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Corona Virus : ऑटोमोबाइल सेक्टर को कोरोना ने किया एक कदम और पीछे

कोरोना वायरस से जुड़ी आपात स्थिति के उत्पन्न होने से करोड़ों लोगों पर सीधा असर पड़ा है। 1.13 लाख लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं और चार हजार लोगों की मौत हो चुकी है। लेकिन इन गिनतियों के परे करोड़ों लोग हैं जिनकी जिंदगियों और जीविका पर इस बीमारी का अदृश्य असर पड़ रहा है। गांव कनेक्शन की सीरीज "कोरोनाश" के छठवें भाग में आज पड़ताल ऑटोमोबाइल से जुड़े लोगों पर इसके असर की।

Daya SagarDaya Sagar   14 March 2020 6:25 AM GMT

Corona Virus : ऑटोमोबाइल सेक्टर को कोरोना ने किया एक कदम और पीछे

"हम पहले से ही घाटे में चल रहे थे, अभी इस कोरोना ने हमें और पीछे ढकेल दिया है," ऑटोमोबाइल व्यवसायी बिजेंद्र सिंह गांव कनेक्शन को फोन पर बताते हैं।

बिजेंद्र सिंह झारखंड के जमशेदपुर में गाड़ियों की गियर बनाने वाली एक फैक्ट्री चलाते हैं। मंदी के मारे बिजेंद्र सिंह और उनके साथ के अन्य व्यवसायियों के फैक्ट्री में पहले से ही उत्पादन कम हो रहा था। कोरोना वायरस की वजह से इन फैक्ट्रियों के उत्पादन पर और झटका लगा है।

कोरोना वायरस की वजह से चीन से आने वाले सामानों पर पाबंदी लगा दी गई है। भारत ऑटो पार्ट्स का 27 फीसदी चीन से आयात करता है। चीन से ये ऑटोपार्ट्स समुद्री मार्ग के द्वारा आते हैं, लेकिन भारत सरकार ने चीन से किसी भी तरह के आयात पर फिलहाल के लिए पाबंदी लगा दी है। इससे ऑटोमोबाइल सेक्टर में आई मंदी की स्थिति और गंभीर हो गई है।

चीन में 81 हजार से अधिक लोग कोरोना वायरस से पीड़ित हैं, वहीं विश्व में 1.13 लाख लोगों तक यह वायरस पहुंच गया है। इसमें 4000 से अधिक लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। दुनिया भर के ऑटो मैन्यूफैक्चरर विकल्पों की तलाश कर रहे हैं ताकि चीन से आने वाले मोटर पार्ट्स से उनकी निर्भरता कम हो। लेकिन इतने कम समय में नए विकल्पों को ढूंढ़ना भी काफी मुश्किल है।

गाड़ियों की खरीद-बिक्री पर नजर रखने वाली संस्था सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चर्स (सियाम) ने चेतावनी दी है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक रही तो भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर और अधिक नीचे गिरता चला जाएगा। ऑटोपार्ट्स के आयात में जितनी दिक्कत होगी उतना ही प्रभाव प्रोडक्शन पर भी पड़ेगा।

दरअसल भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार के लिए यह एक संक्रमण का समय है। बीएस-4 गाड़ियों की जगह बीएस-6 गाड़ियां ले रही हैं। लेकिन ऑटोपार्ट्स का आयात प्रभावित होने से बीएस-6 गाड़ियों के भारतीय बाजार में फैलने पर असर पड़ रहा है। वहीं इलेक्ट्रिक गाड़ियों के भी उत्पादन और बाजार बिक्री पर असर पड़ रहा है क्योंकि इलेक्ट्रिक गाड़ियों में प्रयोग होने वाले अधिकतर पार्ट्स चीन से बन कर आते हैं।

दिल्ली एनसीआर में अमन इलेक्ट्रिक व्हिकल्स नाम से इलेक्ट्रिक गाड़ियों का प्रोडक्शन करने वाली कंपनी के एमडी अमन सिंहल ने गांव कनेक्शन से फोन पर बताया कि अभी तक तो कोरोना वायरस का असर हमारी नहीं दिख रहा था लेकिन धीरे-धीरे अब दिखना चालू हुआ है।

