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बर्ड फ्लू: मुर्गियों को मारने के बाद दिए जाने वाले मुआवजा, लागत का आधा भी नहीं

हरियाणा, महाराष्ट्र जैसे कई राज्यों में पोल्ट्री फार्म बर्ड फ्लू की पुष्टि के बाद मुर्गियों को मारा जा रहा है, जिसके लिए पोल्ट्री मालिकों को मुआवजा भी दिया जाता है, लेेकिन पोल्ट्री मालिकों के अनुसार ये मुआवजा पर्याप्त नहीं है।

Divendra SinghDivendra Singh   15 Jan 2021 8:04 AM GMT

compensation, compensation for bird culling, poultry bird culling, bird flu outbreak,ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब देश में बर्ड फ्लू से पोल्ट्री उद्योग को नुकसान उठाना पड़ा हो। फोटो: गाँव कनेक्शन

कई राज्यों में बर्ड फ्लू से अब हजारों पक्षियों की मौत हो गई है, महाराष्ट्र और हरियाणा में बर्ड फ्लू को फैलने से रोकने के लिए पोल्ट्री बर्ड को मारा जा रहा है। लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब देश में बर्ड फ्लू से पोल्ट्री उद्योग को नुकसान उठाना पड़ा हो। हर बार संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए पक्षियों को मारा जाता है, जिसके एवज में किसान को मुआवजा भी मिलता है, लेकिन क्या मुआवजा राशि पर्याप्त है?

जनवरी के पहले सप्ताह में केरल के कोट्टायम और अनप्पुझा जिलों में बतखों की पुष्टि हुई, उसके बाद राजस्थान, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में अब तक बर्ड फ्लू की पुष्टि हो गई है। हरियाणा, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ पोल्ट्री फार्म पर मुर्गियों की मौत हुई थी, जबकि दूसरे राज्यों में अभी तक प्रवासी पक्षियों, कौवों और कबूतर जैसे पक्षियों की मौत हुई है।


महाराष्ट्र के नंदूरबार जिले में साल 2006 में नवापुर तालुका में कई पोल्ट्री फार्म में बर्ड फ्लू फैलने के बाद मुर्गियों को मार दिया गया था। फरवरी 2006 से अप्रैल 2006 तक महाराष्ट्र के नंदूरबार के नवापुर और जलगाँव जिले के जानवे और इच्छखेदा गाँव के दर्जनों लेयर पोल्ट्री फार्म पर बर्ड फ्लू फैलने से लेयर लगभग 9.4 लाख मुर्गियों को मार दिया गया।

नंदूरबार जिले में पंगारण में पिछले 20 साल से लेयर पोल्ट्री फार्म चलाने वाले सतीश गावित का पोल्ट्री फार्म भी इसकी चपेट में आया था। सतीश गाँव कनेक्शन को बताते हैं, "साल 2006 में नवापुर में जितने भी पोल्ट्री फार्म थे, वहां पर कलिंग हुई थी। हमारे यहां 30 हजार लेयर मुर्गियां थीं, तब उनके पर बर्ड 40 रुपए मिले थे। सरकार ने 40 रुपए दिए थे, इतने में कहां लेयर बर्ड तैयार होती है। मुर्गियों के मारे जाने के बाद फिर से पोल्ट्री फार्म शुरू करने में दो साल लग गए थे। नवापुर में ज्यादातर पोल्ट्री फार्मर का यही हाल हुआ था, कई लोगों ने तो दोबारा शुरू ही नहीं किया।"

साल 2006 में नंदूरबार और जलगाँव में बर्ड फ्लू के 28 परिकेंद्र थे, जहां पर बर्ड फ्लू से पोल्ट्री बर्ड संक्रमित हुए थे। उस साल 9.4 लाख लेयर मुर्गियों को मारने के बाद पोल्ट्री फार्मर्स को 270 लाख रुपए का मुआवजा दिया गया था। इस साल परभणी और लातूर जिले में पोल्ट्री फार्म में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है। जहां पर अभी 5550 लेयर मुर्गियों को मारा गया है।


