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CBSE Results: टॉपर कौन? गोलमाल करके स्कूल खेल रहे जिला टॉपर बनाने का खेल, एक ही जिले में कई-कई टॉपर कैसे?

क्या सीबीएसई बोर्ड के जारी 10वीं के रिजल्ट में स्कूल अपने हिसाब से टॉपर घोषित कर रहे हैं? बोर्ड ने बच्चों को मानसिक तनाव से बचने के लिए मेरिट लिस्ट जारी नहीं की, लेकिन स्कूल प्रबंधन अपने स्कूल के बच्चों को टॉपर दिखाने के लिए नियमों को तोड़ रहे है। बच्चों के मानसिक स्थिति पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ रहा है और यह खेल शिक्षा के बाजारीकरण को बढ़ावा देने वाला भी है।

Mithilesh DharMithilesh Dhar   23 July 2020 4:00 AM GMT

CBSE Results: टॉपर कौन? गोलमाल करके स्कूल खेल रहे जिला टॉपर बनाने का खेल, एक ही जिले में कई-कई टॉपर कैसे?

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से 250 किमी दूर भदोही की रहने वालीं साक्षी सिंह ने सीबीएसई बोर्ड की 10वीं में इस बार 483 अंक प्राप्त किये, लेकिन वह खुश नहीं हैं। खुश इसलिए नहीं हैं क्योंकि उनका कहना है कि उनसे कम नंबर पाने वाले जिले के दूसरे बच्चों को जिले का टॉपर घोषित कर दिया गया, जबकि असल में डिस्ट्रिक्ट टॉपर वह हैं।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 10वीं कक्षा के परिणाम 15 जुलाई को घोषित किये। इस वर्ष की परीक्षा में 18.73 लाख छात्र बैठे थे। परिणामों में इस वर्ष 91.46% परीक्षार्थी पास घोषित किये गये जो कि पिछले साल की तुलना में 0.36 फीसदी ज्यादा रहा।

स्कूलों ने जो जानकारी दी उसके हिसाब से 10वीं में नई दिल्ली की शिरिजा छाबड़ा और चेन्नई की पी हरिनी 500 में से 499 अंक पाकर संयुक्त रूप से ऑल इंडिया टॉपर रहीं जबकि 500 में से 498 अंकों के साथ रितेश अग्रवाल दूसरे और 497 अंकों के साथ ऋतिका अग्रवाल तीसरे नंबर पर रहीं।

इस साल कोरोना की वजह से सीबीएसई बोर्ड ने टॉपर की मेरिट लिस्ट जारी ही नहीं की क्योंकि 10वीं और 12वीं की परीक्षा पूरी नहीं हो पाई थी। बस खेल यहीं से शुरू हो गया। कई स्कूलों ने अपने तरीके से बच्चों को जिला टॉपर घोषित कर दिया जो कई बच्चों के लिए मानसिक तनाव का कारण भी बन रहा है।

अब भदोही की साक्षी सिंह के साथ जो हुआ पहले उसे भी समझ लेते हैं। साक्षी भदोही की वुडवर्ड पब्लिक स्कूल की छात्रा हैं। उन्होंने जब 15 जुलाई को एसएमएस से अपना रिजल्ट देखा तो उनके 500 में से 483 नंबर आए। उन्हें इग्लिंश में 97, हिंदी में 98, मैथ में 94, साइंस में 94 और सोशल साइंस में 100 और एडिशनल सब्जेक्ट में 94 नंबर मिले। जरूरी पांच विषयों को मिलाकर प्रतिशत निकालेंगे तो साक्षी को कुल 96.6 फीसदी अंक मिले।

साक्षी सिंह के प्रमुख पांच विषयों में कुल मिलाकर 483 (96.6%) नंबर हैं।

साक्षी कहती हैं, "साथ में पढ़ने वालीं फातिमा अंसारी ने फोन करके बताया कि स्कूल में तुम्हारा नंबर सबसे ज्यादा है और तुम टॉपर हो, लेकिन अगले दिन जब अखबरों में खबर आई तो उसके अनुसार फातिमा को स्कूल सहित जिले का टॉपर भी घोषित कर दिया गया। कुछ अखबरों में दूसरे स्कूल के अनुराग श्रीवास्तव को जिला टॉपर बताया गया।"

फातिमा के प्रमुख पांच विषयों में कुल 481 (96.2%) नंबर हैं।

फातिमा को इंग्लिश में 98, हिंदी में 98, मैथ में 97, साइंस में 93 और सोशल साइंस में 95 और एडिशनल सब्जेक्ट में 98 नंबर मिले। कंप्लसरी (जरूरी) पांच विषयों को जोड़कर फातिमा को 500 में से कुल 481 (96.2%) नंबर मिले।

