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कोरोना वायरस के डर को खत्म करने के लिए कई प्रदेशों में लग रहा चिकन मेला

Divendra SinghDivendra Singh   28 Feb 2020 7:06 AM GMT

कोरोना वायरस के डर को खत्म करने के लिए कई प्रदेशों में लग रहा चिकन मेला

कोरोना वायरस के अफवाह से नुकसान झेल रहे पोल्ट्री कारोबारियों ने नुकसान से बचने और लोगों को जागरूक करने के लिए नई तरकीब निकाली है। देश के कई राज्यों में कारोबारी चिकन मेला लगा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के महासमुंद में महासमुंद्र ब्रायलर ग्रुप से जुड़े पोल्ट्री कारोबारी अलोक कुमार पांडेय चिकन मेला का आयोजन करा रहे हैं। चिकन मेला के आयोजन की वजह बताते हुए कहते हैं, "पिछले कुछ दिनों में लोगों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है, इसी लिए हम जगह-जगह पर मेला का आयोजन करा रहे हैं, ताकि पोल्ट्री व्यवसाय से जुड़े लोगों का कुछ तो फायदा हो जाए। हमारे यहां तो कई जिलों में ये मेला लगाया गया है और आगे मार्च तक कई और जिलों में लगेगा। इसमें हम 50 रुपए के कूपन से चिकन बिरयानी, चिकन करी, अंडा करी यहां खाने और साथ ही पार्सल के लिए भी देते हैं।"

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छत्तीसगढ़ की तरह ही मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश महाराष्ट्र, तेलंगाना जैसे राज्यों में चिकन मेला लगाया जा रहा है। लोगों को जागरूक करने के लिए कारोबारी नुकसान भी उठा रहे हैं। 25-50 से पचास रुपए के कूपन में लोग खा भी रहे हैं और पार्सल भी ले जा रहे हैं। हर मेले में हजारों लोग शामिल हो रहे हैं।

देश में चिकन और अंडे की थोक कीमतों में 15-30 फीसदी की कमी आई है। मुर्गी पालन से जुड़े लोगों के अनुसार सोशल मीडिया खासतौर से व्हाट्सएप और फेसबुक जैसे प्लेटफार्मों पर कोरोना वायरस को लेकर तरह-तरह के मैसेज से लोगों को डराया जा रहा है। इसके चलते देश में अंडे और चिकन की मांग में कमी आई है। इसके चलते दाम गिरे हैं।


यूपी के आजमगढ़, गोरखपुर जैसे कई जिलों में चिकन मेला लगाया जा रहा है, गोरखपुर में पोल्ट्री फार्म चलाने वाले विशाल बताते हैं, "पिछले 17-18 दिनों में चार से साढ़े चार लाख का नुकसान हो गया है, इस समय हमारा बहुत नुकसान हो रहा है इसलिए बहुत कम दाम में मुर्गे बेचने पड़ रहे हैं। मेरा ही नहीं पूरे देश में पोल्ट्री से जुड़े लोगों का यही हाल है। कोरोना के अफवाह के बाद ये हुआ है, इसके लिए लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। इसलिए गोरखपुर में भी चिकन मेला लगा रहे हैं, जहां पर तीस रुपए में चिकन खाने को दिया जाएगा। "

देश में कई कंपनियां किसानों से ठेके पर अंडा-चिकन पालन करवाती हैं। इस काम में जगह, स्ट्रक्चर और देखरेख किसान की होती है, वहीं चूजा, फीड और दवा की लागत कंपनियां उठाती हैं। बदलते में किसान को तैयार चूजे पर प्रति किलो के हिसाब से कमीशन मिलता है। जैसे यूपी के कई इलाकों में ये 6 रुपए किलो है।


वहीं मध्य प्रदेश के जबलपुर में चिकन मेला का आयोजन करने वाले देवराज सिंह कहते हैं, "मेरे पास पचास हजार मुर्गियां ब्रायलर हैं और देसी नस्ल की मुर्गियां हैं, किसी को तो आगे आना पड़ेगा कि लोगों को जागरुक करे, जबकि मंत्रालय से कहा गया है कि चिकन से कोरोना वायरस का कुछ लेना-देना नहीं है। इसीलिए हम ऐसे आयोजन कर रहे हैं। अभी हमने जबलपुर में मेला लगाया था सैकड़ों की संख्या में लोग पहुंचे थे।"

नेशनल एग कोऑर्डिनेशन कमेटी (NEC) के अनुसार इस सप्ताह दिल्ली में अंडे की कीमत 396 रुपए प्रति कैरेट हो गई, जो कि पिछले महीने 447 रुपए थी। यही नहीं दिल्ली में ब्रॉयलर चिकन की कीमत जनवरी के तीसरे सप्ताह के मुकाबले 86 रुपए से गिरकर 78 रुपए प्रति किलो गई है। इसी तरह देश के ज्यादातर हिस्सों में चिकन के दाम कम गिरे हैं। जबकि सर्दियों में पोल्ट्री और अंडे की अधिक मांग होती है।

देश में पोल्ट्री उद्योग का कुल कारोबार 90 हजार करोड़ रुपए का है, जिसमें 65 प्रतिशत हिस्सा चिकन मीट का और 35 फीसदी हिस्सा अंडे का है। पोल्ट्री इंडस्ट्री का भारत में तेजी से विस्तार हुआ है। तेलंगाना, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश से लेकर से पंजाब-हरियाणा और उत्तर प्रदेश में करोड़ों लोग इस कारोबार से जुड़े हैं।


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