कमाल का आइडिया : प्लास्टिक की बोतलों से सस्ते यूरिनल बनाकर सुर्खियों में आए ये बच्चे  

कमाल का आइडिया : प्लास्टिक की बोतलों से सस्ते यूरिनल बनाकर सुर्खियों में आए ये बच्चे  इस तरह बच्चों ने बोतलों से इस तरह बनाए यूरिनल

लखनऊ। अपने स्कूल के टॉयलेट से आती बदबू से तमिलनाडु के त्रिची ज़िले के एक सरकारी स्कूल के बच्चे बहुत परेशान थे। इस बदबू से परेशान होकर उन्हें आइडिया आया कि प्लास्टिक की बेकार बोतलों से यूरिनल्स बनाए जा सकते हैं, ताकि उन्हें बदबू से निज़ात मिल सके और स्कूल भी स्वच्छ रहे। 13 साल के बच्चों द्वारा बनाए गए इस प्रोजेक्ट को 'आई कैन अवॉर्ड 2016' में 'बोल्डेस्ट आइडिया' अवॉर्ड से नवाज़ा गया।

पंचायत संघ के इस माध्यमिक विद्यालय में टॉयलट से आने वाली दुर्गंध का यह हाल था कि बच्चों का कक्षा में बैठना भी मुश्किल हो जाता था। स्कूल के कुछ छात्रों को बुखार, पेट में दर्द, चक्कर आना जैसे बीमारियां अक्सर होने लगी थीं जिससे उन्हें स्कूल से छुट्टी लेनी पड़ती थी। शुरुआत में उन्हें लगा कि अगर हम रोज़ नहाएंगे, धुले हुए कपड़े पहनेंगे और स्वच्छता से रहेंगे तो हम इन बीमारियों से बच सकते हैं। लेकिन एक स्वयंसेवी संगठन डिज़ाइन फॉर चेंज ने इन बच्चों को चार स्टेप का एक सरल तरीका समझाया - महसूस करो, सोचो, करो और बांटो। इस संस्था उद्देश्य था कि बच्चे अपने समुदाय की परेशानियों को दूर करने के लिए कारण की जड़ तक जाएं।

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उन्होंने 13 साल के पांच बच्चों की एक समिति बनाई जिसमें सुपिकन्दियन, संतोष, दियानिथि, रगुल और प्रबाहरन को शामिल किया गया। इनका काम था कक्षा में आने वाली तेज दुर्गंध के पीछे के कारण का पता लगाना। इसके बाद उन्हें पता चला कि वह दुर्गंध उनके स्कूल के टॉयलेट से आती है। टॉयलेट में सही व्यवस्था न होने के कारण बच्चे उसके फर्श पर ही यूरिन करते थे। जिससे उनके पैरों और चप्पलों पर यूरिन की बूंदों के छींटे आ जाते थे और कक्षा में बदबू आने लगती थी। लगातार यही समस्या बने रहने से कुछ लोगों को यूरिन इनफेक्शन भी होने लगा था।

स्कूल के शौचालय में यूरिनल्स लगवाना काफी महंगा था। फिर इन बच्चों के दिमाग में एक कमाल का आइडिया आया। 20 लीटर की प्लास्टिक की बोतल से निकालकर पानी पीने के दौरान एक बच्चे को ख्याल आया कि इस बोतल का इस्तेमाल यूरिनल के तौर पर किया जा सकता है। बच्चों ने इस बारे में संस्था डिजाइन फॉर चेंज से बात की और यह तय किया कि अगर बोतलों को लंबाई में काटा जाए तो यूरिनल्स के रूप में उनका प्रयोग किया जा सकता है। इसके बाद वे बोतल बेचने वाले दुकानदार के पास गए। बच्चों के इस आइडिया से खुश होकर दुकानदार ने उन्हें पुरानी बोतलें काफी कम दाम पर दे दीं।

इसके बाद बच्चों ने टॉयलेट बनवाने के लिए पूरे स्कूल से फंड इकट्ठा किया और पाइप व टॉयलेट बनाने के लिए प्रयोग में आने वाले अन्य सामान की खरीदारी की। सबसे पहले बच्चों ने टॉयलेट की दीवारों को हरे रंग से पेंट किया और उसके बाद जल निकासी व्यवस्था को इस तरह से सेट किया कि बोतल में लगे पाइप से यूरिन आसानी से पास हो जाए।

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इस बारे में बात करते हुए बच्चों ने अंग्रेजी वेब पोर्टल बेटर इंडिया से कहा, "हम इस प्रोजेक्ट को सिर्फ स्कूलों में ही नहीं बल्कि घरों और सार्वजनिक स्थानों पर भी इस्तेमाल में ला सकते हैं। इससे यूरिनरी इनफेक्शन से भी बचा जा सकता है। इसके इस्तेमाल से गंदगी से होने वाली बीमारियों को भी कम करने में मदद मिल सकती है। इस प्रोजेक्ट से देश को साफ और स्वच्छ रखने में मदद मिलेगी और स्वच्छ भारत मिशन में भी सहभागिता दे पाएंगे।"

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डिजाइन फॉर चेंज के 'आई कैन अवार्ड्स 2016' में 3,600 लोगों को पीछे छोड़ते हुए इन बच्चों को 'बोल्डेस्ट आइडिया' का अवॉर्ड मिला। ग्राम शिक्षा समिति ने भी इन बच्चों के प्रोजेक्ट की सराहना की और सम्मानित किया।

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