चोटीकांड : काल्पनिक हजामत की अफवाह

चोटीकांड : काल्पनिक हजामत की अफवाहफोटो साभार -(पोल खोल इंडिया डॉट कॉम )

रमेश ठाकुर

लखनऊ। चोटीकांड समाज की मौजूदा सामूहिक दुर्दात चेतना के कुंद हो जाने का एक उदाहरण मात्र है। चोटी काटने की घटनाएं जब से सामने आई हैं, तब से देशभर की महिलाएं दहशत और खौफ में हैं। राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश व दिल्ली में चोटी काटने की विचित्र घटनाओं से महिलाएं सहम सी गई हैं। इन संदेहादस्पद घटनाओं पर एकाएक विश्वास करना मुश्किल हो रहा है, लेकिन महिलाओं के अपने आप बाल कटने की वारदातों ने चारों ओर खलबली मचा दी है।

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शासन-प्रशासन भी सकते में है। उन्हें लगातार शिकायतें मिल रही हैं। पूरे महकमे को सोचने पर मजबूर कर दिया है। हरियाणा में चोटी कटने की अब तक करीब पचास-साठ शिकायतें पुलिस को मिल चुकी हैं। प्रशासन ने पहले इस घटना को हस्यास्पद करार दिया, लेकिन जब घटनाएं एक के बाद एक बढ़ती गईं, तो संज्ञान लेना उचित समझा। जहां वारदातों की शिकायतें मिल रही हैं, पुलिस वहां भी पहुंच रही है, लेकिन वारदात की जगह पर कोई सुराग नहीं मिल रहे।

अब तो चोटीकांड पीड़ितों के मेडिकल टेस्ट भी कराए जाने लगे हैं। बावजूद इसके, कोई असामान्य लक्षण सामने नहीं आ रहे। घटना के वक्त किसी ने अभी तक यह दावा नहीं किया है, उन्हें कथित हमलावर दिखाई दिया। सभी हवा में तीर चला रहे हैं। चोटी काटने की घटना अफवाह है या सच्चाई? इसको अपने स्तर पर जांचने के लिए अलग-अलग राज्यों की पुलिस खूब पसीना बहा रही है। पर, नतीजा शून्य निकल रहा है।

चोटी कटने की सबसे पहली घटना हरियाणा में घटी। इसके बाद देश के कई राज्यों में सिलसिला शुरू हो गया। बाल काटे या नहीं, ये कहना फिलहाल जल्दबाजी होगी, लेकिन प्राथमिक तौर पर यह घटनाएं अफवाह सी लगती हैं, क्योंकि अभी तक कोई वैज्ञानिक प्रमाणिकता सामने नहीं आई है।

उत्तर भारत के हरियाणा और राजस्थान की करीब पचास से अधिक महिलाओं ने शिकायत की है कि किसी ने उन्हें बेहोश कर रहस्यमयी तरीके से उनके बाल काट लिए हैं। इस रहस्य को सुलझाने में पुलिस अब तक नाकाम रही है।

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चोटीकांड की खबर पिछले कुछ दिनों से पूरे देश में आग की तरह फैली हुई है। इसका सबसे ज्यादा बुरा असर महिलाओं पर पड़ रहा है। औरतें डरी व सहमी हुई हैं। डरे भी क्यों न, आखिर घटनाएं उनसे ही जुड़ी हैं। गांव की औरतें रात के वक्त उजाला करके सो रही हैं। दिन में खेतों में भी काम करने नहीं जा रही हैं।

ग्रामीण महिलाओं के भीतर चोटी कटने की दहशत इस कदर समा गई है कि वह दिन में भी अकेली घरों से बाहर नहीं निकलती। महिलाओं के भीतर पनपे इस डर को देखकर उनके पति भी इस उधेड़बुन में हैं कि आखिर यह कैसे हो रहा है, वह भी बहुत चिंतित हैं।

पीड़ितों की कहानी पर पुलिस-प्रशासन विश्वास नहीं कर रहा। दो दिन पहले की ही बात है जब एक घटना की शिकायत लेकर गुरुग्राम के भीमगढ़ इलाके की बुजुर्ग सुनीता देवी थाने पहुंच कर बताती हैं कि एक तेज फ्लैश लाइट उनके चेहरे पर अचानक पड़ती है और वह बेहोश हो जाती है। जब होश आता है तो पता चलाता है कि उनके बाल कट चुके हैं।

