आठवीं तक फेल नहीं करने की नीति खत्म, दोबारा परीक्षा का मिलेगा मौका

आठवीं तक फेल नहीं करने की नीति खत्म, दोबारा परीक्षा का मिलेगा मौकाप्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली। केंद्र सरकार छात्रों को आठवीं कक्षा तक फेल न करने की नीति को खत्म करने जा रही है। कैबिनेट ने इससे जुड़े प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है। इसके अलावा देश भर में 20 विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय खोलने वाले प्रस्ताव को भी हरी झंडी दे दी गई है।

अब राइट टू एजुकेशन विधेयक में संशोधन किया जाएगा। इस संशोधन के बाद अब राज्यों को अनुमति दी जाएगी कि 5वीं-8वीं क्लास की परीक्षा में असफल होने पर उन्हें रोक सके। हालांकि छात्रों को परीक्षा के माध्यम से दूसरा मौका दिया जाएगा।

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संसद में पारित किए जाने वाले प्रस्तावित विधेयक में, राज्यों को मार्च में 8वीं तक के छात्रों की परीक्षा कराने का अधिकार दिया गया है, इसमें फेल होने पर छात्रों को मई में परीक्षा में शामिल होने का एक आखिरी मौका दिया जाएगा। नो डिटेंशन पॉलिसी के तहत स्कूल आने वाले किसी बच्चे को फेल न करने का प्रावधान है। साथ ही प्रारंभिक शिक्षा पूरी होने तक निकाला न जाए। ज्यादा से ज्यादा बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा पूरी हो और परीक्षा के मानसिक दबाव से बच्चे मुक्त हों।

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अगर छात्र दोनों प्रयासों में फेल रहते हैं, तो उन्हें उसी कक्षा में रोक लिया जाएगा। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने पहले कहा था कि 25 राज्य पहले ही इस कदम के लिए अपनी सहमति दे चुके हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा था कि कक्षा एक से 8वीं तक छात्रों को नहीं रोकने की नीति से वे प्रभावित हुए हैं। शिक्षा राजनीतिक एजेंडा नहीं है। यह एक राष्ट्रीय एजेंडा है। सभी राजनीतिक पार्टियों के लिए शिक्षा शीर्ष प्राथमिकता होनी चाहिए।

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