इस बार फिर महाराष्ट्र के परभणी जिले में बर्ड फ्लू के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए मुर्गियों की कलिंग की जा रही है। पशुपालन विभाग, महाराष्ट्र के अपर आयुक्त डॉ. धनंजय परकाले गाँव से फोन पर बताते हैं, "साल 2006 में बर्ड फ्लू की शुरूआत नंदूरबार से हुई थी, जिसके दो-चार दिन के बाद जलगाँव में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई थी। उस समय कलिंग के लिए बड़े बर्ड के 40 रुपए दिए थे, जबकि छोटे बर्ड के 20 रुपए दिए गए थे। इस बार केंद्र सरकार ने 90 रुपए लेयर बर्ड, 70 रुपए ब्रायलर बर्ड और चूजों का अभी भी 20 रुपए ही है। 2006 में महाराष्ट्र सरकार ने ही मुआवजा दिया था, लेकिन अब केंद्र सरकार ने मुआवजा निर्धारित कर दिया है। जितने भी बर्ड को मारा जाता है, उसका सारा रिकॉर्ड रखना होता है। रिकॉर्ड के बाद प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाता है, इसके बाद केंद्र सरकार 50% मुआवजा राशि भेजती है, उसमें 50% राज्य सरकार देती है। इसके बाद मुआवजा पोल्ट्री फार्मर के एकाउंट में भेजा जाता है।"

पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के अनुसार साल 2005 से 2015 तक बर्ड फ्लू के संक्रमण को फैलने से रोकने लिए पक्षियों को मारने के बाद अब तक 24.32 करोड़ रुपए की सहायता राशि दी जा चुकी है।

पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय ने मुआवजा राशि निर्धारित की है, जिसमें लेयर मुर्गी के चूजों के 20 रुपए, बड़ी मुर्गियों के लिए 90 रुपए, ब्रायलर मुर्गियों के चूजों के 20 रुपए, बड़ी ब्रायलर मुर्गी के 70 रुपए, बटेर के चूजों के पांच रुपए, बड़े बटेर के 10 रुपए, बतख के चूजों के 35 रुपए, बड़ी बतख के 135 रुपए, गिनी फाउल के चूजों के 20 रुपए, बड़ी गिनी फाउल के 90 रुपए, टर्की के चूजों के 60 रुपए और बड़ी टर्की के 160 रुपए। अंडों को नष्ट करने पर प्रति अंडा तीन रुपए और पोल्ट्री फीड को नष्ट करने पर 12 रुपए प्रति किलो निर्धारित किए गए हैं।

हरियाणा के पंचकुला को पोल्ट्री हब के नाम से जाना जाता है, यहां से अंडे और चिकन आसपास के कई राज्यों में सप्लाई होते हैं। पंचकूला के बरवाला में भी लेयर मुर्गियों को मारा गया है। मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अनुसार हरियाणा में पिछले 30 दिनों में पंचकुला के बरवाला में 4,30,267 पक्षियों की मौत हो गई, जिसके बाद जांच के लिए भोपाल भेजा गया। भोपाल में जांच के बाद मुर्गियों में बर्ड फ्लू की पुष्टि हो गई।

बर्ड फ्लू के संक्रमण को रोकने के लिए यहां पर लगभग 1,66,128 लेयर बर्ड को मार दिया गया, जिसके लिए पोल्ट्री फार्मर को 90 रुपए प्रति मुर्गी के हिसाब से लगभग 1495150 रुपए दिए जाएंगे।

