पुलिस का बच्‍चा चोरी से इनकार, फिर भी मौत बांट रही भीड़

Ranvijay SinghRanvijay Singh   9 Sep 2019 9:56 AM GMT

पुलिस का बच्‍चा चोरी से इनकार, फिर भी मौत बांट रही भीड़

''रात में दो बच्‍चा चोर आए थे, उनकी आहट पाकर खेत में पानी लगा रहे एक लड़के ने गांव वालों को कॉल कर दिया। इस बात की जानकारी पाते ही गांव वाले इकट्ठा हो गए, लेकिन तब तक बच्‍चा चोर भाग गए थे।'' यह कहते वक्‍त 22 साल के पंकज के चेहरे पर डर साफ तौर से दिख रहा था।

पंकज यूपी के बाराबंकी में सुलेमाबाद गांव के रहने वाले हैं। पंकज बताते हैं, ''इस घटना के बाद से ही गांव में लोग पहरेदारी कर रहे हैं। लोग रात-रात भर जागते हैं, बच्‍चों को घरों के बाहर अकेले नहीं भेजते।'' पंकज जिस खौफ में जी रहे हैं, यह खौफ इन दिनों देश के कई राज्‍यों में आम है। इस खौफ का जन्‍म हुआ है बच्‍चा चोरी की अफवाह से। ऐसा नहीं है कि बच्‍चा चोरी की यह अफवाह पहली बार फैली है, इससे पहले भी ऐसी अफवाह फैलती रही है और इसी कड़ी में एक बार फिर यह अफवाह फैल रही है।

फिलहाल बच्‍चा चोरी की अफवाह को लेकर उत्‍तर प्रदेश, मध्‍य प्रदेश, बिहार, हरियाणा, झारखंड और देश के कई राज्‍यों के गांव में लोग पहरेदारी कर रहे हैं। लोगों में इतना खौफ है कि बच्‍चों को अकेले घर के बाहर नहीं जाने देते। यहां तक की रात में पहरेदारी के दौरान अंजान शख्‍स के आने पर उससे पूछताछ और मारपीट की खबरें भी आ रही हैं। अकेले उत्‍तर प्रदेश में 9 अगस्‍त से लेकर अब तक करीब 160 लोगों को अफवाह फैलाने और अंजान शख्‍स के साथ मारपीट करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। वहीं, अफवाह फैलाने वालों पर एनएसए (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) के तहत कार्यवाही की बात भी की जा रही है।

इसी 27 अगस्‍त की एक घटना है। उत्तर प्रदेश के संभल जिले के छाबड़ा गांव के रहने वाले त्रिलोकी के सात साल के बेटे रवि के पेट में दर्द उठा। स्‍थानीय डॉक्‍टर से इलाज कराने के बाद भी हालत में सुधार नहीं आया। इसके बाद रवि को उसके चाचा राजू और राम अवतार बाइक पर लेकर चंदौसी के लिए निकल गए। अभी वो चंदौसी से सटे गांव असालतपुर जारई पहुंचे ही थे कि राजू पेट में तेज दर्द की वजह से रोने लगा। बच्चे को रोता देख गांव वालों ने उन्हें बच्चा चोर समझ लिया। गांव के लोगों ने उनकी बाइक दौड़ाकर रोक ली और बिना कुछ पूछे ही दोनों भाइयों को पीटने लगे। दोनों भाई गिड़गिड़ाते रहे कि उनके साथ उनका भतीजा है और वे उसे इलाज के लिए ले जा रहे हैं, लेकिन किसी न उनकी नहीं सुनी। लोग उन पर लात घूसे बरसाते रहे। जब तक पुलिस मौके पर पहुंचती दोनों अधमरे से हो गए थे। पुलिस ने दोनों भाइयों को अस्‍पताल पहुंचाया जहां राजू की मौत हो गई। बीते एक महीने में इन अफवाहों के आधार पर करीब 9 लोगों की मौत हुई है।

