छत्तीसगढ़ : 2500 रुपए में धान की खरीद को लेकर केंद्र से ठनी, कांग्रेस दिल्ली तक करेगी मार्च

केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ सरकार को पत्र लिख कर धान खरीदी करने से इनकार करते हुए कहा है कि अगर राज्य सरकार धान खरीदी पर किसानों को बोनस देगी तो केंद्र सरकार चावल नहीं खरीदेगी। केन्द्र के इस निर्णय के बाद राज्य सरकार के सामने धान खरीदी को लेकर संकट पैदा हो गया है।

Tameshwar SinhaTameshwar Sinha   5 Nov 2019 11:15 AM GMT

रायपुर/बस्तर। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार की ओर से किसानों को धान बोनस देने और 2500 रुपए प्रति कुंतल न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीदने से नाराज केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को बड़ा झटका देते हुए राज्य का चावल खरीदने से इंकार कर दिया है। इस फैसले से नाराज कांग्रेस नेताओं ने केंद्र के खिलाफ दिल्ली में आंदोलन की रणनीति तैयार कर ली है।

केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ सरकार को पत्र लिख कर धान खरीदी करने से इनकार करते हुए कहा है कि अगर राज्य सरकार धान खरीदी पर किसानों को बोनस देगी तो केंद्र सरकार चावल नहीं खरीदेगी। केन्द्र के इस निर्णय के बाद राज्य सरकार के सामने धान खरीदी को लेकर संकट पैदा हो गया है।

छत्तीसगढ़ सरकार ने इस बार 87 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा है। वहीं छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू होनी थी लेकिन सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की तारीख को पहली दिसंबर 2019 कर दिया है।

वहीं केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ कांग्रेस दिल्ली में प्रदर्शन करने की तैयारी में है।

दिल्ली में आंदोलन करने की तैयारी


कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया ने पत्रकारों को बताया, "कांग्रेस नेताओं की उच्च स्तरीय बैठक में केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन करने की तैयारी की गई है। केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध 05 नवंबर से शुरू होगा, जो दिल्ली में 15 नवंबर को पैदल मार्च के जरिए प्रदर्शन के बाद खत्म होगा।

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पीएल पुनिया ने बताया, "पहले 5 नवंबर से लेकर 12 नवंबर तक प्रदेश के ब्लॉक और जिला मुख्यालयों में केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन किया जायेगा। किसानों से हस्ताक्षर लिये जाएंगे, केंद्र की नीतियों की नाकामी का पोस्टर किसानों और ग्रामीणों के बीच बांटे जाएंगे। उसके बाद ब्लॉक व जिला मुख्यालयों से किसान 12 नवंबर की शाम तक रायपुर पहुंचेंगे और फिर 13 नवंबर की सुबह 9 बजे रायपुर से सड़क मार्ग से दिल्ली के लिए कूच करेंगे।"

वहीं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, "किसान अपने-अपने संसाधनों के साथ रायपुर पहुंचेंगे और फिर 13 नवंबर की सुबह उन्हीं गाड़ियों से दिल्ली के लिए कूच करेंगे। सरकार ने तय किया है कि किसी भी सूरत में किसानों से 2500 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से ही धान की खरीदी करेंगे। उन्होंने कहा कि बारिश और धान में नमी की वजह से खरीदी की तारीफ 1 दिसंबर से करने का फैसला लिया है।"

32 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने की मांग की

पिछले साल तक केन्द्र सरकार छत्तीसगढ़ से अरवा और उसना चावल मिलाकर 24 लाख मीट्रिक टन चावल की खरीद केंद्रीय पूल के तहत कर रही थी, जिसे राज्य सरकार ने बढ़ाकर 32 लाख मीट्रिक टन करने की मांग की थी, लेकिन केन्द्र सरकार ने इस साल खरीदी का कोटा बढ़ाने की बजाय खरीद करने से ही मना कर दिया।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि धान खरीद शुरू होने में समय कम है इसलिए किसानों के हित में जल्द आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाने चाहिए।

वहीं धान खरीदी की अवधि 15 नवंबर से बढ़ा कर 01 दिसंबर किए जाने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

किसान संघ ब्लॉक भानुप्रतापपुर के सचिव वीरेंद्र कोरेटी ने 'गाँव कनेक्शन' से बताया, "धान खरीदी का समय बढ़ने से किसान परेशान हैं क्योंकि धान की फसल पक कर तैयार हो चुकी है। धान कटाई भी चालू हो गया है, मजदूरी और अन्य खर्चों के लिए रुपयों की जरूरत पड़ेगी, लेकिन सरकार ने खरीदी अवधि बढ़ा कर किसानों के साथ छल किया है।"

किसानों को होगा काफी नुकसान

वीरेंद्र ने कहा, "किसान पूरे जोर-शोर के साथ धान की कटाई में जुट गए हैं। इस समय धान बेचने का कोई साधन नहीं है। मजबूरी में किसान औने-पौने दामों में बिचौलियों के पास धान बेचेंगे, ऐसे में उनका भारी नुकसान होगा।" उन्होंने सरकार से 15 नवंबर से ही धान खरीदी शुरू करने की मांग की है।

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वहीं धान खरीदी के मामले में केंद्र सरकार से मांगी गई रियायत पर छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसुईया उइके ने भी राज्य सरकार का समर्थन किया है। राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर राज्य की मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार किए जाने का अनुरोध किया है।


क्यों हो रहा आंदोलन ?