पोल्ट्री फार्मर्स (ब्रॉयलर) वेलफेयर फेडरेशन के सचिव और पोल्ट्री व्यवसायी संजय शर्मा की माने तो मुआवजा राशि से पोल्ट्री फार्मर्स का कुछ नहीं होने वाला है। संजय शर्मा गाँव कनेक्शन से बताते हैं, "पिछले कई साल से सरकार इतना ही मुआवजा दे रही है, इससे पोल्ट्री फार्मर का क्या भला होगा। एक चूजे की कीमत लगभग 40 रुपए पड़ती है, सरकार 20 रुपए दे रही है, एक किलो के ब्रायलर को तैयार करने में 70-80 रुपए लग जाते हैं, जबकि एक ब्रायलर (वजन निर्धारित नहीं) के 70 रुपए मिल रहे हैं, इसी तरह एक लेयर मुर्गी को तैयार करने में 250-300 रुपए लगते हैं, जबकि सरकार 90 रुपए दे रही है।। इससे तो किसान लोन भी नहीं चुका पाएगा, कोरोना की वजह से पहले से ही लोग बर्बाद हो गए हैं, बहुत लोगों ने फार्म बंद कर दिए हैं, जिन्होंने किसी तरह से शुरू किया था, अब उनका क्या होगा, सरकार को मुआवजा राशि बढ़ाने के बारे में सोचना चाहिए।"

पंचकूला में पोल्ट्री फार्म पर मुर्गियों का निस्तारण करते पशु पालन विभाग की टीम। फोटो: ट्वीटर

केरल पिछले कई साल से साल 2014 से बर्ड फ्लू की मार झेलता आ रहा है, जनवरी के पहले सप्ताह में केरल के कोट्टायम और अनप्पुझा जिलों में बतखों की पुष्टि हुई, यहां पर लगभग 12,000 बतखों की मौत बर्ड फ्लू से हो गई है, बर्ड फ्लू के चलते संक्रमित क्षेत्र के एक किमी दायरे में लगभग 40 हजार बतखों को मार दिया गया। लेकिन यहां पर दूसरे राज्यों के मुकाबले मुआवजा राशि काफी ज्यादा है।

केरल में इस बार बड़े पक्षियों के लिए 200 रुपए और छोटे पक्षियों के लिए 100 रुपए मुआवजा राशि निर्धारित की गई है। जबकि प्रति का अंडे के पांच रुपए दिए जाएंगे। पशुपालन विभाग, केरल के सहायक निदेशक डॉ. टेरेंस बी रेमिडी गाँव कनेक्शन को फोन पर बताते हैं, "केरल में अभी तक बतखों की कलिंग हुई है, केंद्र सरकार ने छोटी बतख के 35 रुपए और बड़ी बतख के 135 रुपए निर्धारित किए हैं, लेकिन केरल सरकार ने बड़े पक्षियों के लिए 200 और छोटे पक्षियों के लिए 100 रुपए निर्धारित की है। जल्द ही ये किसानों के एकाउंट में भेज दी जाएगी।"

इससे पहले भी बर्ड फ्लू की वजह से उठाना पड़ा था नुकसान

साल 2006 में मार्च से अप्रैल तक महाराष्ट्र के नंदूरबार और जलगाँव में बर्ड फ्लू के संक्रमण को रोकने के लिए 9.4 लाख पक्षियों को मार दिया गया, जिसके लिए 270 लाख रुपए मुआवजा दिया गया। साल 2006 में ही फरवरी में गुजरात में 92000 हजार पक्षियों के मार दिया गया, जिसके लिए 32 लाख रुपए मुआवजा दिया गया। साल 2006 में ही मध्य प्रदेश में नौ हजार पक्षियों को मारा गया, जिसके लिए तीन लाख रुपए मुआवजा दिया गया।

साल 2007 में मणिपुर के पूर्वी इंफाल जिले के चिंगमेइरॉन्ग में पोल्ट्री फार्म में सबसे पहले एवियन इन्फ्लुएंजा की पुष्टि हुई, जिसके बाद यहां पर 3.39 लाख पक्षियों को मार दिया गया।

साल 2008 में देश में चौथी बार एवियन इन्फ्लुएंजा की पुष्टि हुई। पश्चिम बंगाल के बीरभूमि और दक्षिण दिनाजपुर से इसकी शुरूआत हुई और मुर्शिबाद, बर्दवान, दक्षिण-24 परगना, नादिया, हुगली, हावड़ा, कोच्ची, मालदा, पश्चिम मेदिनापुर, बांकुरा, पुरुलिया, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग जैसे 15 जिलों के 55 प्रखंडों और दो नगर पालिकाओं में फैल गया। पश्चिम बंगाल में 42.62 लाख पक्षियों को मार दिया गया, जिसके लिए 1229 लाख रुपए का मुआवजा दिया गया।

