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गंगा की अविरलता सुनिश्चित करने के लिये किए जा रहे ठोस उपाय: सरकार

गंगा की अविरलता सुनिश्चित करने के लिये किए जा रहे ठोस उपाय: सरकार

जल शक्ति राज्य मंत्री रतनलाल कटारिया ने बुधवार को कहा कि सरकार ने गंगा के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय महत्व को समझते हुए इसके संरक्षण के लिए कारगर कदम उठाये हैं ताकि गंगा की अविरलता और नि‍र्मलता को सुनश्चिति किया जा सके। राज्यसभा में स्वच्छ गंगा अभियान के बारे में सपा के रेवती रमण सिंह द्वारा उठाए गए मुद्दों पर जवाब देते हुये कटारिया ने कहा कि पानी की गुणवत्ता में कमी पाये जाने पर इसे दूर करने के उपाय भी किये जाते हैं।

उल्लेखनीय है कि सिंह ने स्वच्छ गंगा अभियान के बारे में 24 जून 2019 को राज्यसभा में एक तारांकित प्रश्न के उत्तर से उठे मुद्दों पर चर्चा कराने की मांग की थी। इस पर हुई आधे घंटे की चर्चा का जवाब देते हुये कटारिया ने कहा कि गंगा, सभ्यता एवं संस्कृति की परिचायक ही नहीं बल्कि यह करोड़ों भारतवासियों की आजीविका का जरिया भी है। इसका प्रवाह संस्कृति का प्रवाह है।

उन्होंने कहा कि गंगा की नि‍र्मलता और अविरलता के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और इसके लिये नमामि गंगे परियोजना शुरू की गई। इसमें पांच साल के लिए 20 हजार करोड़ रुपये की लागत से 299 परियोजनायें शुरु की गयी हैं। अब तक 101 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। उन्‍होंने बताया कि नमामि गंगे परियोजना के तहत हर प्रकार के प्रदूषण के निवारण, वनीकरण, नदी तट विकास, गंगा की अविरलता के कार्य, नयी प्रौद्योगिकी की मदद से जैव विविधता का संरक्षण, जनजागरूकता और जनभागीदारी सुनश्विति करने के लिए प्रभावी तरीके से प्रयास किए जा रहे हैं।

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उन्होंने बताया कि गंगा में प्रदूषण का मुख्य स्रोत सीवर है। इस समस्या के निदान के लिये गंगा में सीवर के पानी के प्रवाह को रोकने के प्रयास भी जारी हैं। उन्होंने बताया कि गंगा में 70 जल वि‍द्युत परियोजनायें चल रही थीं। इनमें से 19 परियोजनायें पूरी कर ली गयी हैं, सात पर काम जारी है और अन्य पर कानूनी विवाद के कारण उच्चतम न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के चलते काम नहीं हो रहा है।

इससे पहले चर्चा शुरु करते हुये सपा के रेवती रमण सिंह ने कहा कि हिमालय और गंगा भारत की सभ्यता से जुड़े हुए हैं। हिमालयी क्षेत्र में बांध बनाए जाने से गंगा का प्रवाह बाधित हुआ है। उन्होंने कहा, हमारी सभ्यता की परिचायक गंगा 60 करोड़ लोगों की जीविका चलाती है। पांच राज्यों से हो कर 2500 किमी से अधिक प्रवाह वाली गंगा से अलकनंदा, मंदाकिनी, धौली, काली, गौरी सहित कई सहायक नदियां निकलती हैं।

गौरतलब है कि स्वच्छ गंगा परियोजना का आधिकारिक नाम एकीकृत गंगा संरक्षण मिशन परियोजना या 'नमामि गंगे' है। यह मूल रुप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम मिशन है। प्रधानमंत्री बनने से पहले ही मोदी ने गंगा की सफाई को बहुत समर्थन दिया था। उन्होंने वादा किया था कि वह यदि सत्ता में आए तो वो जल्द से जल्द यह परियोजना शुरु करेंगें। (इनपुट भाषा)

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