उन्होंने बताया, "मोटर, कंट्रोलर सहित इलेक्ट्रिक व्हिकल्स के कई पार्ट चीन से आते हैं। एक महीने का स्टॉक उनके सहित कई अन्य मैन्यूफैक्चरर्स के पास था। लेकिन अब धीरे-धीरे यह स्टॉक खत्म हो रहा है और मालिकों की माथे पर चिंता की लकीरे बढ़ती जा रही हैं।"

अमन ने बताया, "कोरोना प्रभाव के चलते 20-30 प्रतिशत प्रोडक्शन प्रभावित हुआ है। इससे व्हिकल्स के दाम बढ़ रहे हैं। इसके अलावा कई चाइनीज कंपनियों में हमने अपने एडवांस पैसा जमा किया था। आयात ना होने से हमारा वह पैसा भी फंसा हुआ है। वहीं दाम बढ़ने से बाजार में बिक्री भी प्रभावित हो रही है। इस तरह से हमारा पैसा बाजार में भी फंसा हुआ है।"

सियाम के अध्यक्ष राजन वढेरा ने कहा, "भारत की अधिकतर ऑटोमोबाइल बनाने वाली कंपनियां अपने कच्चे माल का 10 फीसदी चीन से आयात करती हैं। लेकिन कच्चे माल का आयात प्रभावित होने से सवारी गाड़ियां, व्यवसायिक गाड़िया, तीन पहिया, दो पहिया, चार पहिया और इलेक्ट्रिक गाड़ियों के उत्पादन पर असर पड़ेगा।"

फिच सोल्यूशंस के एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2020 में ऑटो व्हिकल्स का उत्पादन 8.3 प्रतिशत तक कम होने का अनुमान है। 2019 में यह आंकड़ा 13.2 प्रतिशत तक था। वहीं क्रिसिल जैसी संस्था का कहना है कि चाइनीज न्यू ईयर के चलते कई ऑटोमोबाइल कंपनियों ने पहले से ही ऑटोमोबाइल पार्ट्स चीन से मंगवा लिए थे। ये पार्ट्स 30 से 60 दिनों तक चलेंगे। लेकिन अगर कोरोना वायरस का प्रकोप ऐसे ही बना रहता है तो उत्पादों के मैन्यूफैक्चरिंग पर खासा असर पड़ेगा।

हालांकि मारुति सुजुकी, टाटा, महिंद्रा जैसी बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों ने कोरोना से उत्पादन प्रभावित होने से इनकार किया है। मारूति सुजुकी के चेयरमैन आरसी भार्गव ने एक प्रेस रिलीज जारी करते हुए कहा कि घबराने की कोई बात नहीं है, हमारा प्रोडक्शन कोरोना वायरस से अभी तक प्रभावित नहीं हुआ है। वहीं महिंद्रा के हेमंत सिक्का ने भी कहा कि प्रोडक्शन के लिहाज से यह हफ्ता पिछले हफ्ते से बेहतर बीता। उम्मीद है यह आगे भी जारी रहेगा।

कई जानकारों का मानना है कि यह एक मौका है कि 'मेक इन इंडिया' के जरिये भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग चीन पर से अपनी निर्भरता कम करे और ऑटोपार्ट्स के प्रोडक्शन को बढ़ाए। ब्रेक बनाने वाली कंपनियों ने पिछले दिनों रिपोर्ट भी किया है कि उनका उत्पादन और बिक्री पिछले दिनों बढ़ा है।

ऑटोमोटिव कम्पोनेंट मैन्यूफैक्चरर्स एशोसिएशन ऑफ इंडिया के महानिदेशक विन्नी मेहता ने कहा कि हम चीन और दूसरे देशों पर बहुत ही अधिक निर्भर थे। लेकिन इस घटना के बाद उम्मीद है कि यह निर्भरता घटेगी और कंपनियां स्थानीय स्तर पर ही पार्ट्स का प्रोडक्शन करेंगी।

अमन इलेक्ट्रिक व्हिकल्स के एमडी अमन सिंहल भी इन्हीं बातों को दोहराते हैं। उनका कहना है कि भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए अगर यह संकट है, तो एक मौका भी। अगर सरकार से हमें थोड़ा सा सहयोग मिले, टैक्स और कस्टम में सरकार थोड़ी ढील दे तो भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर भी ऐसे पार्ट्स का प्रोडक्शन कर सकता है।

(गांव कनेक्शन की सीरीज 'कोरोनाश' के सातवें भाग में पढ़िए- कोरोना का दवा कारोबार पर कैसे पड़ा असर)


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