किसान परिवार कर्ज में डूबे हुए हैं। जबकि महाराष्ट्र में 40,67,200 किसान परिवार कर्ज के दलदल में फंसे हैं। महाराष्ट्रद में 1.07 करोड़ किसान हैं, जिनके पास 5 एकड़ व उससे कम जमीन है। कर्ज माफी की इस स्कीहम का फायदा इन किसानों को ही फायदा होगा। इंडिया रेटिंग्सद के मुताबिक किसानों की कर्ज माफी से राज्य। का वित्ती य घाटा वित्ति वर्ष 2018 में 2.71 फीसदी पर पहुंच जाएगा। कर्जमाफी से महाराष्ट्र पर करीब 30 हजार करोड़ का बोझ पड़ेगा।

छोटे और मंझोले किसानों का ही कर्ज माफ हुआ हो विदर्भ व मराठवाड़ा के किसानों को नहीं होगा ज्यादा फायदा ?

महाराष्ट्र के बड़े किसानों को इसका कितना लाभ मिलेगा ये अभी तय नहीं है। लेकिन कृषि के जानकार इस पर सवाल उठा रहे हैं। दिल्ली में रहने वाले कृषि नीति के जानकार रमनदीप सिंह मान फेसबुक पर लिखते हैं, अगर महाराष्ट्र में सिर्फ छोटे और मंझोले किसान का कर्ज़ा माफ़ होता तो विदर्भ इलाके और मराठवाड़ा के किसान को फायदा ही नहीं होगा, जबकि 50 फीसदी आत्महत्याएं विदर्भ के इलाके में हुई हैं।”

अगर महाराष्ट्र में सिर्फ छोटे और मंझोले किसान का कर्ज़ा माफ़ होता तो विदर्भ इलाके और मराठवाड़ा के किसान को फायदा ही नहीं होगा, जबकि 50 फीसदी आत्महत्याएं विदर्भ के इलाके में हुई हैं।
रमनदीप सिंह मान, कृषि नीति के जानकार, फेसबुक पर

वो आगे लिखते हैं, पश्चिम महाराष्ट्र (पुणे, सतारा, सांगली, कोल्हापुर, शोलापुर) में जोत छोटी है, और यहां सबसे ज्यादा मंझले किसान हैं, जिनकी संख्या करीब 18,73,156 है। ये सिंचिंत जमीन है लेकिन बंटवारे आदि से जोत छोटी हुई। लेकिन विदर्भ इलाके में काफी कम कमाई होती और भूमि भी कम सिंचिंत है, इसलिए यहां जोत बड़ी है। यहां मझोंले किसानों की संख्या 9,04,959 है। इसलिए सबका कर्जमाफ होना चाहिए।”

एक नजर बड़े आंकडों पर

  • महाराष्ट्र के 40 लाख 67 हज़ार 200 किसान परिवार क़र्ज़ में दुबे हुए हैं।
  • पूरे भारत भर के किसानों पर 12.60 लाख करोड़ रुपए का क़र्ज़ है
  • जिसमें कि मध्य प्रदेश के किसानों पर 31 मार्च 2016 तक कुल 1.64 लाख करोड़ रुपए का क़र्ज़ था
  • पूरे भारत भर में 4.68 करोड़ से ज़्यादा परिवार क़र्ज़ में दुबे हुए हैं।
  • प्रति वर्ष सबसे ज्यादा किसान महाराष्ट्र में आत्महत्या करते हैं
  • छोटे और मंझले किसान का कर्ज़ा माफ़ हो गया है, कल से बैंक जा कर फसली लोन ले सकता है किसान ।
  • बड़े किसानों का भी कर्ज़ा माफ़ होगा, उसकी कमिटी बना दी गई है ।
  • दूध का रेट भी बढ़ेगा, 2 दिन में इसकी घोषणा भी होगी


ये भी पढ़ें- खाली हाथ किसानों का अल्टीमेटम, 60 से ज्यादा किसान संगठन मिलकर करेंगे देश में चक्का जाम