संभल: भीड़ ने बच्चा चोरी के शक में एक शख्स को पीट-पीटकर मार डाला।

ऐसी ही एक घटना झारखंड के जामताड़ा में 5 सितंबर को हुई। गेड़िया गांव के रहने वाला पिंटूलाल बर्मन जामताड़ा के एक होटल में काम करते हैं। उनकी पत्नी की तबीयत खराब थी। इस वजह से अपने बेटे-बेटी को धनबाद में भैया-भाभी के घर छोड़ने जा रहे थे। इस बीच पिंटूलाल के बेटे छोटू ने चिप्स खरीदने की जिद की। पिता ने इनकार कर दिया। इसके बाद छोटू रोने लगा और अपनी मां के पास जाने की जिद करते हुए पिता से हाथ छुड़ाने की कोशिश करने लगा। मौके पर मौजूद लोगों ने देखा तो बच्चा चोरी के संदेह में उसे रोक लिया। देखते ही देखते बच्चा चोरी का हल्ला हो गया। वहां भीड़ जमा हो गई और बिना कुछ सोचे-समझे ही पिंटू की पिटाई शुरू कर दी गई। फिर पुलिस आई और पिंटू को अपने साथ थाने ले गई, जहां पूछताछ में पता चला कि वो बच्‍चा चोर नहीं छोटू का पिता है।

बच्चा चोरी की अफवाहों के आधार पर हुई ऐसी ही हिंसा की खबरों को आधार बनाकर इंडिया स्‍पेंड ने एक लिस्‍ट तैयार की है। इस लिस्‍ट में 2017 से लेकर अगस्‍त 2019 तक की घटनाओं को दर्ज किया गया है। इसके मुताबिक, बच्‍चा चोरी की अफवाह को लेकर 106 घटनाएं हुई हैं, जिसमें 35 लोगों की जान गई है। लिस्‍ट के मुताबिक, 1 जनवरी, 2017 और 5 जुलाई, 2018 के बीच रिपोर्ट किए गए 69 मामलों में 33 लोग मारे गए हैं और कम से कम 99 घायल हुए हैं।

अकेले जुलाई 2018 के पहले छह दिनों में बच्चों को उठाने वाली अफवाहों को लेकर 9 मामले सामने आए थे, जिसमें पांच लोगों की मौत हुई थी। यानि जुलाई 2018 में हर दिन एक से अधिक हमलों को रिपोर्ट किया गया था। हालां‍कि इंडिया स्‍पेंड के इस आंकड़े की पुष्‍टि गांव कनेक्‍शन नहीं करता है, क्‍योंकि 2016 के बाद से ही एनसीआरबी ने अपनी रिपोर्ट जारी नहीं की है, जिससे इन आंकड़ों का मिलान किया जा सके।

पिछले साल जुलाई में जिस तरह से बच्‍चा चोरी की अफवाह में तेजी आई थी, कुछ ऐसा ही इस बार अगस्‍त और सितंबर में देखने को मिल रहा है। विभ‍िन्‍न मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीते एक महीने में 85 से ज्‍यादा ऐसी घटनाएं हुई हैं, जहां बच्‍चा चोरी के आरोप में भीड़ ने लोगों को पीटा है। ऐसे में सवाल उठता है कि पुलिस इन घटनाओं और अफवाहों को लेकर क्‍या कदम उठा रही है?

झारखंड के पुलिस महानिदेशक कमल नयन चौबे।

इसी सवाल को लेकर गांव कनेक्‍शन ने झारखंड के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कमल नयन चौबे से फोन पर बात की। डीजीपी ने बताया, ''इसमें हम दो तरह का एक्‍शन ले रहे हैं। पहला जहां घटना हो रही है वहां हमारे लोग तुरंत पहुंच रहे हैं। इससे क्‍या हो रहा है कि जहां बच्‍चा चोरी के आरोप में पीट पीटकर हत्‍या हो सकती थी उसे हमने बड़ी संख्‍या में बचाया है। दूसरा यह कि इसे लेकर हम लोग अखबार में विज्ञापन देने वाले हैं, जिससे जनजागरण भी भैले।