इसी तरह सेंट थॉमस स्कूल ज्ञानपुर के अनुराग श्रीवास्तव को इंग्लिश में 95, हिंदी में 98, मैथ में 90, साइंस में 96, सोशल साइंस में 100 और एडिशनल सब्जेक्ट में 99 नंबर मिले। कंप्लसरी पांच विषयों को जोड़कर अनुराग को कुल नंबर 479 (95.8%) नंबर मिले।

अनुराग श्रीवास्तव को 479 (95.8%) नंबर मिले हैं।

इस हिसाब से देखेंगे तो जिले में साक्षी सिंह के नंबर सबसे ज्यादा आये, लेकिन अखबरों में फातिमा और अनुराग को टॉपर बताया गया। यह कैसे हुआ, इस बारे में पहले हमने वुडवर्ड पब्लिक स्कूल के प्रबंधक पुनीत मेहरा से बात की।

पुनीत कहते हैं, "हमने बेस्ट फाइव विषयों के नंबर जोड़कर टॉपर घोषित किया। हमने सीबीएसई बोर्ड बेस्ट फाइव नियम को अपनाया। इसके तहत अगर कंप्लसरी पांच विषयों में से किसी भी एक विषय का नंबर एडिशनल सब्जेक्ट से कम है तो उसकी जगह एडिशनल सब्जेक्ट का नंबर जुड़ जाता है। फातिमा और अनुराग के साथ भी ऐसा ही हुआ। फातिमा का साइंस में 93 नंबर था जो कि कंप्लसरी पांच विषयों में सबसे कम था जबकि एडिशनल सब्जेक्ट इनफॉर्मेशन टेक्टनोलॉजी में 98 नंबर हैं। हमने साइंस की जगह इनफॉर्मेशन टेक्टनोलॉजी के नंबर जोड़े।"

क्या बोर्ड का ऐसा कोई नियम है, इसके जवाब में पुनीत हमें क्वोरा पर एक सवाल के जवाब में मिले जवाब की कॉपी भेजते हैं। उन्होंने इसी नियम को आधार पर मानकर टॉपर घोषित किया, हालांकि सीबीएसई की वेबसाइट पर कहीं भी इसका जिक्र नहीं है।

फातिमा को जो नंबर मिले उनमें अगर 92 की जगह 98 जोड़ दिये जाएं तो कुल नंबर हो जाएंगे 486 यानी की 97.2 फीसदी। साक्षी से तीन नंबर ज्यादा। अनुराग श्रीवास्तव को भी इसी आधार पर जिला टॉपर घोषित किया गया।

अनुराग के कंप्लसरी पांच विषयों में से सबसे कम मैथ में 90 नंबर आये जबकि एडिशनल सब्जेक्ट कंप्यूटर एप्लीकेशन में 98 आये। स्कूल ने 90 नंबर की जगह 98 नंबर जोड़े जिसके बाद उनके कुल नंबर 488 (97.6%) हो गये जो कि साक्षी से 5 और फातिमा से 7 नंबर ज्यादा हैं।

साक्षी सिंह के पिता संजय सिंह ने जिलाधिकारी और स्कूल प्रबंधन से जानकारी मांगी है और कार्यवाही की मांग भी की है।

साक्षी सिंह के पिता संजय सिंह इस मामले को लेकर कार्यवाही की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। वे कहते हैं, "जब बोर्ड ने फोन पर पांच कंप्लसरी विषयों के ही नंबर जोड़कर मैसेज भेजे हैं तो स्कूल एडिशनल सब्जेक्ट के नंबर जोड़कर रिजल्ट कैसे जारी कर सकते हैं। सच तो यह है कि स्कूल प्रबंधन ने अपने चाहने वालों को आगे बढ़ाने के लिए टॉपर घोषित कर दिया। इसे आप ऐसे भी समझिये कि वुडवर्ड स्कूल ने फातिमा को जिला टॉपर घोषित करा दिया, जबकि जो नियम इन्होंने यूज किया उस हिसाब से अनुराग श्रीवास्तव टॉपर है। मेरी बेटी इसकी वजह से परेशान है।"

इस पूरे प्रकरण में अखबारों की भूमिका भी संदिग्ध रही है। प्रमुख स्थानीय अखबार अमर उजाला ने 16 जुलाई की अपनी खबर में फातिमा को जिला टॉपर जबकि इसी दिन दैनिक जागरण की खबर के अनुसार अनुराग श्रीवास्तव ने टॉप किया। दूसरे कई अखबरों में भी फातिमा को तो किसी में अनुराग को टॉपर बताया गया।

