अंतरिक्ष में भारत ने रचा इतिहास, श्रीहरिकोटा से चंद्रयान-2 लॉन्च

अंतरिक्ष में भारत ने रचा इतिहास, श्रीहरिकोटा से चंद्रयान-2 लॉन्चइसरो का चंद्रयान-2 इसी जीएसएलवी-MK3 रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा (फोटो-ISRO)

लखनऊ। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का दूसरा मून मिशन Chandrayaan-2, 22 जुलाई यानी आज दोपहर 2.43 बजे देश के सबसे ताकतवर बाहुबली रॉकेट GSLV-MK3 से लॉन्च हो गया है।तीन चरणों वाले 43.43 मीटर लंबे जीएसएलवी मार्क ।।। एम-1 ने अपराह्न दो बजकर 43 मिनट पर उड़ान भरी और आसमान में छाए बादलों को चीरते हुए प्रक्षेपण के करीब 16 मिनट बाद 3,850 किलोग्राम वजनी चंद्रयान-2 को पृथ्वी की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया। पृथ्वी की कक्षा में स्थापित होने के साथ ही इसने भारत के महत्वाकांक्षी मिशन के पहले चरण को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया।

इसरो ने कहा कि ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर के साथ गया चंद्रयान-2 चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में उतरने से पहले 15 महत्वपूर्ण अभियान चरणों से गुजरेगा। यान के सितंबर के पहले सप्ताह में चांद पर उतरने की उम्मीद है।

चांद के दक्षिणी ध्रुव तक पहुंचने के लिए चंद्रयान-2 की 48 दिन की यात्रा शुरू हो जाएगी। करीब 16 मिनट बाद चंद्रयान-2 पृथ्वी से करीब 182 किमी की ऊंचाई पर जीएसएलवी-एमके3 रॉकेट से अलग होकर पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगाएगा।आज की लॉन्चिंग में कुछ प्रमुख बदलाव किये गए हैं।

तस्‍वीर- डीडी तस्‍वीर- डीडी

इसरो ने यात्रा के समय सीमा में बदलाव कर 6 दिन कम किये हैं अब यह 56 दिन नहीं बल्कि 48 दिन में पहुँच जाएगी। चंद्रयान-2 6 सितम्बर को चाँद पर पहुँच जाएगी। श्री हरिकोटा के सतीश धवन ने कहा कि अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्चिंग के बाद मिशन को चांद तक पहुंचने में 40 दिन से ज्यादा का समय लगने वाला है। इस मिशन के सबसे तनावपूर्ण क्षण चांद पर लैंडिंग से पहले के कुछ मिनट होंगे।

इसरो के चीफ के सिवन ने कहा है "लैंडिंग के अंतिम 15 मिनट बेहद चुनौतीपूर्ण रहेंगे क्योंकि उस दौरान हम ऐसा कुछ करेंगे जिसे हमने अभी तक कभी किया नहीं है।"

इसरो का चंद्रयान-2 इसी जीएसएलवी-MK3 रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा। बता दें कि चंद्रयान-2, जिसका प्रक्षेपण 14 जुलाई 2019 को होना था जिसे तकनीकी खराबी के चलते रोक दिया गया था।

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