भारतीय मांस करोबारियों के लिए बड़ा मौका, पढ़िए कैसे?

भारतीय मांस करोबारियों के लिए बड़ा मौका, पढ़िए कैसे?

लखनऊ। चीन में अफ्रीकन स्वाइन फीवर फैलने की वजह से बीते दो वर्षों में लगभग 1.4 अरब सूअरों की जान गई है। इससे चीन के सुअर उद्योग में काफी गिरावट आई है। भारतीय मांस करोबारियों को इस गिरावट से परोक्ष रूप से फायदा मिल सकता है।

अफ्रीकी स्वाइन बुखार का वायरस खतरनाक होता है जो कि सुअर के मांस और सुअरों के खाने में महीनों तक जीवित रह सकता है। यह मनुष्यों के लिए हानिकारक नहीं है। इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है और न ही इसकी कोई वैक्सीन अभी बना है। सुअरों में फैलने वाली यह बीमारी अफ्रीका से लेकर यूरोप और रूस तक फैल गई है लेकिन अभी तक भारत में अफ्रीकी स्वाइन फ्लू का कोई भी मामला सामने नहीं आया है।

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चीन सुअर मांस के उत्पादों का सबसे बड़ा उत्पादक है। इसलिए जहां इतनी बड़ी तादाद में सुअरों की संख्या में गिरावट आई वहीं सुअर के मांस की मांग भी चीन में लगातार बनी हुई है। इस मांग को पूरा करने में भारतीय करोबारियों के लिए यह सुनहरा मौका है क्योंकि भारत में सुअरों की पांचवीं सबसे बड़ी आबादी है।

सुअर पालन से कम कीमत और कम समय में अधिक मुनाफा प्राप्त किया जा सकता है। एक मादा सुअर एक बार में लगभग 8 से 12 बच्चों को जन्म देती है। इतना ही नहीं, एक मादा सुअर से वर्ष में दो बार बच्चे लिए जा सकते हैं। अगर इनको सही तरह से खिलाया जाए और सही तरीके से देखभाल की जाए तो इनसे काफी लाभ कमाया जा सकता है।

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चीन में इस साल फरवरी और अप्रैल के बीच जीवित सुअरों की कीमतें प्रति किलोग्राम 121 रुपए से बढ़कर 158 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई हैं। माना जा रहा है कि इस साल इसकी कीमत 214 रुपए प्रति किलो तक पहुंच सकती है। चीनी सरकार सुअरों की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंतित है। चीनी चंद्र कैलेंडर के अनुसार यह पिग ईयर (सुअर का वर्ष) है।


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