डीजीपी ने बताया, ''मैंने सरकार के पदाध‍िकारियों से भी कहा है कि वो अपने महकमे की तरफ से इसमें जनजागरण करें। क्‍योंकि यह मसला पुलिस का तभी तक का है जब तक कि लोग घेरकर किसी को पीट रहे हैं। लेकिन जो बच्‍चा चोर समझने और ऐसी गलती करने की मानसिकता है, वो सिर्फ पुलिस का मसला नहीं है। यह पूरे समाज का मसला है, पूरी सरकार का मसला है। तो समाज सरकार और जिनका भी इसमें सरोकार हो सकता है, उनकी इसमें हिस्‍सेदारी होनी चाहिए इसे कंट्रोल करने के लिए।''

बच्‍चा चोरी की अफवाह की वजह से हो रही हिंसा की घटनाएं उत्‍तर प्रदेश से सबसे ज्‍यादा सामने आ रही हैं। ऐसे में यूपी पुलिस भी अफवाहों के खिलाफ कैंपेन चला रही है। हाल ही में यूपी के डीजीपी ओपी सिंह ने एक वीडियो जारी कर लोगों से अपील की है कि ''ऐसी अफवाहों पर कतई ध्यान न दें। कानून अपने हाथ में न लें और न ही हिंसा के भागीदार बनें।''

डीजीपी ने एक वीडियो ट्वीट किया है, जिसमें वो बता रहें हैं कि यूपी में अफवाह फैलाने के आरोप में अबतक (28 अगस्‍त तक) 82 लोग गिरफ्तार किए गए हैं। इन पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है। किसी को इस प्रकार की घटना की जानकारी मिलती है तो वह इसकी जानकारी तुरंत 100 नंबर पर दे।

डीजीपी ने कहा कि ''असामाजिक तत्त्व राज्य के विभिन्न जिलों में बच्चा चोरी की अफवाह फैला रहे हैं। इससे हिंसा की घटनाएं हो रही हैं। ओपी सिंह ने कहा कि पुलिस ने जब इन घटनाओं की जांच की तो पता चला कि इसका बच्चा चोरी से कुछ लेना-देना नहीं है। मेरी आपसे गुजारिश है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और कानून को अपने हाथ में लेने का प्रयास भी न करें।''

यूपी पुलिस की तरह ही झारखंड पुलिस को भी बच्‍चा चोरी के आरोप में हो रही पिटाई की जांच में पता चला है कि ऐसी अफवाहों के पीछे कोई आधार नहीं है। झारखंड के डीजीपी बताते हैं, ''इन अफवाहों का आधार कुछ नहीं है। एक हवा चल पड़ी है। इसमें कोई विक्ष‍िप्‍त पुरुष है, विक्ष‍िप्‍त महिला है जो आम लोगों की तरह कपड़े नहीं पहनती तो उसको लोग बच्‍चा चोर समझ जाते हैं। जिन्‍हें खुद अपना नहीं पता उसे लोग बच्‍चा चोर समझ रहे हैं।''

डीजीपी की इस बात को बच्‍चा चोरी की खबरें भी आधार देती हैं। भीड़ का शिकार ज्‍यादातर मानसिक रूप से विक्षिप्त, नशा खोर और भीख मांगने वाले लोग हो रहे हैं, क्‍योंकि वो खुद को बचाने के लिए तर्क नहीं दे पा रहे।

ऐसा ही एक मामला 6 सितंबर को लखनऊ के इटौंजा थाना क्षेत्र के दरियापुर गांव में सामने आया। यहां ग्रामीणों ने एक युवक को बच्‍चा चोरी के आरोप में बंधक बनाकर पिटाई शुरू कर दी। यह युवक नौरंगपुर गांव निवासी मिट्ठू था जो करीब दो साल से मानसिक बीमार है। वो दरियापुर क्‍यों आया था इसका जवाब भी नहीं दे पाया और लोग उसे मारने लगे।