साल 2008 में त्रिपुरा के धलाई जिले के सलीमा ब्लॉक में बर्ड फ्लू की जानकारी मिली, इसके बाद ये बीमारी मोहनपुर, और विशालगढ़ तक पहुंच गई। यहां 1.93 पक्षियों को मार दिया गया, जिसके लिए 71 लाख रुपए का मुआवजा दिया गया।

साल 2005 से 2015 तक देश के अलग-अलग राज्यों में बर्ड फ्लू की स्थिति।

साल 2008 में ही असम के कामरूप जिले से बर्ड फ्लू की शुरूआत हुई और धीरे-धीरे ये कामरूप, बारपेटा, नलबाड़ी, चिरांग, डिब्रूगढ़, बोंगईगाँव, नागाँव और बक्सा जिलों में फैल गई। यहां पर 5.09 लाख पक्षियों को मार दिया गया, जिसके लिए 170 लाख रुपए की मुआवजा राशि दी गई।

दिसंबर 2008 से मई 2009 तक पश्चिम बंगाल के पांच जिलों में एक बार फिर बर्ड फ्लू फैल गया। इसके संक्रमण को रोकने के लिए 2.01 पक्षियों को मार दिया गया, जिसे लिए 68.80 लाख रुपए मुआवजा राशि दी गई।

साल 2009 में सिक्किम रावोंगला नगरपालिका बर्ड फ्लू के प्रकोप की पुष्टि हुई, जहां पर लगभग चार हजार पक्षियों को मार दिया गया। यहां पर करीब तीन लाख मुआवजा दिया गया।

साल 2010 में एक बार फिर पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में बर्ड की पुष्टि हुई, नियंत्रण के लिए यहां पर लगभग 1.56 पक्षियों के साथ ही 18 हजार अंडों को नष्ट कर दिया गया। इसके लिए 68.80 लाख रुपए मुआवजा दिया गया।

साल 2011 में त्रिपुरा के दो सरकारी बतख फार्मों पर बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई, जहां पर लगभ 21 हजार बतखों को मार दिया गया। यहां पर 2.40 लाख रुपए का मुआवजा दिया गया।

आठ सितम्बर, 2011 को असम धुबरी जिले में बर्ड फ्लू की जानकारी मिली, आठ सितंबर 2011 से चार जनवरी 2012 तक असम के कई जिलों में 15 हजार पक्षियों को मार दिया गया, जिसके लिए 6.52 लाख रुपए का मुआवजा दिया गया।

साल 2012 में ओडिशा, मेघालय और त्रिपुरा में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई, जिसमें ओडिशा में 0.81 लाख, मेघालय में 0.07 लाख और त्रिपुरा में 0.13 लाख पक्षियों को मार दिया गया। इसके साथ ही कर्नाटक में 0.33 लाख पक्षियों को मार दिया गया।

साल 2013 में बिहार के पूर्णिया जिले में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई। बिहार में छह हजार पक्षियों को मारकर 2.06 लाख का मुआवजा दिया गया। इसी साल पांच अगस्त 2013 को छत्तीसगढ़ के दुर्ग में जहां पर 31 हजार पक्षियों को मार दिया।

साल 2014 में केरल में 25 नवंबर से आठ दिसम्बर तक 2.77 पक्षियों को मारकर, 379.51 लाख का मुआवजा दिया गया। इसी साल चंडीगढ़ के सुखना लेक में बतखों में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई, जहां पर 110 बतखों को मार दिया गया।

25 जनवरी 2015 को केरल के कोल्लम में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई, जहां पर आठ हजार मुर्गियों को मार दिया गया। इसका 2.16 लाख रुपए का मुआवजा दिया गया। इसी साल 13 मार्च 2015 को उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई, जहां पर 844 मुर्गियों को मार दिया गया। साल 2015 में ही तेलंगाना में 1.60 पक्षियों को मारने के बाद 176.80 लाख का मुआवजा, जबकि मणिपुर में 0.21 लाख पक्षियों को मारने के बाद 13.89 लाख का मुआवजा दिया गया।

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