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गोदामों में सड़ रहा अनाज और कुपोषण से मरते लोग

दूसरा सबसे बड़ा खाद्य उत्पादक देश होने के बावजूद भारत की कुल आबादी का एक बड़ा हिस्सा भुखमरी की चपेट में

Shefali Mani TripathiShefali Mani Tripathi   1 Nov 2018 5:54 AM GMT

गोदामों में सड़ रहा अनाज और कुपोषण से मरते लोग

लखनऊ। हमारे देश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खाद्यान उत्पादक देश है, लेकिन इस देश की कुल आबादी का एक बड़ा हिस्सा भुखमरी की चपेट में भी है।


मध्य प्रदेश के महिला एवं बाल विकास विभाग के हाल के आंकड़े ही बताते हैं कि मध्य प्रदेश में जहां हर दिन 92 बच्चों की मौत कुपोषण की वजह से हो रही है, वही पश्चिम बंगाल में 1,54,810 कुंतल अनाज बर्बाद हो रहा है।

ग्लोबल हंगर इंडेक्स ने 2018 की अपनी रिपोर्ट में जो आंकड़े पेश किये हैं वह चिंताजनक है। भारत भूखे देशों की सूची में 103वें स्थान पर पहुंच गया है जबकि इसी रिपोर्ट के 2017 के आंकड़ों के अनुसार भारत 100वें स्थान पर था। 2014 में भारत इसी सूची के अनुसार 55वें स्थान पर था। 2018 तक यह 48 स्थान नीचे आ चुका है।

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रिपोर्ट में 119 देशों को शामिल किया गया है। सोचने वाली बात यह है कि बांग्लादेश और नेपाल जैसे देश जिन्हें भारत के मुकाबले कम सक्षम माना जाता है वो भी भारत से ऊंचे पायदान पर हैं। वहीं पाकिस्तान 106वें स्थान पर है।

इस तरह के आकड़े भारत के एक बहुत बड़े खाद्यान उत्पादक देश होने पर सवाल उठा रहे हैं। भारत में हर साल दो लाख करोड़ की सब्जियां और फल नष्ट हो जाते हैं। इसमें ज्यादातर या तो किसानों के गुस्से के कारण सड़क पर फेंक दिए जाते हैं या फिर कोल्ड स्टोरेज की कमी के कारण सड़ जाते हैं।

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इमर्सन क्लाइमेट टेक्नोलाजी इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में सालाना 44,000 करोड़ रुपए के फल-सब्जी और अनाज बर्बाद हो जाते हैं। यह एजेंसी अमेरिका की विनिर्माण व प्रौद्योगिकी कंपनी इमर्सन की शाखा है। अब सवाल यह है कि अगर देश में इतना अनाज है तो फिर लोग भुखमरी की चपेट में क्यों हैं ?

अनाज बर्बादी एक बड़ा कारण

समाचार पत्र हिंदुस्तान में छपी एक खबर के अनुसार सरकारी गोदामों में पिछले 10 सालों से रखा 7.80 लाख कुंतल अनाज सड़ गया। हमारे देश में प्रति व्यक्ति अनाज की खपत लगभग 500 ग्राम है। इस तरह से रोजाना करीब 43 हज़ार लोगों का खाना बर्बाद होता है। इसी ख़बर के मुताबिक देश में हर दिन करीब 20 करोड़ लोग भूखे रह जाते हैं या अल्प भोजन पर निर्भर हैं। इतना ही नहीं, 821 बच्चे प्रतिदिन पर्याप्त खाना नहीं मिलने के कारण दम तोड़ देते हैं।

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लखनऊ के इकोनॉमिस्ट अरविन्द मोहन ने गाँव कनेक्शन से फ़ोन पर बातचीत के दौरान बताया, "हमारे देश में करीब एक लाख करोड़ किलो से ज्यादा अनाज सही से भण्डारण न होने के कारण सड़ जाता है। इसके साथ ही इसके लिए जो भी इन्वेस्टमेंट जरूरी था न तो वह हो पाया न ही कोई रोड मैप बनाया गया, जिसमें की कोई प्राइवेट पार्टनर आ कर हमारे साथ इस मामले में पार्टनरशिप कर सके। अगर ऐसा होता तो ग्लोबल पार्टनर के साथ-साथ घरेलू पार्टनर को भी एक अच्छा अवसर मिलता। इस सब चीजों की वजहों से और मुश्किलें आ रही हैं।

वहीं ग्लोबल फ़ूड वेस्ट नॉट वांट नॉट के 2013 की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में लगभग 21 मिलियन टन गेंहू बर्बाद हो रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक यह भी कहा गया कि भारत में कुल 6300 कोल्ड स्टोरेज हैं, इनकी क्षमता 3.01 करोड़ टन है। भारत में कुल कोल्ड स्टोरेज की संख्या जितनी है उतनी ही और कोल्ड स्टोरेज की जरूरत भारत को है।

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