बिहार में दूसरी बार आयोजित होगा ‘किन्नर सांस्कृतिक महोत्सव’

बिहार में दूसरी बार आयोजित होगा ‘किन्नर सांस्कृतिक महोत्सव’रेश्मा 

लखनऊ। किन्नर समुदाय की समाजिक स्वीकारता बढ़ाने के लिए बिहार सरकार 23 जून को एक दिवसीय ‘किन्नर सांस्कृतिक महोत्सव’ का आयोजन करने जा रही है।

राजधानी पटना में युवा कला और संस्कृति विभाग, बिहार सरकार द्वारा ‘किन्नर सांस्कृतिक महोत्सव’ का आयोजन किया जा रहा है। किन्नर महोत्सव का यह दूसरा वर्ष है। महोत्सव में देश के अलग-अलग हिस्सों से किन्नर शामिल होंगे। महोत्सव में वो किन्नर भी हिस्सा लेंगे जो अलग-अलग क्षेत्रों में बेहतर काम कर रहे हैं। बिहार में लगभग 40 हज़ार किन्नर हैं।

किन्नर समुदाय के लोग भी हमारे समुदाय से है। वो भी हमारे हिस्सा है। गाँवों में किन्नरों को लक्ष्मी माना जाता है। गाँवों में एक कहावत कही जाती है, किन्नर अगर कोई समान छू दे तो बरक्कत होती है। ऐसे में उनको अलग समझना गलत है।
शिवचंद्र राम, मंत्री, युवा कला और संस्कृति विभाग बिहार

बिहार के युवा कला और संस्कृति विभाग के मंत्री शिवचंद्र राम ने गाँव कनेक्शन से बात करते हुए बताया, ‘किन्नर समुदाय के लोग भी हमारे समुदाय से हैं। वो भी हमारे हिस्सा हैं। गाँवों में किन्नरों को लक्ष्मी माना जाता है। गाँवों में एक कहावत कही जाती है, किन्नर अगर कोई समान छू दे तो बरक्कत होती है। ऐसे में उनको अलग समझना गलत है। किन्नर समुदाय का आम लोगों में स्वीकारता बढ़े, इसके लिए हम इस तरह के आयोजन कर रहे है।’

लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी भी होंगे शामिल

इस महोत्सव की जिम्मेदारी देख रेख की जिम्मेदारी रेश्मा को मिली है। रेश्मा बिहार में ‘दोस्ताना सफर’ नाम के एनजीओ के जरिए किन्नर समुदाय की हक की लड़ाई लड़ रही हैं। रेश्मा बताती हैं, ‘ मणिपुर, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, केरल और दिल्ली जैसे राज्यों में किन्नरों के कला और संस्कृति पर सालों से काम चल रहा है। अपना हुनर दिखाने के लिए उनको अलग-अलग तरह के मंच उपलब्ध है। हम बिहार में भी इसी तरह का मंच बनाने की कोशिश कर रहे है।

समाज में किन्नर को स्वीकार कराने के कोशिश

बिहार के सिवान जिला की रहने वाली रेश्मा बताती हैं, ‘किन्नरों को रचनात्मकता का बढ़ावा देने के लिए तो इस कार्यक्रम का आयोजन हो रहा है। इसके अलावा यह कोशिश है कि हमारा समाज भी किन्नर समुदाय को स्वीकार करें। बिहार में अभी भी किन्नर समुदाय को अजीब निगाहों से देखा जाता है। लोग मजाक उड़ाते है। इस उत्सव के जरिए हम लोगों तक अपनी भावनाएं पहुंचाना चाहते है। इसके अलावा इस उत्सव का उद्देश्य किन्नर समुदाय को भी जागरूक करना है। आज देश के अलग-अलग हिस्सों में किन्नर समुदाय बेहतर काम कर रहे है। उन लोगों को उत्सव में बुलाएँगे जो बेहतर काम कर रहे है।’

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