हालात अभी भी शर्मसार: एक चौथाई से ज्यादा बच्चियां ब्याह दी जाती हैं 18 साल से पहले 

हालात अभी भी शर्मसार: एक चौथाई से ज्यादा बच्चियां ब्याह दी जाती हैं 18 साल से पहले फोटो साभार: इंटरनेट

नई दिल्ली। “हमारा यह प्रयास है कि हर लड़की को पूरी शिक्षा मिले और उसकी 18 साल के बाद ही शादी हो। इसलिए हम बच्चे गाँव-गाँव में नुक्कड़ नाटक करते हैं और गाँव वालों को जागरुक करते हैं कि अपनी बेटी को पढ़ाओ और उनका बाल विवाह न करो, हम उन्हें बताते हैं कि शादी करने की सही उम्र क्या है और यह भी बताते हैं कि बाल विवाह करना कानून जुर्म है।“ बाल विवाह का दंश झेल रहे अपने देश में यह छोटी सी कोशिश है उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले के हरिहरपुरानी ब्लॉक के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में पढ़ने वाली 13 वर्षीय महिमा पाण्डेय की।

कोशिश है, मगर तस्वीर अभी भी शर्मसार करने वाली

महिमा, मीना मंच के उन बच्चों में शामिल हैं, जो गाँव-गाँव बाल विवाह और बाल मजदूरी जैसी कुप्रथाओं को रोकने और लोगों को जागरुक करने की पहल कर रही हैं। मीना मंच एक ऐसा प्रयास है, जो बच्चों की शिक्षा को ध्यान में रखकर यूनीसेफ की ओर से देश के गाँव-गाँव मुस्कान परियोजना के तहत चलाया जा रहा है। मगर इससे इतर, दूसरी ओर खौफनाक तस्वीर यह है कि अमेरिका और चीन जैसे विकसित देशों से बराबरी का सपना देख रहे भारत में आज भी एक चौथाई से ज्यादा बच्चियां 18 साल से पहले ही ब्याह दी जा रही हैं।

18 साल से पहले ब्याह दी गईं 30 प्रतिशत से ज्यादा महिलाएं

सरकार ने शुक्रवार को राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार राज्यसभा में कहा कि देश में बाल विवाह में कमी आई है। मगर अभी भी हालात गंभीर हैं। अगर 2011 के जनगणना के आंकड़ों पर गौर करें तो 34 करोड़ शादीशुदा महिलाएं थीं। इनमें तलाकशुदा, विधवा और अलग रहने वाली महिलाएं भी शामिल हैं। इनमें 30.2 प्रतिशत महिलाओं की शादी 18 साल से पहले कर दी गई। इतना ही नहीं, अपने देश में बाल विवाह के नाम पर हालात और भी खराब रहे हैं। इन 34 करोड़ शादीशुदा महिलाओं में 2.3 प्रतिशत ऐसी महिलाएं हैं, जिनकी शादी 10 साल की उम्र से भी पहले कर दी गई है। देश में राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, पश्चिम बंगाल और झारखंड राज्यों में सबसे ज्यादा बाल विवाह होते हैं।

बाल विवाह पर सभी धर्म एक से हैं

न्यूज रिपोर्टस और डब्ल्यूसीडी स्टडी की रिपोर्ट के अनुसार, देश में बाल विवाह की स्थितियों पर गौर करें तो हम पाएंगे कि सभी धर्म बाल विवाह का दंश झेल रहे हैं। यानि हिंदू या मुस्लिम हो, कम उम्र में लड़कियों की शादी करने में सभी धर्म एक से हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, हिंदू धर्म में 31 प्रतिशत महिलाएं ऐसी रही हैं, जिनकी शादी 18 साल से पहले कर दी गई थी। इसी तरह यह आंकड़ा मुस्लिम धर्म में भी 31 प्रतिशत रहा है। इसके अलावा ईसाई धर्म में 12 प्रतिशत, सिख धर्म में 11 प्रतिशत, बौद्ध धर्म में 28 प्रतिशत और जैन धर्म में 16 प्रतिशत महिलाओं की शादी 18 साल से पहले कर दी गई, यानि हर धर्म में इतने प्रतिशत महिलाओं का बाल विवाह कर दिया गया।

