भारतीय ग्रामीण क्षेत्रों में फ्लोरोसिस के कारण करोड़ों लोगों को अक्षमता से बचाएगा जामुन 

Karan Pal SinghKaran Pal Singh   28 Oct 2017 10:44 AM GMT

भारतीय ग्रामीण क्षेत्रों में फ्लोरोसिस के कारण करोड़ों लोगों को अक्षमता से बचाएगा जामुन फ्लोरोसिस के कारण अपंग बच्चे

लखनऊ। भारत के कई जिलों में भूजल में फ्लोराइड की मात्रा (फ्लोरोसिस) अधिक पाई जाती है। भूमिगत जल में फ्लोराइड की सर्वाधिक मात्रा फ्लोराइड वाले चट्टानों की वजह से पाई जाती है। फ्लोरोसिस मनुष्य को तब होता है जब वह मानक सीमा से अधिक घुलनशील फ्लोराइड-युक्त पेयजल को लगातार पीने के लिये व्यवहार में लाता रहता है।

भारत में फ्लोरोसिस सर्वप्रथम सन् 1930 के आस-पास दक्षिण भारत के राज्य आन्ध्र प्रदेश में देखा गया था। लेकिन आज भारत के विभिन्न राज्यों में यह बिमारी अपने पाँव पसार चुकी है और दिन-प्रतिदिन इसका स्वरूप विकराल ही होता चला जा रहा है। भारत में फ्लोरोसिस से निपटने के लिए अनेकों कदम उठाएं जा रहे हैं इन्हीं में से एक आईआईटी हैदराबाद ने भूजल से फ्लोराइड की मात्रा कम करने के लिए जामुन की गुठलियों पर शोध किया है जो सफल हुआ है।

उन्नाव जनपद के हिलौली ब्लाक के महरानी खेड़ा के रहने वाले अरविंद कोरी (58 वर्ष) बताते हैं, "हमारे गाँव के आस-पास के कई गाँवों में पानी पीने लायक नहीं है। मजबूरी में हम ग्रामीण पानी पीने को मजबूर हैं। हमारे गाँव के ज्यादातर लोग बीमारी के कारण टेढे-मेढ़े हैं। दांत तो जैसे लगता है गल के बह गए हैं। मेरे खुद पैरों की हड्डी टेढ़ी है। अब तो आलय ये है कि जो बच्चे पैदा हो रहे हैं वो भी टेढ़े हो रहे हैं।"

हैदराबाद स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के शोधार्थियों का कहना है कि खाने में बेहद स्वादिष्ट लगने वाले गूदेदार जामुन की गुठलियों का इस्तेमाल कर भूजल से फ्लोराइड की मात्रा कम करके उसे इस्तेमाल के लायक बनाया जा सकता है।

आईआईटी हैदराबाद के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्रोफेसर चन्द्र शेखर शर्मा की अगुवाई में एक दल ने जामुन की गुठलियों से बनाये गए ‘एक्टिवेटेड कार्बन’ का इस्तेमाल करके पानी में फ्लोराइड के स्तर को कम करने में सफलता हासिल की है।

अनेक राज्यों के भूजल में फ्लोराइड की अधिकता एक गंभीर समस्या है और इससे स्वास्थ्य संबंधी अनेक समस्यायें पैदा होती हैं। आईआईटी दल के इन निष्कर्षों को हाल में ही ‘जनरल ऑफ इनवायरमेंटल केमिकल इंजीनियरिंग’ में प्रकाशित किया गया है। शोधार्थियों ने जामुन की गुठलियों के पाउडर को अत्यधिक छिद्रयुक्त कार्बन सामग्री में बदल दिया।

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इसके बाद इसकी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए उच्च तापमान पर संसोधित किया गया। शर्मा ने बताया कि सबसे पहले इस सामग्री का परीक्षण प्रयोगशाला में तैयार सिंथेटिक फ्लोराइड पर किया गया। इसके बाद इसका परीक्षण तेलंगाना के नालगोंडा जिले के भूजल के नमूनों पर किया गया। इस क्षेत्र के भूजल में फ्लोराइड की समस्या देश में सबसे ज्यादा है।