6 सितंबर को ही इटौंजा थाना क्षेत्र के विक्रमपुर गांव में एक एक मानसिक विक्षिप्त महिला घूम रही थी। तभी ग्रामीणों ने बच्चा चोर समझकर उसको पकड़ लिया और पिटाई शुरू कर दी। ग्राम प्रधान की सूचना पर पहुंची पुलिस ने महिला को ग्रामीणों से बचाया। इन दोनों ही घटनाओं पर इंटौजा थाने के इंस्पेक्टर नंदकिशोर ने बताया कि 'यह घटनाएं अफवाह के आधार पर घटित हुई हैं। दोनों जगह के आरोपितों को हिरासत में लिया गया है। इन सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।'

जहां तक बात अफवाह फैलाने की है तो इसमें सोशल मीडिया का प्रयोग जमकर हो रहा है। खास तौर से वॉट्सएप्‍प पर ऐसी जानकारी और वीडियो खूब साझा किए जा रहे हैं, जिसमें बच्‍चा चोर को पकड़ने की बात कही गई है। जैसे नीचे दिख रहे स्‍क्रीनशॉट में दिख रहा वीडियो पहले वॉट्सएप्‍प पर शेयर किया गया, जिसे बाद में ट्विटर पर भी शेयर किया गया है।


इस वीडियो में एक शख्‍स है जो कि घायल है, वो रो रहा है और माफी मांग रहा है। साथ ही वो बच्‍चा चोरी करने की बात भी कबूल कर रहा है। ऐसी भी खबरें सामने आई हैं कि भीड़ पहले पीटती है और बाद में पिटने वाले से बच्‍चा चोरी का जुर्म कबूल करने को कहती है। ऐसे में इस तरह के वीडियो खूब शेयर हो रहे हैं, जिससे अफवाह भी तेजी से फैल रही है।

ऐसी ही अफवाहों में कई भ्रामक संदेश भी फैलाए जा रहे हैं, जिससे भीड़ जानलेवा साबित हो रही है। जैसे कई वीडियो को शेयर करते हुए यह लिखा जा रहा है कि 'रोहिंग्याओं की एक टीम भारत में बच्चा चोरी के काम में लगी है, यह टीम बच्‍चों को चुराकर बेच देती है। बेचने के बाद बच्‍चों के अंगों को निकालकर बेचा जा रहा है।' इस तरह के संदेशों में क्‍या कोई सच्‍चाई है? इसे जानने के लिए गांव कनेक्‍शन ने यूपी डीजीपी के पीआरओ से फोन पर बात की। पीआरओ की ओर से साफ तौर से कहा गया कि, ''जांच में कुछ भी ऐसा सामने नहीं आया है कि कोई ऐसी टीम घूम रही है। यह सिर्फ अफवाह है।''

अफवाहों की वजह से लोगों की पीट पीटकर हत्‍या करने के इस चलन पर बनारस हिन्दू युनिवर्सिटी (बीएचयू) के महिला महाविद्यालय की समाजशास्‍त्र की प्रोफेसर रीता सिंह कहती हैं, ''भीड़ को ट्रेस कर पाना थोड़ा मुश्‍किल होता है। ऐसे में लोगों को यह लगने लगा है कि वो आसानी से बच जाएंगे। आज व्‍यक्‍ति एक समाज से ज्‍यादा खुद के बारे में सोचता है। उसे किसी अगले के मर जाने से कोई फर्क नहीं पड़ रहा। जैसे कहीं सड़क दुर्घटना हो जाती है तो लोग घायल को बचाने से ज्‍यादा ड्राइवर को मारने में इंट्रेस्‍ट लेते हैं। लगता है हमारी जिम्‍मेदारी सिर्फ हाथ साफ करने तक रह गई है। लोगों के अंदर अपना जो गुस्‍सा है, असंतोष है, वो भी भीड़ की शक्‍ल में उग्र हो जाता है। हम यह जानने की कोश‍िश की नहीं करते कि बात में सच्‍चाई कितनी है, बस भेड़चाल में लग जाते हैं।''

