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किसान कर्ज माफी पर जेटली ने खड़े किए हाथ कहा- राज्यों को पैसा नहीं देगी केंद्र सरकार

नई दिल्ली। कृषि ऋण माफी के लिए केंद्र का मुंह ताक रहे राज्यों को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दो टूक जवाब दिया है। जेटली ने कहा है कि कृषि ऋण माफी का खर्च राज्यों को अपने खजाने से उठाना होगा। इसके लिए केंद्र पैसा नहीं देगा।

वित्त मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब महाराष्ट्र ने एक दिन पहले ही रविवार को किसानों का फसल ऋण माफ करने की घोषणा की है। दूसरी तरफ, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में किसान कर्ज माफी की मांग करते हुए प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने छोटे और मझोले किसानों के कृषि ऋण माफ करने की घोषणा की थी। योगी सरकार के इस निर्णय से राज्य के खजाने पर लगभग 36,359 करोड़ रुपये का बोझ पडऩे का अनुमान है। कर्ज माफी से पडऩे वाले भारी बोझ को देख कर ही राज्य केंद्र से मदद की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

जेटली से जब महाराष्ट्र सरकार के फैसले के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि केंद्र इसके लिए अपने खजाने से पैसा नहीं देगा। राज्यों को यह काम अपने आप करना होगा। इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार को कुछ नहीं कहना है।

रबी मौसम की फसल बेहतर रहने के बावजूद कई राज्यों में किसान कर्ज माफ करने के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। दरअसल घरेलू और विदेशी बाजार में कृषि वस्तुओं के दाम गिरने के कारा किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।

उल्लेखनीय है कि तत्कालीन संप्रग सरकार ने वर्ष 2008 में किसानों का कर्ज माफ करने का फैसला किया था। उस समय इसके क्रियान्वयन पर 56 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने की बात कही गई थी। हालांकि, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने जब इसके क्रियान्वयन का ऑडिट किया तो इसमें कई खामियां सामने आईं।

बैंक भी कर रहे विरोध

रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल कह चुके हैं कि राज्य सरकारें अगर कर्ज माफ करने का सिलसिला जारी रखती हैं, तो राजकोषीय स्थिति संभाल पाना मुश्किल होगा। इसके अलावा भारतीय स्टेट बैंक की अध्यक्ष अरुंधति भट्टाचार्य कह चुकी हैं कि किसानों की कर्ज माफी से पूरे बैंकिंग कारोबार पर बहुत ज्यादा दवाब बढ़ जाएगा। असल में बैंकों को इस बात का डर है कि राज्यों के इस फैसले से उनके कर्ज की वसूली की प्रक्रिया लंबी हो सकती है। इसका असर उनके मुनाफे पर भी पड़ सकता है।

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