चाइनीज मांझा से न जाए बेज़ुबान पक्षियों और इंसानों की जान, इसलिए लगा दी धारा 144

चाइनीज मांझा से न जाए बेज़ुबान पक्षियों और इंसानों की जान, इसलिए लगा दी धारा 144

लखनऊ। हर साल हज़ारों की संख्या में बेज़ुबानों और इंसानों की जान ले रहा चाइनीज मांझे पर रोक लगाने के लिए राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के डीएम ने अनूठी पहल की है। उन्होंने 15 जनवरी तक पूरे जिले में धारा 144 लागू कर दी है।

जिलाधिकारी आशीष गुप्ता ने गाँव कनेक्शन को फोन पर बताया, लोग चाइनीज़ मांझे का इस्तेमाल कम करे इसके लिए धारा 144 लागू की जाएगी। इससे लोगों में जागरूकता बढ़ेगी लोग कम प्रयोग करेंगे।'' डीएम के आदेश में स्पष्ट किया गया हैं कि बांसवाड़ा में धातु निर्मित मांझा, पक्का धागा, नायलोन-प्लास्टिक मांझा, सिंथेटिक-टॉक्सिक मटीरियल से बना मांझा, चाइनीज मांझा, आयरन और ग्लास पाउडर से बना मांझा पक्षियों के लिए खतरनाक होने के साथ विद्युत का सुचालक भी होता है।

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विद्युत तारों के सम्पर्क में आने पर इनमें करंट प्रवाहित होने का खतरा रहता है जो मानव जीवन के लिए भी खतरनाक है। आदेश में राजस्थान उच्च न्यायालय जयपुर के डीबी सिविल रिट पिटीशन पीआईएल नंबर 15793/2011 महेश अग्रवाल बनाम राज्य में 22 अगस्त 2012 को जारी दिशा-निर्देश का भी हवाला दिया गया है जिनमें ऐसे मांझे के उपयोग को परमिट नहीं किया गया है।


पिछले कई वर्षों से चाइनीज मांझा को रोकने के लिए काम कर रहे आई केयर इंडिया संस्था के लीड कोओर्डिनेटर आशीष मौर्या बताते हैं, ''लखनऊ के नक्खास में अभी भी चोरी छिपे इस मांझा को बनाया जाता है। लोगों में जागरूकता बढ़ी लेकिन बनाने वाले अभी भी इसको बनाकर बेच रहे हैं। मंकर संक्रति के अलावा जमघट में सबसे ज्यादा पक्षियों की मौत होती है साथ ही लोग के साथ भी हादसे होते हैं।''

अपनी बात को जारी रखते हुए मौर्या आगे बताते हैं, "पंतग के मौसम में प्रतिदिन करीब 20 पक्षियों की मौत होती है। चाइनीज़ मांझे का इस्तेमाल न करे इसके लिए शहरों और गाँव के स्कूलों में बच्चों को जागरूक भी करते हैं।''

हज़ारों की संख्या में चाइनीज़ मांझा पक्षियों को घायल करता है साथ लोगों की भी जान लेता है। राजस्थान की राजधानी जयपुर में 11 जनवरी को नौ साल की अफरीन चाइनीज़ मांझा का शिकार हो गई।

वर्ष 2017 में हाईकोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने पूरे देश में चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बावजूद भी बाजारों में खुलेआम पतंग की दुकानों में चाइनीज मांझा की बिक्री हो रही है। 'पर्यावरण संरक्षण अधिनियम-1986' के प्रावधानों के मुताबिक, चाइनीज मांझा का प्रयोग दंडनीय अपराध है। इसकी बिक्री करने या दुकान पर रखने पर पांच साल की सजा का प्रावधान भी है।

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एनजीटी ने इस मांझे पर प्रतिबंध लगाते हुए कहा था कि सभी राज्य व संघ शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव तत्काल प्रभाव से खतरनाक नाइलॉन व सिंथेटिक मांझे के निर्माण, बिक्री, भंडारण, खरीद और इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाएं। पीठ ने कहा कि संबंधित राज्य सरकार, मुख्य सचिव, जिलाधिकारी इस फैसले को लागू कराने के लिए जिम्मेदार होंगे। अगर कोई फैसले का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

बिना परमिट नहीं उड़ा सकते पतंग

देश की बड़ी संख्या में लोगों को पता नहीं है लेकिन भारतीय एयरक्राफ्ट एक्ट 1934 के अनुसार, परमिट और लाइसेंस के बिना पतंग नहीं उड़ाई जा सकती। लोग भले ही पतंगों को हल्‍के में लेते हो लेकिन एक्‍ट के तहत ये भी वायुयान हैं। ऐसे में इन्‍हें भी उड़ाने के लि‍ए परमिट लेना जरूरी है।

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