येदियुरप्पा की कथित डायरी में रिश्वत की रकम दर्ज होने से राजनीतिक भूचाल

कारवां मैगजीन की खबर के बाद कांग्रेस ने लगाए आरोप- शीर्ष बीजेपी नेताओं, वकीलों और जजों को बांटे गए 1800 करोड़ रुपये

गाँव कनेक्शनगाँव कनेक्शन   23 March 2019 10:24 AM GMT

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येदियुरप्पा की कथित डायरी में रिश्वत की रकम दर्ज होने से राजनीतिक भूचाल

नई दिल्ली। बीएस येदियुरप्पा की कथित डायरी आयकर विभाग के पास होने और उसमें बीजेपी के बड़े नेताओं को 1800 करोड़ रुपये रिश्वत देने संबंधी कारवां मैगजीन की खबर के बाद राजनीतिक बयानबाजी चरम पर है।

लोकसभा चुनावों की सरगर्मियों के बीच जहां बीजेपी इसे नकारते हुए सफाई पेश कर रही है, तो वहीं कांग्रेस के हाथ एक नया हथियार मिल गया है।

कांग्रेस ने कारवां मैगजीन की एक सनसनीखेज रिपोर्ट का हवाला देकर पीएम मोदी समेत बीजेपी के कई बड़े नेताओं के खिलाफ जांच की मांग है। रिपोर्ट में बीएस येदियुरप्पा की उस कथित डायरी के पन्नों का जिक्र है, जिसमें अरुण जेटली, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी जैसे बड़े बीजेपी नेताओं और वकीलों व जजों को 1800 करोड़ रुपए घूस देना का ब्योरा होने की बात कही जा रही है। यह डायरी आयकर विभाग के पास है।

"प्रधानमंत्री को सामने आकर येदियुरप्पा की डायरी में 1800 करोड़ रुपये के भुगतान के ब्यौरे पर स्पष्टीकरण देना चाहिए। पीएम को यह बताना चाहिए कि 'यदि डायरी' में पैसे दिए जाने की जो चर्चा है वह पैसा लिया गया है या नहीं," कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा।

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सुरजेवाला ने कारवां मैगजीन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा, "डायरी के कागजात इनकम टैक्स विभाग के कब्जे में है और इस पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।"

कांग्रेस के इन आरोपो के जवाब में बीजेपी के कई दिग्गज नेता भी उतर आए हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने ट्वीट कर कहा, "कांग्रेस अब जालसाजी पर उतर आयी है। उनका चुनावी अभियान धराशायी हो चुका है। अब जालसाजी भी उन्हें बचा नहीं सकती। शाह ने आगे कहा, "कांग्रेस मंत्री के दिए हुए कुछ कागज के टुकड़े उतने ही विश्वसनीय हैं, जितना राहुल गांधी की लीडरशिप स्किल।"

कारवां मैगजीन ने दो दस्तावेज हासिल किए हैं। उसके मुताबिक इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास बीएस येदियुरप्पा के हाथ से लिखी डायरी पर एंट्रीज है, जिसमें बीजेपी के राष्ट्रीय नेता, इसके सेंट्रल कमेटी, जजों और वकीलों को 1800 करोड़ रुपये देने का जिक्र है। येदियुरप्पा ने 2009 की कर्नाटक असेंबली विधायक डायरी में कन्नड़ में यह एंट्री की है किसे कितने पैसे दिए गए। इसके अनुसार, अरुण जेटली को 150 करोड़ रुपये, नीतिन गडकरी को 150 करोड़ रुपये, राजनाथ सिंह को 100 करोड़ रुपये, एल के आडवाणी को 50 करोड़ रुपये, मुरली मनोहर जोशी को 50 करोड़ रुपये, गडकरी के बेटे की शादी के लिए 10 करोड़ रुपये, जजों के लिए 250 करोड़ रुपये और वकीलों को-50 करोड़ रुपये दिए गए। ये पैसे येदियुरप्पा के कर्नाटक के सीएम रहते दिए गए थे। यह डायरी आयकर विभाग के पास 2017 से है।

कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा ने कहा, "कांग्रेस पार्टी और उसके नेता दिमागी रूप से दिवालिया हो चुके हैं। वे मोदी जी की बढ़ती लोकप्रियता से निराश हैं। उन्होंने लड़ाई शुरू होने से पहले ही हार मान ली है। आईटी विभाग के अधिकारी पहले ही साबित कर चुके हैं कि दस्तावेज जाली और नकली हैं।" उन्होंने कहा कि यह अब एक ''बंद अध्याय'' है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस लोकसभा चुनावों में अपनी ''हार'' को देखकर ''निराश'' है और इसलिए वह यह मुद्दा उठा रहा है।

येदियुरप्पा की कथित डायरी के को लेकर शुरू हुए आरोप-प्रत्यारोप थमने का नाम नहीं ले रहे। इसी कड़ी में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कारवां मैगजीन के ट्वीट की रिट्वीट करते हुए कहा, "बीजेपी के सारे चौकीदार चोर हैं।"

कांग्रेसी नेता और पूर्व मंत्री डीके शिवकुमार के यहां छापे के दौरान कर्नाटक विधानसभा डायरी के कुछ पन्नों की फोटोकापी मिलने और उसमें कथित रिश्वत देने के आंकड़ों के संबंध में आयकर विभाग ने डीके शिवकुमार और पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा से पूछताछ भी की थी। लेकिन दोनों के बयानों और जांच के लिए पेपर्स की मूल प्रति दिए जाने की मांग के बाद जांच आगे नहीं बढ़ सकी।

एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर आयकर विभाग ने जब डीके शिवकुमार से पूछताछ की तो उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता किन तारीखों में यह राशि दी गई, और मेरे पास इन पन्नों की फोटोप्रतियों के अलावा इसकी मूल प्रतियां नहीं हैं।"

जब डीके शिवकुमार से यह पूछा गया इस बारे में उन्होंने एंटी करप्शन ब्यूरो और लोकायुक्त को जानकारी क्यूं नहीं दी? इसके जवाब में शिवकार ने कहा, " मुझे नहीं पता कि यह प्रतियां सच हैं या नहीं, इसलिए जांच एजेंसियों को इसकी जानकारी नहीं दी।"

उधर, इन जब्त कागजातों और डीके शिवकुमार के बयानों के आधार पर बीएस येदुयरप्पा से पूछताछ की गई तो उन्होंने कहा, "उनकी डायरी लिखने की आदत ही नहीं है। जो फोटोप्रतियां हैं उनमें लिखावट उनकी नहीं है।"

येदियुरप्पा ने पेपर्स पर अपनी हैंडराइटिंग और सिग्नेचर होने से इनकार कर दिया था। "येदियुरप्पा ने कहा कि जब मेरी लिखावट नहीं है, तो पेपर्स पर लिखे गए कंटेन्ट के बारे में मैं नहीं बता सकता। पेपर्स में जो भी लिखा गया है वो फर्जी है और यह सब उनका राजनीतिक करियर खराब करने की साजिश है।"

इन सभी बिन्दुओं को ध्यान में रखकर जांच शुरू की गई। जिसके बाद सेंट्रल फोरेंसिंक साइंस लैब ने 24 अप्रैल, 2018 को एक पत्र के जरिए जवाब दिया कि येदियुरप्पा की हैंडराइटिंग और सिग्नेचर की फोरेंसिंक लैब में जांच की गई, लेकिन विवादित पत्रों की मूल कापी भेजी जाए। जिसके बाद डीके शिवकुमार के द्वारा ओरिजनल कापी नहीं दी गई।

    

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