मौत की सजा देने में चीन सबसे आगे, भारत में सजा के मामले 81 फीसदी बढ़े

मौत की सजा देने में चीन सबसे आगे, भारत में  सजा के मामले 81 फीसदी बढ़ेसाल 2016 में 23 देशों में करीब 1,032 लोगों की मौत की सजा मिल चुकी है।

लखनऊ। भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव को पाकिस्तानी सैन्य अदालत द्वारा कथित रूप से जासूसी के आरोप में फांसी की सजा सुनाए से देश में इस समय आक्रोश है। केंद्र सरकार इस समय जाधव को बचाने के लिए जी-तोड़ कोशिशें कर रही है।

जाधव मामले में भारत का कहना है कि बिना किसी सबूत और सुनवाई के इस तरह फांसी की सजा कैसे दी जा सकती है। बात वैश्विक रूप से करें तो पिछले साल मौत की सजा मिलने में काफी गिरावट आई है। पाकिस्तान में ही 53 फीसदी तक मृत्युदंड में कमी दर्ज की गई। वहीं सबसे ज्यादा मृत्युदंड देने के मामले में चीन आगे है।

साल 2016 में 23 देशों में करीब 1,032 लोगों की मौत की सजा मिल चुकी है। वहीं एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार साल 2015 में 1,634 लोगों को 25 देशों में मौत की सजा मिली थी।

सबसे ज्यादा मौत की सजा क्रमश: चीन, ईरान, सउदी अरब, ईराक और पाकिस्तान में हुई। चीन सबसे ज्यादा मौत की सजा देने वाले देशों में सबसे पहले नंबर पर है लेकिन इसका सही आंकड़ा सर्वविदित नहीं है क्योंकि इसे चीन में सुरक्षा कारणों से छिपाया जाता है। फिर भी ऐसा माना जा रहा है कि 1,032 मौत की सजा में से लगभग हज़ार के करीब चीन में ही हुए हैं। यानी 87 फीसदी मौत की सजा के मामलों के साथ चीन बाकी चार देशों से पहले स्थान पर है। इसके बाद ईरान, सउदी अरब, ईराक और पाकिस्तान हैं।

2016 में दो देश बेनिन और नाउरू ने भी सभी अपराधों से मृत्यु दंड हटा दिया था। वहीं 1997 में सिर्फ 64 देशों से ही मृत्यु दंड हटाया गया था। 2016 में 28 देशों में मृत्यु दंड में क्षमा दी गई थी। नौ देशों के करीब 60 लोगों की मृत्यु दंड की सजा माफी में बदल गई- इसमें से बांग्लादेश में चार, चीन में पांच, घाना में एक, कुवैत में पांच, मॉरिटानिया में एक, नाइजीरिया में 32, सुडान में नौ, ताइवान में एक, वियतनाम में दो। 2016 के आखिर तक करीब 18,848 लोगों को मौत की सजा सुनाई जा चुकी है।

भारत में मौत की सजा के मामलों में 81 फीसदी की बढ़ोतरी

भारत में 2015 के मुकाबले 2016 में मौत की सजा के मामलों में 81 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने साल 2016 में 136 लोगों को मौत की सजा सुनाई जबकि 2015 में यह आंकड़ा 75 मौत की सजा का था। जिस अपराध के लिए मौत की सजा सुनाई गई उसमें मुख्यरूप से हत्या के मामले थे। इसमें कहा गया कि नए एंटी हाईजैकिंग लॉ जिसमें सिर्फ हाईजैकिंग पर भी मौत की सजा का प्रावधान है। हालांकि यह सिर्फ उनके लिए है जिनकी वजह से किसी बंधक, सुरक्षा कर्मी या ऐसे शख्स की मौत हो जाए। इसके चलते 2016 में ये आंकड़े लगभग दो गुने हो गए।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2016 में एक भी शख्स की सजा पर अमल नहीं हुआ लेकिन अभी ऐसे 400 कैदी जेलों में बंद हैं जिनकी मौत की सजा पर इस साल के अंत तक अमल होना है। इसकी तुलना में पाकिस्तान में इसकी संख्या में महत्वपूर्ण गिरावट आई है। पाकिस्तान में साल 2015 में 320 लोगों को मृत्युदंड दिया गया जबकि साल 2016 में सिर्फ 87 लोगों को ही मृत्युदंड दिया गया। एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट में कहा गया कि भारत उन कुछ देशों में शामिल है जो मादक द्रव्य से जुड़े मामलों में भी मौत की सजा देते हैं।