उन्होंने बताया कि इससे मिले परिणामों में पाया गया कि इस प्रक्रिया के बाद एक लीटर पानी में फ्लोराइड की मात्रा घटकर 1.5 मिलीग्राम से भी कम रह गई। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार यह स्वीकार्य मात्रा है। शर्मा का कहना है कि देश के 17 राज्यों में भूजल में फ्लोराइड की समस्या है। फ्लोराइड मिला हुआ पानी पीने के काम नहीं आता है।इन गांवों में पानी बना रहा अपंग

उन्नाव के पूरे के पूरे गाँव अपंगता के शिकार

यूं तो फ्लोराइड का ग्रहण उन्नाव जिले के 250 से अधिक गाँवों पर लगा है। इनमें से सिकंदरपुर सरोसी और सिकंदरपुर कर्ण ब्लाक क्षेत्र के घोंघी, रौतापुर, महदिनवा, मसवासी, रमचरामऊ, लखापुर, धनइया, पंचमखेड़ा, छड़उवाखेड़ा, कटरी अल्हुआपुर सरोसा, खन्नापुरवा, पोनी, नरी, हैबतपुर, कटहादल नारायणपुर, झंझरी, चांदपुर, गजौली आदि ऐसे गाँव हैं जिनमें फ्लोराइड युक्त पानी पीने के कारण अपंगों की संख्या दर्जनों में है। हिलौली ब्लाक के गाँवों में हिलौली, दुंदपुर, महरानी खेड़ा, रामपुर, श्यामपुर, देवमई, मोहनलाल खेड़ा, असरीखेड़ा, बछौरा सगौली भवानीगंज, पिंडुरी आदि दो दर्जन गाँवों के पानी को पीने के अयोग्य घोषित कर कर रखा गया है। हिलौली ब्लाक में विधिवत बोर्ड भी टंगा है। पानी में फ्लोराइड की मात्रा इतनी अधिक हो गई है कि उसका पानी पीकर लोग हड्डी कमजोर होने, हाथ पैर टेढ़े होने (अपंगता), दांत पीले होना आदि