दिल्ली के कोटला, रणहौला, नजफगढ़ व अन्य कुछ जगहों से भी पुलिस को कुछ ऐसी ही शिकायतें मिली हैं। पुलिस अपने स्तर गंभीरता से जांच कर रही है, लेकिन अभी तक खाली हाथ है। हालांकि कुछ संदिग्ध और जेब कतरों को पकड़ कर शक के आधार पुलिस पूछताछ कर रही है। दिल्ली में इस घटना की सच्चाई को जानने के लिए पुलिस मनोवैज्ञानिक अस्पताल 'इबहास' की मदद ले रही है।

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शिकायत करने वाली महिलाओं की चिकित्सकों से कांउसिलिंग कराई जा रही है। महिलाओं के व्यवहार, सोच व समाजिक-सांस्कृतिक परिवेश को जानने के लिए इबहास की एक टीम बकायदा इस काम पर लगा दी गई है।

दरअसल, काल्पनिक हजामत की पहली अफवाह वाली खबर पिछले माह तीन जुलाई को राजस्थान में सामने आई थी, लेकिन उसके बाद हरियाणा, फिर हरियाणा से सटे दिल्ली के कुछ इलाकों और उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में कइयों की चोटी अपने आप कट चुकी हैं। इस घटना की सच्चाई फिलहाल कोसों दूर है। इसे लोग अफवाह मानकर चल रहे हैं, लेकिन इस अफवाह ने आगरा में एक बुजुर्ग महिला की जान ले ली। कुछ अंधविश्वासी लोग हैवान बन गए।

बुजुर्ग महिला रास्ता भटककर अपनी गली छोड़कर दूसरी गली में चली गई थी। पर, लोगों ने उसे डायन समझकर हल्ला मचाना शुरू कर दिया और बुजुर्ग महिला को लोगों ने चारों ओर से घेर लिया और पीटने लगे। लोगों ने उसे मार-मार कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। इसकी खबर महिला के परिजनों को लगी। वह मौके पर पहुंचे और उसे इलाज के लिए अस्पताल ले गए, लेकिन ज्यादा गंभीर चोटे आने के चलते वृद्धा ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

घटना आगरा के मुटनई गांव की है। घटना को अंजाम देने वाले लोगों पर फिलहाल पुलिस ने गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। लेकिन सवाल ये है कि महज अफवाह ने एक निर्दोष की जान ले ली। इसकी जबावदेही किसकी है?

शिक्षित वर्ग कभी भी इस तरह की जन भ्रामक कहानियों पर विश्वास नहीं करता। समाज में समय-समय पर इस तरह की बेकार बातों का बाजार गर्म रहता है। मतलब, इस तरह की ढोंगी कहानियां पहले भी सामने आती रही हैं। कुछ साल पहले दुनियाभर के लाखों हिंदुओं के बीच एक अफवाह फैली हुई थी कि शिव भगवान की मूर्ति दूध पी रही है। बात इक्कीस सितंबर, 1995 की है। सुबह के समय भगवान गणेश की मूर्ति को चम्मच से दूध पीने की अफवाह ने समूचे हिंदुस्तान को अपने आगोश में ले लिया था। लोग मंदिरों में उमड़ पड़े। धक्का-मुक्की होने लगी, लेकिन जब सच्चाई सामने आई तो सभी सन्न रह गए।

चोटी कटने की घटना भी इसी घटना से मेल खाती है। इसके पीछे कोई चमत्कार या अलौकिक शक्ति नहीं दिखाई पड़ती। घटनाओं की शिकायत करने वाली महिलाएं निश्चित तौर पर किसी आंतरिक मनोवैज्ञानिक द्वंद्व से जूझती दिखाई पड़ती हैं। जब वे इस तरह की घटनाओं के बारे में सुनती हैं, तो खुद पर ऐसा होते हुए सा अहसास करती हैं, ऐसा कभी-कभी अवचेतनावस्था में भी होता है।


(ये लेखक के निजी विचार हैं)

आईएएनएस

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