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कोरोना का साया: फूलों को हर दिन तोड़कर फेंकने को मजबूर हैं किसान

कोरोना वायरस का असर करोड़ों लोगों पड़ा है, तीन लाख से ज्यादा लोग इससे संक्रमित हैं और 14 हज़ार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। गाँव कनेक्शन की विशेष सीरीज "कोरोनाश" में पढ़िए फूलों की खेती से जुड़े किसानों और कारोबारियों पर इसका क्या असर पड़ा है।

Divendra SinghDivendra Singh   23 March 2020 4:58 AM GMT

कोरोना का साया: फूलों को हर दिन तोड़कर फेंकने को मजबूर हैं किसान

"मार्केट में फूल बिके या न बिके, उन्हें हर दिन तोड़कर फेंकना होगा नहीं फूलों के भार से ही पौधे बेकार हो जाएंगे, इस बार बहुत घाटा होने वाला है।" गेंदा और गुलाब की खेती करने वाले आशुतोष कहते हैं।

आशुतोष राजस्थान के भीलवाड़ा में कई साल से फूलों की खेती कर रहे हैं, जिससे सालाना उन्हें 30-40 लाख का फायदा हो जाता है। कोरोना के असर के बाद शादियां और दूसरे कार्यक्रमों के न होने से उन्हें फूलों को फेंकना पड़ रहा है। अभी आशुतोष के पास दस बीघा में गुलाब के 60 हज़ार और गेंदा के 20 हज़ार पौधे लगे हैं।

वो आगे बताते हैं, "भीलवाड़ा पूरी तरह से बंद हो गया है, शादियां, फंक्शन, इवेंट्स तो पहले से ही बंद हो गये थे, इन्हीं से अच्छी कमाई हो जाती थी। अभी मेरे पास गुलाब और गेंदा के फूल हैं। मंदिर बंद होने से गेंदा का भी वही हाल है।थोड़े बहुत मॉल्स में जाते थे वो भी बंद हो गये जहां से अच्छी कमाई हो जाती थी सब तो बंद ही है।

देशभर में कोरोना मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। देश में कोरोना के मरीजों की संख्‍या 350 के करीब हो गई है। वहीं, सात लोगों की मौत हो गई है।

आशुतोष ने गुलाब अभी रखे हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में इन्हें भी फेंकना पड़ेगा।

भारत, अमेरिका, नीदरलैंड, इंग्लैंड, जैसे कई देशों को फूल निर्यात करता है। एपीडा के अनुसार साल भारत 19726.57 मीट्रिक टन फूल निर्यात किए थे, जिनकी कीमत 571.38 करोड़ रुपए थी। जबकि अभी २०१९- में 13,298.40 मीट्रिक टन 405.84 लेकिन कोरोना का असर इस पर भी पड़ा है।

कोरोना के असर से फूलों के कारोबार, मांग और उससे जुड़े लोगों पर असर पड़ रहा है। सिर्फ बड़े कारोबारी ही नहीं किसान और मंदिरों पर फूल बेचने वाले भी परेशान हैं।


गेंदा की खेती करने वाले किसान ऐसे तैयारी करते हैं कि मार्च-अप्रैल में नवरात्रि और शादियों से अच्छी कमाई हो जाती है। साथ ही साल भर मंदिरों और दूसरे कार्यक्रमों में फूलों की मांग बनी रहती है।

आशुतोष आगे कहते हैं, "हमने तैयारी उसी हिसाब से की थी कि पहले नवरात्री आएगी उसके बाद , उसके बाद शादियां का सीजन आ जाता, अभी तो यही है फूलों को तोड़कर फेंकना होंगा, कम से कम लेबर चार्ज में, क्योंकि पौधों को जिन्दा रखना है, अगर अप्रैल तक ऐसा ही रहा तो 15-20 लाख रुपए का नुकसान हो जाएगा।"


देश भर में वैष्णों देवी (जम्मू-कश्मीर), महाकालेश्वर मंदिर (उज्जैन), सिद्धि विनायक मंदिर (मुम्बई) जैसे मंदिरों में लाखों कुंतल फूल हर दिन चढ़ते हैं, लेकिन मन्दिरों के बंद हो जाने से भी फूल बर्बाद हो रहे हैं।

मध्य प्रदेश के महाकालेश्वर मंदिर में पूछताछ केंद्र के प्रभारी चंद्रकांत द्विवेदी बताते हैं, "हमारे यहां तो गाड़ियों से भरकर फूल आते हैं, लेकिन कल से मन्दिर बंद हो गया तो यहां की सारी दुकाने भी बंद हो गईं हैं, अभी शायद 31 मार्च तक मंदिर बंद ही रहेगा।"

