भारत में एक साल में 300% बढ़े कैंसर के मामले

भारत में एक साल में 300% बढ़े कैंसर के मामले

लखनऊ। देशभर में कैंसर के मामलों में करीब 324% की वृद्धि हुई है। इन मामलों में कॉमन कैंसर, ओरल कैंसर, सर्वाइकल और ब्रेस्‍ट कैंसर जैसे मरीज शामिल हैं। यह जानकारी नेशनल हेल्थ प्रोफाइल 2019 (NHP) के डेटा से सामने आई है।

नेशनल हेल्थ प्रोफाइल 2019 के मुताबिक, 2018 में 6.5 करोड़ लोग NCD (Non-communicable diseases) क्लीनिक में स्क्रीनिंग के लिए पहुंचे थे। इनमें से 1.6 लाख लोगों को कॉमन कैंसर समेत ओरल कैंसर, सर्वाइकल और ब्रेस्‍ट कैंसर की बीमारी थी। जबकि 2017 में यह आंकड़ा 39,635 मरीजों का था। 2018 में मरीजों की स्‍क्रीनिंग 01 जनवरी 2018 से 31 दिसंबर 2018 तक हुई थी।

हेल्थ प्रोफाइल के मुताबिक, 2018 में कैंसर के सबसे ज्‍यादा मामले गुजरात से आए हैं, इनकी संख्‍या 72,169 है। इसके बाद कर्नाटक में 20,084 मरीज और महाराष्‍ट्र में 14,103 मरीज सामने आए हैं। इन प्रदेशों के अलावा तेलंगाना और पश्‍चिम बंगाल में भी कैंसर के मरीज बढ़े हैं। बात करें 2017 की तो इस साल गुजरात में 3,939 कैंसर के मरीज पाए गए थे। वहीं कर्नाटक में 3,523 कैंसर के मरीज थे।


पिछले साल आई डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में भी भारत में कैंसर के मरीजों की बढ़ने की बात कही गई थी। 2018 में कैंसर से दुनिया में 9.6 मिलियन लोगों की मौत हुई थी। इसमें से भारत की हिस्‍सेदारी 8.17% की रही। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2018 में कैंसर के 1.16 मिलियन मामले सामने आए। वहीं, 1990 और 2016 के बीच स्तन कैंसर की घटनाओं में 39.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह भारत में महिलाओं को होने वाला सबसे आम कैंसर है।

स्‍तर कैंसर पर बात करते हुए इंडियन जर्नल ऑफ सर्जरी की एसोसिएट एडिटर और किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की स्तन कैंसर सर्जन डॉ. पूजा रमाकांत ने कहती हैं, "यह चिंताजनक है कि भारत में स्तन कैंसर होने की औसत उम्र में गिरावट आ रही है और अधिकांश स्तन कैंसर अब 30-50 की उम्र में हो रहा है। जबकि विकसित देशों में 50-60 औसत उम्र में स्तन कैंसर होने का खतरा सबसे अधिक रहता है। भारत में 50-70 प्रतिशत स्तन कैंसर की जांच अत्यधिक विलम्ब से होती है जब रोग बहुत बढ़ चुका होता है और कैंसर के फैलने की सम्भावना भी बढ़ जाती है। यदि स्तन कैंसर से असामयिक मृत्यु को कम करना है तो यह अत्यंत जरूरी है कि स्तन कैंसर की जांच प्रारंभिक स्थिति में जल्दी और सही हो, और सही इलाज मिले।"

वहीं, किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के प्रमुख प्रोफेसर डॉ. सूर्य कान्त का कहना है, "विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार एक-तिहाई कैंसर का बचाव मुमकिन है, यदि तम्बाकू और शराब बंदी हो। पौष्टिक आहार, सही वजन और शारीरिक व्यायाम सही तरीके से किया जाए तो बचाव मुमकिन है।''


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