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पशु आहार की कमी से जूझ रहे पशुपालक, दोगुने दाम में खरीदने की मजबूरी

लॉकडाउन के बाद पशु पालकों पशु आहार की कमी से जूझ रहे हैं, जबकि सरकार ने पशु आहार के आवाजाही पर छूट दे रखी है, लेकिन अभी भी पशु आहार नहीं पहुंच या रहा है। जहां है भी वहां दोगुने दाम पर बिक रहा है।

Divendra SinghDivendra Singh   30 March 2020 8:23 AM GMT

पशु आहार की कमी से जूझ रहे पशुपालक, दोगुने दाम में खरीदने की मजबूरी

लखनऊ। हर दिन 100-150 लीटर का दूध का उत्पादन करने वाली नेमचंद की डेयरी में अब दूध का उत्पादन पूरी तरह घट गया है। पशु आहार की कमी से नेमचंद को ये परेशानी उठानी पड़ रही है।

पूरे देश में लॉक डाउन के बाद सरकार ने पशु आहार और चारे को एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश में ले जाने की अनुमति तो दे दी, लेकिन अभी भी पशुपालकों तक पशु आहार नहीं पहुंच पा रहा है।

मध्य प्रदेश के भोपाल जिला मुख्यालय से लगभग 33 किमी दूर चंदेरी गाँव के नेमीचंद दूध का व्यापार करते हैं और उनकी डेयरी में इस समय 50 गाय और भैंसें हैं। वो हर दिन दूसरे पशुपालकों से भी दूध इकट्ठा करके 33 किमी दूर भोपाल दूध लेकर जाते हैं।

नेमीचंद बताते हैं, "इस समय चूनी, चोकर, खली सब खत्म हो गई है, हमारे यहां किसी भी दुकान पर कुछ नहीं मिल रहा है, जिन दुकानों पर है भी वो भी बहुत महंगा दे रहे हैं। एक बोरा चोकर जो 1000 रुपए में मिलता था अभी 1500-1600 रुपए में बिक रही है। अगर गाय-भैंस को खाने को ही नहीं मिलेगा, तो दूध तो घटेगा ही।"


गृह मंत्रालय ने 26 मार्च को सभी राज्यों के लिए आदेश जारी किया है कि सभी राज्य पशु आहार और चारे के आवाजाही पर कोई रोक न लगाएं। कई सारे राज्यों की सीमा पर पशु आहार से भरे ट्रक खड़े हुए थे, क्योंकि राज्य सरकार उन्हें आगे नहीं जाने दे रही थी।

पशु आहार की कमी के साथ ही पशु पालकों को एक परेशानी और भी आ रही है, कि वो दूध कहां बेचें। पशुपालक होटल और चाय की दुकानों पर भी दूध देते हैं, लेकिन सब बंद होने से उन्हें परेशानी हो रही है।

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"हमारे यहां ज्यादातर लोग चाय की दुकान और होटलों पर दूध देते हैं, लेकिन अब सब बंद हो गए हैं, अब जो दूध हो रहा है। उसे भी बेचने में दिक्कत आ रही है।, "नेमचंद ने आगे बताया।

20वीं पशुगणना के अनुसार देश में 14.51 करोड़ गाय और 10.98 करोड़ भैंसें हैं, जबकि गोधन (गाय-बैल) की आबादी 18.25 करोड़ है। साथ ही दुधारू पशुओं (गाय-भैंस) की संख्या 12.53 करोड़ है। इस सभी पशुओं के लिए खली, चूनी, चोकर बहुत जरूरी होता है।


सिर्फ मध्य प्रदेश अकेले में ये समस्या नहीं है। झारखंड के देवघर के भैरव राय डेयरी फार्म के रूपेश कुमार कहते हैं, "बंदी से दूध का व्यवसाय करने वालों का बहुत नुकसान हो रहा, इसे तो हम कई दिन तक रख भी नहीं सकते हैं। इस समय पशु आहार भी नहीं मिल पा रहा है। जिन दुकानों पर है भी बहुत महंगा दे रहा हैं। छोटे पशुपालकों के साथ ही बड़े पशुपालकों को भी बहुत परेशानी हो रही है।"

उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात में श्री बेहराजी कैटल फीड प्राइवेट लिमिटेड आस-पास के कई जिलों में पशु आहार सप्लाई होता है। लेकिन सरकार के आदेश के बाद भी इन्हें पशु आहार की सप्लाई में परेशानी आ रही है।

कंपनी के निदेशक यतीन्द्र गुप्ता बताते हैं, "इस समय प्रोडक्शन बिल्कुल घट गया है, क्योंकि अभी न मजदूर आ पा रहे हैं और जो माल बन गया है वो भी बाहर नहीं जा पा रहा है। हमारा पशु आहार कानपुर, उन्नाव, कन्नौज, लखनऊ, फतेहपुर जैसे कई जिलों में जाता है। लेकिन ट्रांसपोर्ट की कमी के कारण नहीं जा पा रहा है।"

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वो आगे कहते हैं, "अभी सरकार ने भी कह दिया है कि पशु आहार जा सकता है, लेकिन अभी लखनऊ से गाड़ियां माल लेने आ रहीं थीं, उन्हें वहीं से लौटा दिया गया है। गांव में हमारे जो सप्पलायर हैं लगातार फ़ोन कर रहे हैं कि माल ही नहीं बचा है। अब जब यहीं से नहीं निकल पायेगा तो उन तक कैसे पहुंचेगा।"



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