प्रो. रीता सिंह कहती हैं, ''आज जो भारत की स्‍थ‍िति है वो गांधी की राह से हटकर चलने की वजह से है। उन्‍होंने कहा था, हमें आत्‍मसंतोष होना चाहिए, हमें किसी भी कीमत पर दूसरे को कष्‍ट नहीं पहुंचाना है। हमें अपने व्‍यवहार को बदलने के लिए गांधी की राह पर चलना होगा। इसकी शुरुआत खुद से होगी। भीड़ कभी भी बेकाबू भीड़ नहीं होती, बल्‍कि वो ऐसा करना चाहती है। ऐसा नहीं है कि यह अंजाने में हो रहा है। यह पूरी तरह से सोच समझकर किया जा रहा है। भीड़ में हिंसा करने के लिए उतरे लोग इंसान रह ही नहीं जाते, वो पशु हो जाते हैं। वो पशु जिसका कोई सामाजिक मूल्‍य नहीं है, जिसमें मानवता नहीं है। फिर वो अंधा होकर पशु के समान हरकत करता है। शायद हमारे अंदर की पशुता फिर से उभर कर आ रही है।''

इन अफवाहों को लेकर ही जुलाई 2018 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि वे सोशल मीडिया पर चल रही बच्‍चा चोरी की अफवाहों की पहले ही पहचान कर लें, ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। इसके साथ ही सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने साल 2018 में वॉट्सएप्‍प को नोटिस भी जारी किया था। इसके बाद वॉट्सएप्‍प ने मैसेज फॉरवर्ड करने पर लिमिट भी लगाई थी।

संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद।

संसद के हालिया सत्र में भी भारत सरकार से यह पूछा गया था कि क्या सोशल मीडिया का इस्‍तेमाल देश में भ्रामक सूचनाओं को फैलाने में किया जा रहा है? अगर ऐसा है, तो सरकार ने इसे रोकने के लिए क्या किया?

इसके जवाब में 3 जुलाई 2019 को संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सदन में कहा था, "साइबर स्पेस एक बेहद जटिल वातावरण वाली जगह है जहां सीमाएं नहीं हैं और लोग गुमनाम रहते हुए भी संवाद कर सकते हैं। ऐसे में ये संभावना बढ़ जाती है कि गलत क्लिप का इस्तेमाल करके लोगों में पैनिक या नफरत फैलाई जाए। ये एक ग्लोबल समस्या है। हम लोगों के बोलने की आजादी का सम्मान करते हैं जो उन्हें संविधान से मिली है। सरकार इंटरनेट पर मौजूद कंटेंट को मॉनिटर नहीं करती। फिर भी कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से हम कह सकते हैं कि इंटरनेट, खासकर व्हाट्सएप्प का इस्तेमाल भ्रामक सूचनाएं फैलाने में किया जा रहा है।"


बात करें व्हाट्सएप्प की तो फिलहाल देश में इस प्‍लेटफॉर्म के 400 मिलियन यूजर हैं। अनुमान है कि भारत में व्हाट्सएप के उपयोगकर्ता वर्ष 2020 तक 450 मिलियन तक पहुंच जाएंगे। यानि इस माध्‍यम से अफवाहों को फैलाना और ज्‍यादा आसान और तेज हो सकता है।