क्यों सड़क पर उतरे थे महाराष्ट्र के किसान

नासिक। देश मे सबसे अधिक आत्महत्या की ख़बरें महाराष्ट्र से आती हैं। मराठवाड़ा और विदर्भ को किसानों की कब्रगाह कहा जाना लगा है। पिछले कई वर्षों से सूखे की मार झेल रहे महाराष्ट्र में किसानों की हालत दयनीय है।

बीटी काटन का दंश झेल रहे महाराष्ट्र के किसान पिछले कई वर्षों से अपनी उपज का उचित मूल्य पाने के लिए संघर्ष करते रहे हैं। महाराष्ट्र में नागपुर के आसपास जो विदर्भ का भी इलाका कहलाता है, वहां कपास और संतरे की खेती बहुत होती है। तो मारठवाड़ा (औरंगबाद, नासिक, जलगांव, सोलापुर) इलाके में गन्ना मुख्य फसल है,प्याज भी बहुतायत होता है। भुसावल का केला देशभर में प्रसिद्ध हैं, बाजवूद इसके आए दिन किसानों की आत्महत्या की ख़बरें आती है।

पानी और प्रकृति से लड़कर खेती करता है महाराष्ट्र का किसान

मुंबई से करीब 400 किमी. दूर सांगली जिले के तहसील वाल्वा के कारनबाड़ी के सुरेश काबड़े बताते हैं, यहां का किसान पानी और प्रकृति से लड़कर खेती करता है लेकिन उसे उचित दाम नहीं मिलता। हमारे पड़ोसी राज्य गुजरात में गन्ने की कीमत 300 से 450 तक जाती है, जबकि उसकी रिकवरी कम है, और हमारे यहां300 रुपए प्रति कुंटल का ही रेट मिलता है। यही हाल बाकी फसलों का है, जो वादे कर ये (मोदी सरकार) सत्ता में थी, सब हवा हवाई है, अबकी चुनाव कुछ अलग होगा।”

जानकार बताते हैं, महाराष्ट्र की बड़ी चीनी मिलें और शराब इंडस्ट्री बड़े नेताओं की हैं। इन्हीं के पास कपड़ा और वो फैक्ट्रियां हैं जो किसानों का माल खपाती हैं। जो सप्लाई चेन को कंट्रोल करती हैं, बाजार और मंडियों में इन्हीं का राज चलता है, जिससे किसानों की उपज की उन्हें बेहतर कीमत नहीं मिल पाती है।

45 फीसदी आत्महत्या करने वाले किसान महाराष्ट्र के होते हैं

देश में जितने भी किसानों ने आत्महत्याएं की हैं उनमें से 45 फीसदी किसान महाराष्ट्र से हैं, पिछले दो दशक में महाराष्ट्र के 35 में से 28 जिले प्राकृतिक आपदा (सूखा, ओला और बारिष) से प्रभावित रहे हैं। साथ ही महाराष्ट्र के किसान सबसे अधिक नगदी फसलें उगाते हैं, इसमें लगात सबसे ज्यादा आती है। जैसे केला,कपास, संतरा, नासपाती और सोयाबीन, प्याज की अगर वक्त पर कीमत नहीं मिलीं तो उपज पूरी बर्बाद हो जाती है।

पिछले दो दशक में सबसे ज्यादा 65 हजार किसान महाराष्ट्र में ही आत्महत्या किए हैं। देशभर में किसानों के हालत चिंताजनक हैं। किसानों के लिए कर्ज ही नहीं बल्कि उनकी उपज का उचित लाभ मिले यह भी बड़ा मुद्दा है।
पी साईंनाथ, ग्रामीण मामलों के जानकार पत्रकार

केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार महाराष्ट्र में 4067200 किसान परिवार कर्ज में डूबे हैं। मैग्सेसे अवार्ड विजेता कृषि के जाने माने पत्रकार पी साईंनाथ ने आंदोलन शुरु होने पर कहा था, " पिछले दो दशक में सबसे ज्यादा 65 हजार किसान महाराष्ट्र में ही आत्महत्या किए हैं। देशभर में किसानों के हालत चिंताजनक हैं। किसानों के लिए कर्ज ही नहीं बल्कि उनकी उपज का उचित लाभ मिले यह भी बड़ा मुद्दा है।"

ये भी पढ़े-देश में सबसे अधिक कर्ज़दार हैं यूपी के किसान

Share it
Top