हिमा दास के गांव में मनाई जा रही है दीवाली, मची है बिहू की धूम

हिमा दास के गांव में मनाई जा रही है दीवाली, मची है बिहू की धूमफोटो: राना सैकिया

धींग (असम), कवीलिन काकोती

पिछले कुछ दिन हिमा दास के लिए उथल-पुथल भरे रहे हैं। पहले हिमा ने एशियाड में सिल्वर जीता, फिर एक रेस में अयोग्य ठहराई गईं इसके तुरंत बाद एक और सिल्वर जीता और फिर 400 मीटर की रिले रेस में गोल्ड जीतने में अहम भूमिका निभाई। इस सबके दौरान 18 साल की इस लड़की के अकल्पनीय समर्पण और मानसिक दृढ़ता की जमकर तारीफ हुई।

पूरे गांव ने एक साथ बैठकर टीवी पर हिमा की सभी रेस देखी हैं। फोटो: राना सैकिया

असम के नागांव जिले के एक छोटे से गांव कंधुलीमारी धींग में इस समय त्यौहारों जैसी चहल-पहल है। हिमा की हर रेस को पूरे गांव ने एक बड़े से टीवी स्क्रीन के सामने एक साथ देखा है, उसकी हर जीत पर जमकर बिहू डांस किया है, आतिशबाजी चलाई है। हिमा की मां जोनाली दास असम की जनता का धन्यवाद देते हुए कहती हैं, "यह असम के लोगों के आशीर्वाद की वजह से ही मुमकिन हो पाया है।" एशियाड में हिमा के प्रदर्शन पर उनके पिता रंजीत दास का कहना है, "मैं बहुत खुश हूं। अपनी चार रेस में उसने तीन जीती हैं। कुछ लोग उसकी आलोचना भी कर रहे हैं उनसे मेरी अपील है कि वह आपकी बहन है, बेटी जैसी है उसे अपना स्नेह दें। मैं गोल्ड जीतने वाली उसकी टीम की दूसरी लड़कियों और उनके परिवारों को भी अपनी शुभकामनाएं देता हूं।"

असल में 200 मीटर रेस में हिमा रेस शुरू होने से पहले ही दौड़ पड़ी थी। इसी वजह से उसे अयोग्य ठहराते हुए रेस से हटा दिया गया था। इसके बाद हिमा ने फेसबुक लाइव विडियो के जरिए लोगों से अपील की कि उसके बारे में अफवाहें न फैलाएं क्योंकि खिलाड़ी भी इंसान होते हैं और ऐसी बातों से उन्हें तकलीफ होती है। 200 मीटर रेस में हुई गड़बड़ी के लिए हिमा ने इन्हीं अफवाहों को जिम्मेदार बताते हुए कहा, "मैं बहुत दबाव में थी इसीलिए मुझसे ऐसी भूल हो गई।"

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हिमा के घर पर लगता है जैसे पूरा असम उमड़ आया हो। फोटो: राना सैकिया

हिमा के कोच निपॉन दास हिमा को लेकर उसी तरह उत्साह से भरे हैं जैसे फिनलैंड के टेम्पेरे में हुई आईएएफ वर्ल्ड अंडर-20 चैंपियनशिप के दौरान थे। टेम्पेरे में हुई 400 मीटर दौड़ में हिमा ने आखिरी कुछ सेकंडों में सभी खिलाड़ियों को पीछे छोड़ते हुए गोल्ड मेडल जीता था। इस बार निपॉन का कहना है, "हिमा को भरोसा था कि वह गोल्ड जीतेगी। हम लोग तो केवल इस बात पर आश्वस्त थे कि वह मेडल लेकर लौटेगी लेकिन उसे गोल्ड जीतने का भरोसा था और अब उसके विश्वास की जीत हुई है। हमें उस पर भरोसा है, अभी तो यह शुरूआत है। आगे चलकर उसे बहुत ऊंचाइयों को छूना है।"

हिमा के एक और कोच हैं नबोजीत। हिमा के हौसले पर नबोजीत बोले, "उसने साबित कर दिया कि अगर 'मॉन जॉय' हो तो वह सबकुछ कर सकती है।" 'मॉन जॉय' एक मशहूर असमी गीत है जिसे लोकप्रिय गायक जुबीन गर्ग ने गाया है। मॉन जॉय का शाब्दिक अर्थ है 'मेरी मर्जी'। हिमा इस गीत की और जुबीन की बहुत बड़ी फैन हैं। हिमा का हौसला बढ़ाने के लिए जुबीन खासतौर पर जकार्ता भी गए थे जहां एशियन गेम्स हो रहे हैं।

हिमा की इस जीत पर 1966 में एशियन गेम्स में 800 मीटर रेस में गोल्ड मेडल जीतने वाले और अर्जुन पुरस्कार विजेता भोगेश्वर बरुआ का कहना था, "वह ईश्वर की ओर से असम को एक तोहफा है। उसका स्वागत करें, उसकी आलोचना न करें, उसे खेलने दें। अभी वह केवल 18 बरस की है। अगर हम ईश्वर के दिए इस तोहफे की कद्र नहीं करेंगे तो ईश्वर हमसे रूठ जाएंगे। मैं सभी से अपील करता हूं कि भगवान के इस आशीर्वाद को सहेज कर रखें।"

हिमा 4 सितंबर को अपने गांव लौटने वाली है। खुशियों में डूबा पूरा गांव भी उसकी राह देख रहा है।

(कवीलिन काकोती स्वतंत्र पत्रकार हैं )

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