भारत में फ्लोराइड प्रभावित प्रदेश

  • उत्तर प्रदेश :- वाराणसी, कन्नौज, प्रतापगढ़, फरुखाबाद, रायबरेली, उन्नाव, सोनभद्र
  • आन्ध प्रदेश :- कुडप्पा, हैदराबाद, कृष्णा, मेडक, वारंगल, अनन्तपुर, करनूल, करीमनगर, नालगोंडा, प्रकाशम, चित्तूर, गुंटूर, खम्मम, महबूब नगर, नेल्लौर, रंगारेड्डी,
  • असम :- कार्बी आंगलूंग, नौगाँव, कामरूप
  • बिहार :- डाल्टनगंज, गया, रोहतास, गोपालगंज, पश्चिम चम्पारण, मुंगेर
  • छत्तीसगढ़ :- दुर्ग, दंतेवाड़ा
  • दिल्ली :- पश्चिम जोन, उत्तर-पश्चिम जोन, पू्र्वी जोन, उत्तर पूर्वी जोन, मध्य जोन, दक्षिणी जोन, दक्षिण-पश्चिम जोन
  • गुजरात :- अहमदाबाद, बनासगांठा, भुज, जुनागढ़ मेहसाणा, सूरत, बलसाड़, अमरही, भरुच, गाँधीनगर, पंचमहल, राजकोट, सुरेन्द्र नगर, भावनगर, जामनगर, खेड़ा, साबरकांठा, बड़ौदा
  • हरियाणा :- रेवाड़ी, फरीदाबाद, करनाल, सोनीपत, जिंद, गुड़गांव, महेन्द्रगढ़, रोहतक, करुक्षेत्र, कैथल, भिवानी, सिरसा
  • जम्मू कश्मीर :- डोडा
  • झारखण्ड :- पाकुर, पलामू, साहेबगंज, गिरीडिह
  • कर्नाटक :- धारवाड़, गंडक, वेल्लारी, वेलकगाँम, रायचुर, बिजापुर, गुलबर्गा, चित्रदुर्ग, तुमकुर, चिकमंगलूर, मंडिया, बंगलुरु (ग्रामीण क्षेत्र), मैसूर, मंगलौर, सिमोगा, कोलार
  • केरल :- पालघाट, ऐलेप्पी, बावनपुरम
  • मध्य प्रदेश :- शिवपुरी, झाबुआ, मंडला, डिंडोरी, छिंदवाड़ा, धार, विदिशा, सिवनी, सिहोर, रायसेन, मंदसौर, नीमच, उज्जैन, ग्वालियर
  • महाराष्ट्र :- भण्डारा, चन्द्रपुर, बुलधाना, जलगाँव, नागपुर, अकोला, अमरावती, नांदेड़, सोलापुर, यवतमाल
  • उड़िसा :- अंगुल, धानकनाल, बौद्ध, नयागढ़, पुरी, बालासोर, भद्रक, बालंगीर, गंजम, जगत सिंह पुर, जाजपुर, कालाहांडी, केवनझार, खुर्दा, कोरापुर, मयुरभंज, पुलवानी, रायगढ़
  • पंजाब :- मांसा, फरीदकोट, भटिंडा, मुक्तसर, मोगा, संगरूर, फीरोजपुर, लुधियाना, अमृतसर, पटियाला, रोपण, जालंधर, फतेहगढ़ साहिब, कपूरथला, गुरदासपुर, होशियारपुर, नावांशहर
  • राजस्थान :- भिलवाड़ा, अजमेर, सिरोही, टोंकनगर, जालौर, जोधपुर, सवाईमाधोपुर, दौसा, जयपुर, सीकर, अलवर, चुरू, भरतपुर, झुंझनु, जैसलमेर, बाड़मेर, पाली, राजसमन्द, बांसपाड़ा, डुंगरपुर, बिकानेर, धौलपुर, करौली, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, कोटा, बुंदी, झालावाड़, गंगानगर, बाटन, हनुमानगढ़
  • तमिलनाडु :- धर्मपुरी, इरोड, सालेम, कोयम्बटुर, तिरुचिरापल्ली, मदुरै, बेल्लौर, विरुधनगर,
  • पश्चिम बंगाल :- वीरभूस, बांकुड़ा, वर्धमान, पुरुलिया

मानव शरीर में फ्लोराइड से होने वाले रोग

  1. दाँत संबंधी फ्लोरोसिस :- दंत फ्लोरोसिस बच्चों के साथ स्थाई दाँतों को प्रभावित करता है, जिसमें आठ वर्ष की आयु के बाद बच्चों के दाँतों पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाले विवर्णता (Discoloration) आ जाती है।
  2. अ-कंकालीय फ्लोरोसिस :- अ-कंकालीय फ्लोरोसिस इसका शरीर के सभी कोमल तंतुओं, अंगों एवं प्रणालियों पर अवश्य प्रभाव पड़ता है, जिसके परिणामस्वरूप स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न प्रकार की शिकायतें होती हैं।
  3. कंकालीय फ्लोरोसिस :- कंकालीय फ्लोरोसिस यह शरीर की अस्थियों एवं जोड़ों को प्रभावित करता है, जैसे - (1) गर्दन (2) पीठ (3) पृष्ठ भाग (4) कंधे एवं (5) घुटनों के जोड़।

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दुनिया के कई देश हैं प्रभावित

जिन देशों में फ्लोराइड पाए गए हैं वे हैं सीरिया से होते हुए जार्डन, लीबिया, अल्जीरिया, सूडान, केन्या, तुर्की से इराक, इरान, अफगानिस्तान, भारत, उत्तरी थाइलैंड और चीन। अमेरिका और जापान के कुछ इलाके भी इससे प्रभावित हैं।

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