16 जुलाई को प्रकाशित अमर उजाला, भदोही की खबर के अनुसार फातिमा जिला टॉपर हैं।

अखबारों में ऐसी खबर क्यों छपी? इस बारे में हमने भदोही के प्रमुख अखबार अमर उजाला भदोही के ब्यूरो चीफ पंकज चौबे और दैनिक जागरण भदोही के ब्यूरो चीफ संग्राम सिंह से बात की। दोनों लोगों ने एक सुर में कहा कि उन्होंने तो स्कूल ने जो दिया, वह छाप दिया।

16 जुलाई को प्रकाशित दैनिक जागरण भदोही की खबर के अनुसार अनुराग श्रीवास्तव जिला टॉपर हैं।

देश के दूसरे हिस्सों के स्कूलों ने टॉपर कैसे निर्धारित किया, इस बारे में हमने और स्कूल संचालकों और अभिभावकों से बात की। बिहार की राजधानी पटना के नोट्रे डेम अकेडमी की छात्रा नव्या निमायक और आलिफा इश्तियाक ने 99 फीसदी अंकों के साथ पटना टॉप किया है। हमने नव्या के पिता गौतम दत्त से बात की।

नव्या को इंग्लिश में 99, हिंदी में 100, मैथ में 99, साइंस में 99, सोशल साइंस में 98 और एडिशनल विषय फाउंडेशन ऑफ आईटी में 100 नंबर मिले।

वह गांव कनेक्शन को फोन पर बताते हैं, "हमारे यहां टॉपर की घोषणा पांच जरूरी विषयों के नंबरों को जोड़कर किया गया है। अगर एडिशलन सब्जेक्ट का नंबर जुड़ता तो नव्या का नंबर और बढ़ जाता।"

भदोही में परसेंटेज निकालने का जो तरीका अपनाया गया उसके हिसाब से नव्या को जरूरी पांच विषयों में से साइंस में सबसे कम 98 नंबर मिले हैं। अगर इसकी जगह फाउंडेशन ऑफ आईटी के 100 नंबर जुड़ते तो कुल नंबर हो जाते 497 यानी कि 99.4 फीसदी। इतने अंकों के साथ नव्या देश के टॉप फाइव टॉपर्स में आ जातीं, लेकिन नव्या के परसेंटेज में जरूरी पांच विषयों को नंबर जोड़े गये जिस हिसाब से उन्हें कुल 495 नंबर (99 फीसदी) मिले।

नव्या निमायक का रिजल्ट

सीबीएसई के 10वीं में देश में चौथे नंबर पर रहे आर्यन भट्ट के 497, पांचवें नंबर पर रहे ऋतिका अग्रवाल के भी 497 नंबर ही हैं। छठवें नंबर पर रहे सिद्धान्त चन्द्र को 496 नंबर ही मिले हैं।

अलीगढ़ में सीबीएसई बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूल के एक टीचर ने नाम न बताने की शर्त पर बताया, "परसेंटेज निकालने का नियम पांच जरूरी विषयों को मिलाकर ही निकाला जाता है, लेकिन स्कूल संचालक अपने स्कूल को आगे दिखाने और अपने लोगों को टॉप पर दिखाने के लिए जैसे चाहते हैं वैसे ही नंबर जोड़ देते हैं। इसमें मीडिया की भूमिका भी रहती है। वे अखबारों में विज्ञापन देते हैं इसलिए अखबार स्कूलों के खिलाफ लिखते ही नहीं हैं।"

गोरखपुर के जीएन इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाले हर्षित श्रीवास्तव 98.2 फीसदी अंकों के साथ अपने यहां जिला टॉप किया है। उनका परसेंटेज कैसे जोड़ा गया है, इस बारे में वह फोन पर बताते हैं, "एडिशनल सब्जेक्ट को छोड़कर जरूरी पांच विषयों को मिलाकर मेरे इतने नंबर आये हैं। अगर छठवां सब्जेक्ट कंप्यूटर का नंबर जोड़ा जाता है तो मेरे 99 फीसदी नंबर हो जाते, लेकिन यह नियम नहीं है। नंबर तो इंग्लिश, हिंदी, मैथ, साइंस और सोशल साइंस में मिले नंबरों को जोड़ा जाता है। हमारे यहां भी ऐसा ही हुआ है।"

