छत्‍तीसगढ़: धान खरीद को लेकर प्रदेश और केंद्र सरकार में हो रही खींचतान

छत्‍तीसगढ़: धान खरीद को लेकर प्रदेश और केंद्र सरकार में हो रही खींचतान

छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार और केंद्र सरकार के बीच धान खरीदी को लेकर सियासत चल रही है। छत्तीसगढ़ की सरकार ने किसानों को धान का समर्थन मूल्य 2500 रुपए देने का वादा किया था, लेकिन केंद्र सरकार इसके लिए तैयार नहीं है। ऐसे में हर रोज राजनीति गर्माती जा रही है।

इसी खींचतान के बीच छत्तीसगढ़ के मुख्‍यमंत्री भूपेश बघेल 13 नवंबर को किसानों को लेकर सड़क मार्ग से दिल्ली रवाना होने वाले थे, लेकिन ठीक तीन दिन पहले इस मार्च को रद्द कर दिया गया है। वहीं, छत्‍तीसगढ़ बीजेपी की ओर से प्रदेश सरकार के विरोध में जेल भरो आंदोलन करने की घोषणा की गई थी, जिसे फिलहाल स्‍थगित कर दिया गया है। ऐसे में राज्‍य में कांग्रेस और बीजेपी की खींचतान के बीच किसान फिलहाल फंसे हुए हैं।

2018 में विधानसभा चुनाव से पहले भूपेश बघेल की अध्यक्षता वाली कांग्रेस पार्टी ने किसानों से वादा किया था कि अगर राज्य में उनकी सरकर बनती है तो वे किसानों से 2500 रुपए प्रति कुंतल की दर से धान खरीदेंगे। वहीं, केंद्र सरकार ने यह शर्त रख दी है कि अगर समर्थन मूल्य से ऊपर के दर पर राज्य सरकार धान खरीदती है तो केंद्र राज्य से चावल नहीं खरीदेगी। फिलहाल केंद्र द्वारा धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1 हजार 815 रुपए तय किया गया है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

केंद्र सरकार द्वारा धान खरीदने में बताई गई असमर्थता के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री मोदी का पत्र लिखा था। भूपेश बघेल ने पीएम मोदी से नियमों को शिथिल करने और राज्य सरकार से चावल खरीदने की मांग की थी। इसके साथ ही राज्यपाल अनुसुईया उइके ने भी किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा है। इन पत्रों का जवाब प्रधानमंत्री कार्यालय ने राज्य सरकार को भेजते हुए यह साफ कर दिया कि अगर राज्य सरकार निर्धारित समर्थन मूल्य से ज्यादा में धान खरीदेगी तो सेंट्रल पूल का चावल केंद्र सरकार नहीं खरीदेगी।

केंद्र ने राज्य की कांग्रेस सरकार को पहले ही बता दिया था कि समर्थन मूल्य से ऊपर के दर पर अगर राज्य सरकार धान खरीदती है तो केंद्र राज्य से चावल नहीं खरीदेगी। होता ऐसा है कि राज्य सरकार की तरफ से छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) किसानों का धान मंडियों, समितियों के माध्यम से खरीदती है। मार्कफेड कुल 1333 समितियों के माध्यम से 1982 केंद्रों पर धान खरीदी करती है। इसके बाद धान की मिलिंग अर्थात कुटाई होती है जिसमें से एक भाग को सेंट्रल पूल (केंद्रीय कोटे के तहत) में फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इण्डिया (FCI) को बेचा जाता है और बचा भाग राज्य के हिस्से में आता है।

कांग्रेस पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता घनश्याम राजू तिवारी का इस मामले पर कहना है, ''प्रदेश में हो रही किसानों की आत्महत्या के मद्देनजर कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में कर्जमाफी करने और धान खरीदी दर में वृद्धि कर बोनस सहित 2500 रुपए प्रति कुंतल से धान खरीदी का वादा किया था। हमारी सरकार बनने के बाद हमने किये गए वादे को निभाते हुए धान खरीदी की भी, जिसकी वजह से कांग्रेस सरकार बनने के बाद किसान आर्थिक रूप से मजबूत हुए हैं। साथ ही एक भी किसान ने आत्महत्या नहीं की है। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने की वजह से प्रधानमंत्री मोदी यहां के किसानों से पक्षपात एकर रहे हैं। यह भाजपा की किसान विरोधी मानसिकता को दिखाता है।"

इस बीच राज्य सरकार ने 1 दिसंबर से 15 फरवरी तक धान खरीदी करने की घोषणा पहले ही कर दी है। लेकिन किसानों का धान किस दर पर खरीदा जाएगा यह संशय बना हुआ है।

इस पूरे मसले पर भारतीय जनता पार्टी छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने कहते हैं, "कांग्रेस की यह आदत रही है, अपनी नाकामी छुपाने के लिए उन्होंने पूर्व में जोगीजी के शासन में भी किसानों को दिल्ली ले जाने नौटंकी की थी। कांग्रेस हमेशा किसानों को सत्ता हासिल करने उपयोग करती आई है, छत्तीसगढ़ में भी उन्होंने वही किया है और किसानों की स्थिति की जिम्मेदार कांग्रेस है ना की केंद्र सरकार।"

(छत्तीसगढ़ से हर्ष दुबे और तेज साहू की रिपोर्ट)

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