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छत्तीसगढ़ : निर्दोष आदिवासियों की रिहाई की मांग को लेकर जुटे तीन गांवों के ग्रामीण नहीं पहुँच सके दंतेवाड़ा, बोले - अगली बार होगी आर-पार की लड़ाई

निर्दोष आदिवासियों की रिहाई की मांग को लेकर दंतेवाड़ा के लिए निकले हजारों ग्रामीणों को आखिरकार वापस लौटना पड़ा। चौबीस घंटे से ज्यादा समय से श्यामगिरी गाँव में टिके इन ग्रामीणों को पुलिस के जवानों ने खदेड़ दिया।

Tameshwar SinhaTameshwar Sinha   14 Sep 2020 2:40 PM GMT

छत्तीसगढ़ : निर्दोष आदिवासियों की रिहाई की मांग को लेकर जुटे तीन गांवों के ग्रामीण नहीं पहुँच सके दंतेवाड़ा, बोले - अगली बार होगी आर-पार की लड़ाईछत्तीसगढ़ में दंतेवाड़ा से 50 किलोमीटर पहले ही श्यामगिरी गाँव में रोक दिए गए प्रदर्शन कर रहे ग्रामीण । फोटो : गाँव कनेक्शन

दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़)। नक्सल और जंगल से जुड़े कई मामलों में आदिवासियों को फंसा कर जेलों में बंद किये जाने पर उनकी रिहाई की मांग को लेकर आदिवासी समाज के हजारों ग्रामीण एक बार फिर सड़कों पर उतरने को मजबूर हुए। ये ग्रामीण सरकार से अपने परिवार या गाँव के लोगों को रिहा करने की मांग कर रहे थे।

इस बार इस प्रदर्शन में सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा जिले के हजारों ग्रामीण शामिल हुए जो पैदल सफ़र तय करते हुए जिला मुख्यालय दंतेवाड़ा जाने की कोशिश कर रहे थे, मगर करीब 50 किलोमीटर पहले ही कुआकोंडा तहसील के श्यामगिरी गाँव में पुलिस जवानों ने इन्हें रोक लिया और आगे नहीं बढ़ने दिया।

अपनी मांगों पर अड़े इन ग्रामीणों पर पुलिस के जवानों ने लाठी-डंडे भी बरसाए, मगर ये ग्रामीण श्यामगिरी गाँव में ही टिके रहे। चौबीस घंटे से ज्यादा तनावपूर्ण स्थिति के बाद पुलिस ने उन्हें फिर खदेड़ने की कोशिश की। आखिरकार दो दिन बाद सोमवार दोपहर ये सभी ग्रामीण वापस लौटने के लिए मजबूर हुए। मगर रिहाई मंच के नेताओं ने सरकार को अगली बार आर-पार की लड़ाई की चेतावनी दी है।

प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों से मिलने के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविन्द नेताम भी पहुंचे। फोटो : गाँव कनेक्शन

तीन जिलों से एकत्र हुए ये सभी नाराज ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर दंतेवाड़ा पहुंचकर जेल का घेराव करना चाह रहे थे। इन ग्रामीणों का कहना था कि कांग्रेस सरकार ने बेगुनाह आदिवासियों को रिहा करने का वादा किया था, मगर दो साल बाद भी सरकार अपना वादा पूरा नहीं कर सकी है।

हजारों की संख्या में पहुंचे आदिवासियों के इस प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहीं और जेल रिहाई समिति मंच से जुड़ीं सोनी सोरी 'गाँव कनेक्शन' से बताती हैं, "हम सभी लोग 50 से 60 किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हुए यहाँ तक पहुंचे थे। मगर पुलिस ने हमें रोका और लोगों को लाठी-डंडे से मारा। कई ग्रामीणों को पुलिस ने बेदर्दी से पीटा। जो कुछ ग्रामीण साथ में खाना लेकर चले थे, उसे भी फ़ेंक दिया गया। यह आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों का हनन है।"

जबकि प्रशासन ने कोरोना संक्रमण के फैलने के खतरे को लेकर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी। ऐसे में पुलिस के जवानों ने श्यामगिरी में पहुंच कर प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों को पीछे खदेड़ दिया।

इन पांच मांगों के लिए प्रदर्शन कर रहे थे ग्रामीण

जेलों में तीन साल से अधिक रह रहे बंदियों को बाइज्जत बरी किया जाए।

जेल में तीन साल से अधिक फर्जी नक्सली मामले में जेल काट रहे आदिवासी बंदियों को निशर्त रिहा किया जाए।

पेशा कानून और पांचवीं अनुसूची का पालन किया जाए।

शिक्षा और स्वस्थ्य विकास की मांग को पूरा किया जाए।

आदिवासियों पर यूएपीए की कानूनी धाराएं लगाना बंद की जाएँ।

जबकि रिहाई मंच की प्रमुख सोनी सोरी ने बताया, "पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल कई ग्रामीणों को बर्बरता से मारा-पीटा है। हम खाली हाथ ही आये थे, क्योंकि हम सिर्फ सरकार से बात करना चाहते थे, मगर वो भी हमें नहीं करने दिया गया और हम लोगों को बुरी तरह खदेड़ा गया। घायल ग्रामीणों को देखकर इस बार हमें मजबूरन लौटना पड़ रहा है, मगर हमने हार नहीं मानी है लेकिन अगली बार हम सरकार से आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे।"

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