राज्य सरकार प्रदेश में किसानों से धान खरीदने का काम मंडी और समितियों के माध्यम से करती है। फिर इसी धान की कुटाई होती है और कुटाई के बाद चावल को सरकार सेंट्रल पूल में खरीद लेती है। बाद में इसी चावल को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत बीपीएल परिवारों को बांटा जाता है।

अब यदि केंद्र सरकार धान खरीद ले तो उसे रखेगी कहां, इससे बचने के लिए केंद्र सरकार ने नियम बनाया कि यदि राज्य की सरकारें किसानों को समर्थन मूल्य से ऊपर धान का बोनस राशि देगी।

ऐसे में धान ज्यादा आएगा और किसानों का फायदा होगा, सरकार को ज्यादा पैसा देना होगा। इसलिए सरकार कह रही है कि जो प्रदेश सरकार बोनस देगी उससे केंद्र सरकार चावल नहीं खरीदेगी न ही उन्हें समर्थन मूल्य दिया जाएगा। इस तरह किसानों के धान का पूरा पैसा राज्य सरकार को अपने खजाने से देना होगा। चूंकि यह राशि बहुत बड़ी है इसलिए राज्य सरकार इसे नहीं दे सकती।

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तब प्रदेश सरकार इसी नियम में केंद्र से छूट देने की मांग कर रही है कि, बोनस राज्य अपने खजाने से देगी लेकिन समर्थन मूल्य किसान का अधिकार है उसे मिलना चाहिए। इस नियम में रमन सरकार के दौरान भी मोदी सरकार ने छूट दी थी।

लेकिन, सरकार बदली तो केंद्र सरकार भी अपने पुराने फैसले से पलट गई। इसी बात को किसानों को बताने और मोदी सरकार पर दबाव बनाने के लिए प्रदेश कांग्रेस आंदोलन कर रही है।

मुख्यमंत्री ने बुलाई सांसदों की बैठक

प्रदेश में धान ख़रीदी पर सियासत चरम पर है। राज्य सरकार और कांग्रेस नेताओं के साथ लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रही है। धान ख़रीदी की मसले पर सीएम भूपेश बघेल सभी सांसदों का समर्थन चाह रहे हैं। इसी संदर्भ में 05 नवंबर को मंत्रालय में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों की बैठक बुलाई है। सांसदों की गिनती में कांग्रेस के पास गिने-चुने ही सांसद है। जबकि भाजपा के सांसदों की संख्या ज्यादा है। इस हिसाब से जिस चर्चा के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सांसदों को बुलाया है, वह विफल ही रहेगा। ख़बर तो यह है कि बहुत से भाजपा सांसद इस बैठक में शामिल ही नहीं हो रहे।

सर्व दल और किसानों संघों के साथ भी बैठक

सांसदों की बैठक के बाद सीएम भूपेश बघेल ने सर्व दल और किसान संघों की भी बैठक बुलाई हैं। पहले सांसदों के साथ यह बैठक होगी। दूसरी बैठक सर्व दल की होगी। जिसमें सभी दल के नेता मौजूद रहेंगे। इसके तीसरी और अंतिम बैठक किसान संघों के साथ होगी।

'लोगों में भ्रम पैदा कर रही राज्य सरकार'

दूसरी ओर रायपुर से भाजपा सांसद सोनी ने इस संदर्भ में बयान जारी कर कहा, "राज्य सरकार केंद्र सरकार के प्रति लोगों में भ्रम पैदा कर रही है। मेरी नसीहत है कि प्रदेश की विकास के लिए केंद्र सरकार से संतुलन बनाने की ज़रूरत है।" उन्होंने मंत्रालय में आयोजित बैठक की जानकारी होने से भी इंकार किया है। बात साफ है भाजपा इस बैठक से आँख मूंदना चाहती है।

आंदोलन को मिल रहा जन समर्थन

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को दलों का समर्थन मिले न मिले, लेकिन जनता और किसानों का समर्थन ज़रूर मिल रहा है। आंदोलन के आगाज होते ही हज़ारों लोगों ने इस आंदोलन का समर्थन किया है, वही सीएम भूपेश बघेल के साथ दिल्ली जाने के लिए हामी भरी है। तेरह नवंबर को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल दिल्ली के लिए सड़क मार्ग से रवाना होंगे और 15 नवंबर को दिल्ली पहुँच कर पीएम आवास कूच करेंगे।

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