10 साल की उम्र से पहले भी हो रहे बाल विवाह

हालात ऐसे हैं कि देश में आज भी 10 साल की उम्र में लड़कियों की शादी की जा रही है। आंकड़ों पर गौर करें तो 10 साल की उम्र में ही लड़कियों की शादी करने में सिर्फ बौद्ध धर्म में ही यह 3 प्रतिशत है। इसके अलावा हिंदू, मुस्लिम और जैन धर्म में यह आंकड़ा 2 प्रतिशत तक है और ईसाई धर्म में 10 साल की उम्र से पहले 1 प्रतिशत लड़कियों का बाल विवाह कर दिया गया।

हालात सुधर रहे हैं

अगर हम 2001 जनगणना और जनगणना 2011 पर गौर करें तो हालात सुधरते नजर आ रहे हैं, मगर ये आंकड़े कम हैं। जनगणना 2001 के अनुसार, हिंदू धर्म में बाल विवाह 34 फीसदी हुए, और बाल विवाह का यह आंकड़ा जनगणना 2011 में 31 फीसदी तक पहुंचा। दूसरी ओर मुस्लिम धर्म में अच्छा अंतर देखने को मिला है। जनगणना 2001 में मुस्लिम धर्म में 41 फीसदी बाल विवाह हुए, जबकि 2011 तक में यह आंकड़ा दस फीसदी नीचे गिरा, और बाल विवाह 31 फीसदी तक पहुंचा। ईसाई धर्म में जनगणना 2001 में 15 फीसदी बाल विवाह हुए, जो 2011 में 12 फीसदी तक पहुंचा। इसी तरह सिख धर्म में 2001 में 16 फीसदी और 2011 में 11 फीसदी आंकड़ा रहा। वहीं बौद्ध और जैन धर्म में जनगणना 2001 में बाल विवाह का आंकड़ा क्रमश: 28 और 23 फीसदी रहा, जबकि जनगणना 2011 में यह आंकड़ा क्रमश: 38 फीसदी और 16 फीसदी रहा।

एक नजर में देखें, विभिन्न धर्मों में बाल विवाह के हालात

धर्म जनगणना 2001 जनगणना 2011

  • हिंदू 34 प्रतिशत 31 प्रतिशत
  • मुस्लिम 41 प्रतिशत 31 प्रतिशत
  • ईसाई 15 प्रतिशत 12 प्रतिशत
  • सिख 16 प्रतिशत 11 प्रतिशत
  • बौद्ध 28 प्रतिशत 38 प्रतिशत
  • जैन 23 प्रतिशत 16 प्रतिशत

शिक्षा जरूरी है, बदली है तस्वीर

डब्ल्यूसीडी स्टडी और एजुकेशन ऑफ मुस्लिम वीमन की रिपोर्ट के अनुसार, देश में लड़कियों की जल्द शादी होने के पीछे का सबसे कारण अशिक्षा का होना सामने आया है। कुल अशिक्षित लड़कियों में से 38 प्रतिशत का बाल विवाह 18 साल से पहले कर दी जाती है और शिक्षित लड़कियों में से 23 प्रतिशत की शादी 18 साल से पहले होती है। दूसरी ओर यह तस्वीर सामने आई है कि देश में जैसे-जैसे लड़कियां शिक्षित हुई हैं, बाल विवाह की परंपरा में कमी दर्ज की गई है। शिक्षा के स्तर के लिहाज से जल्दी होने वाली विवाह की हिस्सेदारी पर गौर करें तो 35 प्रतिशत प्राथमिक शिक्षा से भी कम रही है, 31 प्रतिशत माध्यमिक शिक्षा से कम, 15 प्रतिशत मैट्रिक या सेकेंडरी लेकिन ग्रेजुएशन से कम और 5.2 प्रतिशत ग्रेजुएशन से ज्यादा रही है।

सरकार ने कहा, बाल विवाहों में आई है कमी

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की हालिया एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में बाल विवाह में कमी आई है। इस बारे में 22 दिसंबर यानि शुक्रवार को ही राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी महिला एवं बाल कल्याण राज्य मंत्री वीरेंद्र कुमार ने दी। सर्वेक्षण के अनुसार, 20 से 24 वर्ष की ऐसी महिलाएं जिनका बाल विवाह हो चुका था, यह प्रतिशत वर्ष 2005-06 में 47.40 प्रतिशत था, जो वर्ष 2014-15 में काफी घटा और घटकर 26.8 प्रतिशत रह गया।

कम आयु में विवाह को समाप्त करने के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय लगातार कदम उठा रहा है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की ओर से 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, 0-9 वर्ष के आयुवर्ग में कोई विवाह नहीं हुए।
वीरेंद्र कुमार, महिला एवं बाल कल्याण राज्य मंत्री

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