सिविल इंजीनियर थे कादर खान, एक नाटक से बदल गई किस्‍मत

उन्हें सांस लेने में दिक्कत के बाद वेंटिलेटर पर रखा गया था। उन्‍होंने 31 दिसंबर की शाम 6 बजे अंतिम सांस ली।

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सिविल इंजीनियर थे कादर खान, एक नाटक से बदल गई किस्‍मत

फहाद

लखनऊ। बॉलीवुड अभिनेता कादर खान का 81 साल की उम्र में निधन हो गया है। उनका इलाज कनाडा के अस्‍पताल में चल रहा था। उन्हें सांस लेने में दिक्कत के बाद वेंटिलेटर पर रखा गया था। उन्‍होंने 31 दिसंबर की शाम 6 बजे अंतिम सांस ली। कादर खान को बॉलीवुड में कॉमीडियन, ऐक्टर और राइटर के तौर पर जाना जाता था।

कादर खान को याद करें तो उनका बोला एक डायलॉग जेहन में उतर आता है। जो कि कुछ यूं है- "ज़िंदा हैं वो लोग जो मौत से टकराते हैं, मुर्दों से बदतर हैं वो लोग जो मौत से घबराते हैं।'' इस फेमस डायलॉग को कादर खान ने 1978 मे रिलीज़ हुई फिल्म मुकद्दर का सिकंदर में लिखा और बोला था। हिन्दी फिल्मों के जिंदादिल आदाकारों की अगर हम फेहरिस्त बनाएंगे तो शायद वो फेहरिस्त कादर खान के नाम के बिना अधूरी होगी। मगर ये ज़िंदादिल इंसान आज के डिजिटल दौर मे ज़िन्दा होकर भी सोशल प्लेटफॉर्म पर कई बार मर चुका था।

22 अक्टूबर 1937 में काबुल में अब्दुल रहमान खान के घर में जन्मा बच्चा जिसका नाम कादर खान रखा गया। शायद उस वक्त अफगानिस्तान की ज़मीन को भी इस बात का अंदाज़ा नही था कि ये बच्चा आने वाले वक्त मे हरफन मौला निकलेगा। हम कादर खान साहब की खूबियों का अंदाज़ा इस बात से लगा सकते हैं कि उनकी शुरुआती तालीम मज़हबी ऐतबार से हुई जिसमें उन्होंने महारत हासिल की और कुरान को हिफ़्ज़ कर लिया। यानी कादर खान को पूरा कुरान मुँह ज़बानी याद था। मज़हबी तालीम मुकम्मल होने के बाद कादर खान साहब ने मुम्बई के म्युनिसिपल स्कूल में अपनी पढ़ाई की शुरुआत की।

कहते हैं ना पूत के पैर पालने मे ही नज़र आ जाते हैं। सीखने की ललक और कुछ भी कर गुज़रने के जज़्बे ने कादर खान साहब को सिविल इंजीनियर बना दिया था। मुंबई में भायखला इलाके के एक कॉलेज में सिविल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर भी रहे। उसी कॉलेज के एनुअल फंक्शन में कादर खान एक नाटक में किरदार निभा रहे थे। इत्तिफाक़ कहें या ऊपर वाले की कुदरत की उस दिन कॉलेज के चीफ गेस्ट दिलीप कुमार साहब थे। दिलीप कुमार कादर खान साहब की अदाकारी से इतने मुतास्सिर हुए कि उनको हिन्दी फिल्मों तक ले आये। 1972 में रिलीज़ हुई जवानी दिवानी कादर खान की पहली फिल्म थी। इसकी कहानी और डॉयलाग उन्होंने लिखे थे।

कादर खान साहब हिन्दी फिल्मों की वो नायाब हस्ती थी जिन्‍होंने एक्‍टिंग, डायलॉग रायटिंग, स्टोरी रायटिंग, स्क्रीन रायटिंग में अपना परचम बुलंद किया। लगभग 250 फिल्मों में विलेन, कॉमीडियन और हर किरदार में अपनी अदाकारी के दम पर उसमें जान फूंक दी। हालांकि नए साल के जश्न के बीच कादर साहब की मौत की खबर ने उनके फैन्स को मायूस कर दिया है।

  

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