दो तिहाई देशों ने कानून से हटाया मृत्युदंड

2006 से अब तक पहली बार यूएसए पांच सबसे ज्यादा मृत्यु दंड वाले देशों में शामिल नहीं है। इस सूची में यूएसए मिस्र के बाद सातवें नंबर पर है। 1991 के बाद से इस बार यूएसए में सबसे कम 20 मृत्यु दंड के मामले सामने आए हैं। 2016 के दौरान 23 देशों में यानी प्रत्येक आठ में से एक मृत्युदंड की सजा हुई। यह आंकड़ा पिछले बीस वर्षों से लगातार गिरता जा रहा है। 1997 में चालीस देशों में फांसी की सजा हुई थी। बेलारस, बोस्टवाना, नाइजीरिया और पलेस्टीन में 2016 में मृत्युदंड की सजा फिर से शुरू हुई। भारत, जॉर्डन, ओमान और सयुंक्त अरब अमीरात में 2015 में तो फांसी की सजा पर अमल हुआ था लेकिन 2016 में एक भी मामला नहीं ऐसा नहीं आया। 141 देशों में से दो तिहाई देशों में कानून और प्रैक्टिस से मृत्यु दंड हटा दिया गया है।


2016 में दो देश बेनिन और नाउरू ने भी सभी अपराधों से मृत्यु दंड हटा दिया था। वहीं 1997 में सिर्फ 64 देशों से ही मृत्यु दंड हटाया गया था। 2016 में 28 देशों में मृत्यु दंड में क्षमा दी गई थी। नौ देशों के करीब 60 लोगों की मृत्यु दंड की सजा माफी में बदल गई- इसमें से बांग्लादेश में चार, चीन में पांच, घाना में एक, कुवैत में पांच, मारिजुआना में एक, नाइजीरिया में 32, सुडान में नौ, ताइवान में एक, वियतनाम में दो। 2016 के आखिर तक करीब 18,848 लोगों को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है।

क्या है महाद्वीपों की स्थिति

अमेरिका महाद्वीप

लगातार आठवें साल में संयुक्त राज्य अमेरिका, महाद्वीप के बाकी देशों में मृत्यु दंड देने वाला देश रहा। 2016 में यहां 20 लोगों को मृत्युदंड मिला। यह आंकड़ा 2015 से आठ कम रहा। यह आंकड़ा साल 1991 के बाद से सबसे कम रहा। मृत्युदंड का यह आंकड़ा 2007 से आधा और 1997 से एक तिहाई रहा।

एशिया पैसिफिक

2016 में इसके 11 देशों में 130 मृत्युदंड के मामले आए। यह आंकड़ा 2015 में 12 देशों 367 मृत्युदंड के मामलों से कम है। यह पाकिस्तान के कारण है जहां मृत्युदंड के मामलों में 53 फीसदी की कमी आई है। इन आंकड़ों में चीन शामिल नहीं है जहां मृत्युदंड के मामले हज़ारों में हैं।

यूरोप और सेंट्रल एशिया

यूरोप और सेंट्रल एशिया में बेलारस ने 17 महीने के बाद मृत्युदंड की सजा को फिर से बहाल किया है। इस क्षेत्र में बेलारस और कज़ागिस्तान ही केवल मृत्युदंड का इस्तेमाल करते हैं।

मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका

मृत्युदंड के मामलों में इस क्षेत्र में 28 फीसदी कमी आई है। साल 2015 में यह आंकड़ा 1196 था और 2016 में 856 ही रह गया।

First Published: 2017-04-11 19:00:42.0

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