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बिहार के 23 जिलों के 206 प्रखण्ड सूखाग्रस्त घोषित, किसानों को अनुदान पर मिल रहा डीजल

बिहार सरकार ने इन सूखाग्रस्त किसानों से सहकारिता ऋण, राजस्व लगान एवं सेस, पटवन शुल्क एवं वद्यिुत शुल्क जो सीधे कृषि से संबंधित हो, की वसूली वर्ष 2018-19 के लिए स्थगित रहेगी

बिहार के 23 जिलों के 206 प्रखण्ड सूखाग्रस्त घोषित, किसानों को अनुदान पर मिल रहा डीजल

पटना। महाराष्ट्र और कर्नाटक के बाद अब बिहार सरकार ने जमीनों में दरार उत्पन्न होने, फसलों में मुरझाने का प्रभाव, उपज में 33 प्रतिशत या उससे अधिक उत्पादन में कमी की संभावना को देखते हुए राज्य के 23 प्रभावित जिलों के 206 प्रखण्डों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। आपदा प्रबंधन विभाग से सोमवार को प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य के 23 प्रभावित जिलों के 206 प्रखण्डों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है।

बिहार सरकार ने इन सूखाग्रस्त किसानों से सहकारिता ऋण, राजस्व लगान एवं सेस, पटवन शुल्क एवं वद्यिुत शुल्क जो सीधे कृषि से संबंधित हो, की वसूली वर्ष 2018-19 के लिए स्थगित रहेगी। साथ ही धान की रोपनी को बचाने के लिए कृषि विभाग द्वारा पांच पटवन के लिए डीजल अनुदान दिया जा रहा है। इसी प्रकार नहरों से भी अंतिम छोर तक सिंचाई उपलब्ध कराते हुए जलाशयों में सुलभ संचित जल से भी सिंचाई का प्रबंध कराया गया है। इस क्रम में राजकीय एवं निजी नलकूपों के द्वारा भी सिंचाई कराई जा रही है तथा कृषि उपयोग हेतु बिजली की भी निर्बाध आपूर्ति की जा रही है।

महाराष्ट्र और राजस्थान में सामान्य से कम बारिश, सूखे की आशंका से किसान परेशान

फोटो: गांव कनेक्शन

रोहतास निवासी किसान पुरुषोत्तम कुमार(50वर्ष)का कहना है, " इस बार बारिश में औसत से काफी कम बारिश हुई है। प्रदेश सरकार ने 33 जिलों और 206 प्रखंडों को सूखा घोषित कर दिया है। इसका सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ने वाला है। छोटे कास्तकारों के सामने परेशानी का पहाड़ खड़ा हो गया है। अभी गेहूं की बुआई करनी है, लेकिन खेतों में नमी नहीं है। अब किसान खेत की सिंचाई कैसे करे, यह सोच कर परेशान हुआ जा रहा है।"

राज्य में हथिया नक्षत्र में तो वर्षा नहीं ही हुई उसके बाद भी किसान बारिश की राह देखते रहे। इसकी वजह से अक्टूबर में वर्षा की कमी 72 प्रतिशत हो गई। मुंगेर ऐसा जिला है जहां आज तक 203 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। इसके अलावा इस महीने आठ जिलों में एक बूंद पानी नहीं हुआ। इतने ही जिलों में वर्षा की कमी 90 प्रतिशत से अधिक है। लिहाजा खेती की स्थिति खराब है और खेतों में दरारें पड़ गई हैं।

महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक सूखा घोषित, अन्य क्षेत्र भी सूखे जैसी स्थिति में

साभार: इंटरनेट

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) गांधीनगर के सहयोगी प्रोफेसर विमल मिश्रा ने कहा, "यह सूखा जैसी स्थितियों की शुरुआत है। मानसून की कमी और विभिन्न राज्यों में मिट्टी की कम नमी और खराब संतुलन को ध्यान में रखते हुए, अगले वर्ष की शुरुआत में पानी की दिक्कत और भी भयावह रूप ले सकती है।" मिश्रा आईआईटी गांधीनगर में जल और जलवायु प्रयोगशाला द्वारा जारी दक्षिण एशिया सूखा मॉनिटर का प्रबंधन भी करते है।

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वहीं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने अक्टूबर माह में माना कि राज्य के करीब 180 तालुके सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं। फड़णवीस ने कहा कि केंद्र द्वारा तय किए गए मानदंडों के आधार पर इन तालुकों की पहचान की गई है।

स्थिति इसलिए खराब हुई है क्योंकि राज्य में इस साल कम बारिश हुई है। फड़णवीस ने साप्ताहिक कैबिनेट बैठक के बाद यहां पत्रकारों से कहा, महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति बन गई है। राज्य में वार्षिक औसत की केवल 77 प्रतिशत बारिश हुई है।

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