लखनऊ: जहरीले पानी से 25 से ज्यादा भैंसों की मौत केस में कीटनाशक कंपनी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज, कई भैंसे अब भी बीमार

Diti BajpaiDiti Bajpai   31 Aug 2019 5:13 PM GMT

लखनऊ: जहरीले पानी से 25 से ज्यादा भैंसों की मौत केस में कीटनाशक कंपनी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज, कई भैंसे अब भी बीमार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के चिनहट औद्योगिक इलाके के नाले के पानी से भैंसों की मौत के मामले में पुलिस ने पेस्टीसाइड (कीटनाशक) बनाने वाली कंपनी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में रिपोर्ट दर कर ली है। प्रशासन ने शनिवार शाम तक 21 भैंसों की मौतों की पुष्टि की थी, ग्रामीणों का कहना था कि 28 भैंसों की मौत हुई है। 100 से ज्यादा भैंसों का इलाज कर बचाया गया जबकि एक दर्जन से ज्यादा अभी बीमार हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने शुक्रवार रात इलाके में 10 जगहों से पानी के नमूने लिए थे।

लखनऊ में फैजाबाद रोड और देवां रोड के बीच में चिनहट औद्योगिक क्षेत्र है, जिसमें टेल्को समेत सैकड़ों फैक्ट्रियां हैं। इन्हीं से सटा तिवारीपुर और तारा का पुरवा समेत कई गांव हैं। इन गांवों में बड़े पैमाने पर दूध का कारोबार होता है। इसी इलाके में एक नाला निकला है जिसमें औद्योगिक इकाइयों का दूषित पानी बहता है। शु्क्रवार को तारा का पुरवा में उस वक्त हड़कंप मच गया था एक के बाद एक कई भैंसों की इसी नाले में मौत होने लगी। ग्रामीणों का आरोप है कि नाले के पानी में कोई जहर आया जिससे भैंसों की मौत हुई।

तारा के पुरवा के अयोध्या प्रसाद यादव की कई भैंसों की मौत हो गई है। वो बताते हैं, "चिनहट पुलिस ने आईपीएल पेस्टीसाइड (कीटनाशक बनाने वाली कंपनी) के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है। दो भैंसों का पोस्टमार्टम हुआ है। अब उनकी रिपोर्ट आए तो आगे की कार्रवाई की सोचेंगे। हमारे गांव के कई लोग बर्बाद हो गए हैं। भैंसों का किसी ने बीमा नहीं कराया था।" आयोध्या प्रसाद के मुताबिक गांव में पड़िया-पड़वा को मिलाकर 28 जानवरों की मौत हुई है। 12 भैंसों अभी लापता है, गांव के लोग खोज रहे हैं क्योंकि आसपास जंगल-झाड़ी है किसी का शव वहां न पड़ा हो। नाला भी देख रहे हैं। चिनहट थाना पुलिस ने कंपनी के मालिक विशाल अग्रवाल पर इस संबंध में आईपीसी की धारा 477, 270, 277, 429, 352, 504, 506 के तहत मामला दर्ज किया है।

जहरीले पानी से बीमार भैंसों का इलाज कर रहे चिनहट ब्लॉक के पशुचिकित्सक डॉ आर.के. गौतम बताते हैं, "कल 3 बजे से हमारी टीम भैंसों का इलाज कर रही है अभी तक तारा का पुरवा गाँव में 54 भैंसे और दया पुरवा में 18 भैंसों का इलाज किया जा चुका है। टीम के पहुंचने के बाद कोई भैंस नहीं मरी है। गोसाईंगंज, सरोजनी नगर और चिनहट ब्लॉक की टीम इलाज कर रही है।"


गांव के हर‍िकेश बताते हैं, ''हमारे पास 14 भैंसे थीं जिसमें से 7 मर गई हैं। जितनी भैंस दूध देती थी वही मर गई। सब धंधा चौपट हो गया है।'' गांव के लोगों ने ये भी कहा कि नाले के पानी से बहुत बदबू भी आती है। यही पानी बाद में गोमती नदी मेें भी मिलता है, अगर भैंसे मर सकती हैं तो नदी के जीव भी मर गए होंगे। बहुत सारे लोग तो नदी का पानी पीते हैं। ऐसे फैक्ट्रियों को तुरंत बंद किया जाना चाहिए।