Alt News के सह संस्‍थापक प्रतीक सिन्‍हा कहते हैं, ''व्हाट्सएप्प के जो यूजर बढ़े रहे हैं वो स्‍वाभाविक तौर पर ग्रामीण इलाकों में बढ़ रहे होंगे। क्‍योंकि शहरी क्षेत्र में पहले से व्हाट्सएप्प के यूजर मौजूद थे। ऐसे में टीयर-2, टीयर-3 शहरों और ग्रामीण इलाकों में यूजर बढ़े होंगे। इसी तरह से हर साल ग्रामीण इलाकों में स्‍मार्टफोन का चलन भी बढ़ता जा रहा है। पिछले के छह महीने में ही आप देख पा रहे होंगे कि कहीं भी कोई क्राइम होता है तो लोग तुरंत फोन के कैमरा से उसे रिकॉर्ड कर लेते हैं। यह ट्रेंड दिन पर दिन बढ़ता ही जा रहा है। खास तौर से ग्रामीण इलाकों में मोबाइल पर रिकॉर्ड करके सोशल मीडिया में शेयर करने का ट्रेंड बढ़ा है। क्‍योंकि गांव में इंटरनेट यूजर बढ़े हैं, इंटरनेट स्‍पीड सही हुई है। यानि पिछले साल जो बच्‍चा चोरी की अफवाह फैली थी उससे कहीं ज्‍यादा तेजी से इस बार ये अफवाह फैली है।'' Alt News एक फैक्ट-चेकिंग वेबसाइट है, जो मेनस्ट्रीम मीडिया और सोशल मीडिया में चल रही गलत सूचना की फैक्‍ट-चेकिंग करती है।

Alt News के सह संस्‍थापक प्रतीक सिन्‍हा।

प्रतीक सिन्‍हा इस बार चल रही बच्‍चा चोरी की अफवाह को लेकर कहते हैं, ''इस बार हम लोग जुलाई 25 से लिख रहे थे कि बच्‍चा चोरी की अफवाह फैलना शुरू हो रही है, लेकिन किसी ने ध्‍यान नहीं दिया। इस बार ज्‍यादा प्रकोप नॉर्थ इंडिया में है, पिछली बार साउथ इंडिया में था। पिछले साल जुलाई में जब बच्‍चा चोरी की अफवाह फैली थी तो प्रशासन के लोग अलग-अलग गांव में जाकर बताने लगे कि यह सच नहीं है। उसी की वजह से पिछले साल यह रुका था। तो करना वही है जो पिछली बार किया था, लेकिन सरकार की असफलता यह है कि जब यह शुरू होता है तो इसे डिटैक्‍ट नहीं किया जाता।''

प्रतीक बताते हैं, ''इन अफवाहों की शुरुआत फेक न्‍यूज से होती है। जैसे शुरू में यह मैसेज चला कि '2 हजार रोहिंग्‍या भारत में आ गए हैं, जो बच्‍चा चुराते हैं। आप लोग दरवाजा मत खोलिएगा। यह लोग आपके बच्‍चे ले जाएंगे, उनके अंग चुरा लेंगे।' इस तरह के काफी मैसेज पहले चले। इससे क्‍या होता है कि लोगों में डर बैठ जाता है कि कोई ऐसे लोग हैं। इसके बाद कहीं किसी को बच्‍चा चोरी के आरोप में पीट दिया जाता है और फिर इस तरह के वीडियो सोशल मीडिया में चलने लगते हैं। यह पूरी साइकल है।''

प्रतीक सिन्‍हा इन अफवाहों को रोकने को लेकर कहते हैं, ''इस बार यह वीडियो इसलिए भी ज्‍यादा आ रहे हैं कि ग्रामीण इलाकों में जो नए यूजर बढ़ें हैं उन्‍हें बताया नहीं गया कि इंटरनेट का इस्‍तेमाल कैसे करना है। वो जो भी वीडियो मिलता है उसे शेयर कर देते हैं। तो यही दिक्‍कत है। इसे रोकने के लिए जो एजुकेशनल और एवेयरनेस प्रोग्राम है उसे साल भर चलाना होगा, तब कहीं जाकर इसे रोका जा सकता है। यही एक उपाय है। और यह मुश्‍किल नहीं है, क्‍योंकि अगर आप पिछड़े से पिछड़े गांव में 100 परसेंट वैक्सीनेशन कर सकते हैं तो आप इसका भी मुकाबला कर सकते हैं।''

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