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले के रवि पाल भी गेंदा की खेती करते हैं, उनके गेंदा के फूल आगरा, मथुरा, कानपुर जैसे कई शहरों में जाते हैं।

रवि का भी इस बार काफी नुकसान हुआ है, रवि बताते हैं, "महीने की शुरुआत में जहां लोग 50 किलो से एक कुंतल तक गेंदा का फूल मंगा रहे थे, आज दस-पांच कुंतल तक सिमट गए हैं, यही तो कमाई का सही समय होता है। फूलों का स्टॉक रखा हुआ है, लेकिन कोई खरीदने वाला नहीं है। फूलों को कितने दिन तक रख सकते हैं, दस-पांच दिन में खराब हो जाते हैं। फूलों को तोड़कर फेंकना पड़ रहा है।"


आम दिनों में मथुरा-वृंदावन के मंदिरों में भी फूलों की अच्छी मांग रहती है। लेकिन ज्यादातर मंदिर बंद हो गए हैं, जो मंदिर पहले खुले भी थें, उनमें भी न के बराबर लोग आ रहे थे।

चैत्र नवरात्रि में देश भर में मंदिरों में भीड़ लगती है, इस बार 25 मार्च से नवरात्रि शुरू हो रही है, लेकिन तब भी कोरोना का साया फूलों पर रहेगा।

भीलवाड़ा में फूलों की खेती करने वाले आशुतोष कहते हैं, "कोरोना के डर से देश में होने वाली बड़े-बड़े कार्यक्रम भी निरस्त कर दिए गए हैं, या उनकी तारीखें बढ़ा दी गई हैं। इन कार्यक्रमों में भी फूलों की अच्छी खपत हो जाती है।

राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के अनुसार देश में साल 2015-16 में लगभग 249 हज़ार हेक्टयर में लगभग 2153 हज़ार टन फूलों का उत्पादन हुआ था। देश मे फूल उत्पादन में तमिलनाडु, (20%), कर्नाटक (13.5%) पश्चिम बंगाल (12.2%) प्रमुख राज्य हैं। बाकी राज्यों में मध्य प्रदेश, मिजोरम, गुजरात, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, झारखंड, हरियाणा जैसे राज्य हैं।

तमिलनाडु के मदुरई में लगने वाला फूल बाजार देश के सबसे बड़े बाजारों में से एक है। लेकिन यहां पर भी कोरोना का असर छाया है। पिछले 50 साल में पहली बार 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के दौरान ये बाज़ार बंद रही है।

यहां पर भी बाजार की हालत खराब है। मदुरई में केएमकेपी फ्लावर्स के देव संत ने फोन पर बताया, यहां सब सट डाउन है। हमें बहुत नुकसान हो रहा है।


दुनिया भर में मशहूर नीदरलैंड के ट्यूलिप का यही मौसम होता है। लेकिन हर दिन हज़ारों की संख्या में फूलों को नष्ट किया जा रहा है। पिछले एक हफ्ते से यहां पर गुलाब, गुलदाऊदी और ट्यूलिप के लाखों फूलों को नष्ट किया गया। कोरोना वायरस की वजह से इनका निर्यात पूरी तरह से ठप पड़ा है।

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में इवेंट कंपनी बालाजी इवेंट्स के मैनेजर ब्रज भूषण शुक्ला के कई कार्यक्रम और शादियां रोकनी पड़ीं। ब्रज भूषण बताते हैं, "अभी कल (20 मार्च ) को ही एक शादी थी, ये शादी पहले 22 मार्च को होनी थी लेकिन जनता कर्फ्यू की वजह से 21 को ही करने की तैयारी की गई। सारी तैयारियां हो गईं थीं, लखनऊ के एक बड़े होटल में तैयारी थी, लेकिन फिर डीएम का आदेश आया कि कार्यक्रम रोकना होगा। तब हमने लड़की वालों से बात की, ऐसे में क्या कर सकते थे, शादी रोकनी पड़ी।"

ब्रज भूषण के होली से पहले और बाद में भी कई कार्यक्रम थे, लेकिन सब रोकने पड़े।"लड़के-लड़की वालों का काफी नुकसान हो गया, लेकिन इसमें उनकी और हमारी ही भलाई है, "ब्रज भूषण ने आगे कहा।

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