गोरखपुर में अमर उजाला ही खबर के अनुसार पांच विषयों के नंबर ही जोड़े गये।

गोरखपुर के अमर उजाला में जो जिला टॉपर को लेकर जो खबर छपी है, उसमें जरूरी पांच विषयों को ही जोड़ा गया है। अखबार में बाकायदा नंबर जोड़ने के तरीके का भी उल्लेख है।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में आरपीएम अकेडमी के डायरेक्टर और गोरखपुर स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय शाही फोन पर बताते हैं, "बेस्ट फाइव जैसा कोई नियम नहीं है। टॉप फाइव के आधार पर बच्चों का कितना परसेंट आया है, तय होता है। एडिशनल विषय का नंबर तभी जुड़ता है जब बच्चा जरूरी पांच विषयों में से किसी एक विषय में फेल हुआ हो। अगर जरूरी पांच विषयों में पास है तो छठवें विषय का नंबर जुड़ता ही नहीं। अगर स्कूल वाले ऐसा कर रहे हैं तो यह गलत है।"

SMS से रिजल्ट चेक करने पर CBSE बोर्ड ने जो मैसेज भेजा उसमें जरूरी पांच विषयों के नंबर जोड़े गये हैं, जबकि एडिशनल सब्जेक्ट का भी नंबर बताया गया है।

बनारस के हैप्पी मॉडल स्कूल में पढ़ने वाले छात्र विकास दुबे को 93 फीसदी नंबर मिले हैं। उनका नंबर कैसे जोड़ा गया, इस बारे में वह बताते हैं, "एक विषय में मेरा नंबर कम था, जबकि एडिशनल सब्जेक्ट कंप्यूटर में 100 नंबर था। तो जो नंबर कम था उसे हटाकर कंप्यूटर वाला नंबर जोड़ दिया गया। मेरे यहां तो ऐसे नंबर जोड़ा गया है।"

पंजाब के अबहोर जिले में सीबीएसई स्कूल से मान्यता प्राप्त स्कूल में पढ़ने वाले आयुष चुग 65 फीसदी अंकों के साथ पास हुए हैं। दो अतिरिक्त विषयों के साथ उनके कुल सात विषय थे। वह बताते हैं, "पांच विषयों को मिलाकर मुझे 65 फीसदी नंबर मिले हैं। अतिरिक्त विषयों का नंबर जुड़ता ही नहीं। जो पांच प्रमुख सब्जेक्ट होते हैं नंबर उन्हीं के जुड़ते हैं।"

उत्तराखंड के देहादून स्थित मॉडल ऐरा स्कूल के प्रबंधक संदीप रावत भी आयूष की बातों को सही बताते हैं। वह कहते हैं, "हमने 10वीं के रिजल्ट में पांच विषयों के नंबर ही जोड़े हैं, हालांकि सीबीएसई बोर्ड ने इस साल मेरिट लिस्ट जारी नहीं की लेकिन हमने पुराने नियमों को ही आधार मानकर नंबर जोड़े। एडिशनल सब्जेक्ट के तो नंबर तभी जुड़ते हैं जब कोई छात्र मुख्य विषयों में फेल होता है। यह भी सच है कि हमारे यहां भी कुछ स्कूलों ने मुख्य विषयों में नंबर कम होने पर ही अतिरिक्त विषयों के नंबर जोड़ दिये जो कि पूरी तरह से गलत है।"

न्यू एजुकेशन पॉलिसी 2019 में सीबीएसई ने बताया है कि छठवें विषय का नंबर कैसे जोड़ा जायेगा।

न्यू एजुकेशन पॉलिसी 2019 में सीबीएसई बोर्ड ने एडिशनल सब्जेक्ट के बारे में जानकारी दी है। सात अप्रैल को सीबीएसई बोर्ड से जुड़े सभी स्कूलों के लिए जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार 10वीं में अगर कोई छात्र साइंस, मैथ और सोशल साइंस जैसे विषयों में फेल होता है, तब ऐसी स्थिति स्किल विषय (अतिरिक्त छठवां विषय) का नंबर फेल हुए विषय की जगह जोड़ दिया जायेगा। इसके बाद बेस्ट फाइव सब्जेक्ट के आधार पर नंबर जोड़े जाएंगे, जबकि ऊपर खबरों में जिन मामलों का जिक्र है उनमें पांच जरूरी विषयों में बच्चे पास हैं, फिर भी अतिरिक्त विषयों का नंबर जोड़ दिया गया है।

इस पूरे मामले को लेकर गांव कनेक्शन ने सीबीएसई बोर्ड की क्षेत्रीय अधिकारी श्वेता अरोरा, प्रयागराज से भी बात की। उन्होंने बताया, "इस साल बोर्ड ने मेरिट लिस्ट जारी ही नहीं की है और हमारे यहां बेस्ट फाइव जैसा कोई नियम नहीं है। स्कूल किस आधार पर टॉपर घोषित कर रहे हैं, यह उनका मामला है।"

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