हरकेश के मुताबिक शुक्रवार को सुबह रोज की तरह भैंसों को दुहने के बाद लोगों ने छोड़ दिया था। 11 बजे के आसपास पता चला कि किसी की भैंस नाले में मर गई है। फिर कई भैंसे नाले और बाहर तड़पती मिलीं। जब तक हम लोग कुछ समझ पाते कई भैंसों की तड़प-तड़प कर ही मौत हो गई। इस गांव में ज्यादातर लोग दूध का कारोबार करते हैं, कई ग्राणीण ऐसे हैं, जिनकी सभी भैंसें मर गईं। पेस्टीसाइड बनाने वाली

ग्रामीणों के मुताबिक 15-20 साल में ये पहली बार है जब पशु मरे हैं, नाले में जरुर कुछ न कुछ गड़बड़ चीज डाली गई थी। शुक्रवार को एसडीएम भी मौके पर पहुंचे थे। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने गांव कनेक्शऩ की टीम के सामने ही कीटनाशक फैक्ट्री के पीछे से निकलने वाले नाले से पानी के नमूने लिए थे। मौके पर मौजूद बोर्ड के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, हम लोगों ने 10 अलग-अलग जगह के नमूने लिए हैं। लेकिन पानी में क्या है ये कहना बहुत मुश्किल है। रिपोर्ट 10 दिन में आएगी।" उन्होंने इतना जरुर कहा कि नाले का पानी बहुत दूषित लग रहा है। फैक्ट्रियों से निकलने वाला नाला है तो कई तरह के केमिकल भी पानी में होंगे, जिनकी जांच की जाएगी।


वहीं पुलिस प्रशासन की तरफ से जिन भैंसों की मौत हुई उनके पोस्टमार्टम के बाद उन्हें दफना दिया गया है। लखनऊ जिले के मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ तेज यादव ने बताया, "बीमार भैंसों के इलाज के लिए 10 डॉक्टरों की टीम काम कर रही है। दवाओं का भी पूरा इंतजाम किया गया है।"

गांव के ही सनीपाल बताते हैं, ''रोज चरने के लिए भैंसे जाती थीं। आज समय पर वापस नहीं आई। जब गांव में हल्‍ला मचा तब से ढूंढ रहा हूं।'' सनीपाल के पास तीन भैंसें हैं जिसमें से एक की मौत हो गई है और एक भैंस गायब है। इस गांव में लगभग हर किसान के पास भैंस हैं। गांव में ज्‍यादातर लोग दूध बेचकर अपना गुजारा करते हैं।

गांव की ही सरोज देवी रोते हुए बताती हैं, ''हमारी 7 भैंस मर गई है। बहुत ज्‍यादा नुकसान हो गया। घर के लड़के दूध का काम करते हैं।'' सरोज देवी की एक और भैंस है जिसकी हालत खराब है। गांव में ऐसे ही कई पशु हैं जो बीमार चल रहे हैं।गांव वालों का यह आरोप भी है कि उन्‍होंने पशुधन मंत्रालय द्वारा जारी टोल फ्री नंबर पर भी कॉल किया, लेकिन बहुत देर तक उसपर फोन नहीं उठाया गया। जब फोन उठा तो टीम भेजने का आश्‍वासन दे दिया गया, लेकिन बहुत देर तक टीम भी नहीं पहुंची।


गांव वालों का आरोप है कि उन्‍होंने फिर से टोल फ्री नंबर पर कॉल किया और कहा कि क्‍या सारी भैंसे मर जाएंगी तब टीम आएगी। इसके बाद गांव में 2 टीम भेजी गई हैं।

भैंसों के लिए पानी के नाम पर है ये नाला

ग्रामीणों के मुताबिक बहुत नाले के पानी से भैंसों की मौत इसलिए हुई है क्योंकि भैंसे गर्मी में पानी में रहना पसंद करती हैं। गायें नालों आदि के पानी से दूर रहती हैं, इसीलिए किसी गाय की मौत नहीं हुई है। ग्रामीओं ने मुताबिक आसपास पानी के नाम पर इंदिरा नहर है, जिसमें पानी का बहाव तेज होता है तो भैंसों को ले नहीं जाते, कोई तालाब बचा नहीं है, गोमती नदी भी काफी दूर है। इसलिए इसी नाले के आसपास जंगल झाडियों में भैंसे चरती हैं और इसी पानी में नहा लेती हैं। कई पशुपालकों ने ये भी कहा कि उन्हें नहीं लगता कि भैंसे ये पानी पीती होंगी, क्योंकि ये पानी दूर से ही इतना गंदा और बदबूदार है। लेकिन नहाती जरूर है, शायद इसी दौरान कुछ हुआ होगा।

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