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कोरोना वायरस के डर से लोगों ने कम किया अंडा-चिकन खाना, दस से पचास रुपए किलो तक में बिक रहा चिकन

कोरोना वायरस को लेकर सोशल मीडिया में फैले संदेशों और वीडियो के चलते भारत में लोगों ने अंडा-चिकन खाना कम दिया है। कोरोना के खौफ के चलते पॉल्ट्री इंडस्ट्री में सन्नाटा फैला है, पढ़िए क्या है इसकी असली कहानी...

Divendra SinghDivendra Singh   27 Feb 2020 8:07 AM GMT

कोरोना वायरस के डर से लोगों ने कम किया अंडा-चिकन खाना, दस से पचास रुपए किलो तक में बिक रहा चिकन

चीन में लोगों की जान ले रहे कोरोना वायरस के खौफ से भारत में लोगों ने अंडा और चिकन खाना कम दिया है। कहा जा रहा है कि ये जानलेवा वायरस नॉनवेज (अंडा, मीट, मछली आदि) खाने से फैला है। सोशल मीडिया में ऐसे हजारों मैसेज फैले पड़े है। बीमारी के खौफ से लोगों ने मांसाहार खाना कम दिया है, जिसका असर पोल्ट्री और मीट इंडस्ट्री पर पड़ा है।

पंजाब पोल्ट्री हब के लिए जाना जाता है, यहां पर पोल्ट्री के हजारों फार्म हैं और लाखों लोगों को इससे व्यवसाय मिला हुआ है। लुधियाना में कई सालों से पोल्ट्री का व्यवसाय करने वाले विमल सिंह बताते हैं, "हमारे यहां तो हालत बहुत खराब है, पिछले महीने तक जिसका दाम अच्छा मिल रहा था, उसी को कम दाम पर बेचना पड़ रहा है, दुकानों पर सन्नाटा छाया है।"

देश में चिकन और अंडे की थोक कीमतों में 15-30 फीसदी की कमी आई है। मुर्गी पालन से जुड़े लोगों के अनुसार सोशल मीडिया खासतौर से व्हाट्सएप और फेसबुक जैसे प्लेटफार्मों पर कोरोना वायरस को लेकर तरह-तरह के मैसेज से लोगों को डराया जा रहा है। इसके चलते देश में अंडे और चिकन की मांग में कमी आई है। इसके चलते दाम गिरे हैं।

नेशनल एग कोऑर्डिनेशन कमेटी (NEC) के आंकड़ों के अनुसार, अंडे की कीमतें एक साल पहले के मुकाबले लगभग 15 फीसदी कम हैं। नेशनल एग कोऑर्डिनेशन कमेटी (NECC) के आंकड़ों के हिसाब से अहमदाबाद में अंडे की कीमतें फरवरी 2019 के मुकाबले 14 फीसदी कम हैं, जबकि मुंबई में यह 13 फीसदी, चेन्नई में 12 फीसदी और वारंगल (आंध्र प्रदेश) में 16 फीसदी कम है।

फरवरी 2019 और फरवरी 2020 में प्रति कैरेट अंडों के दाम की तुलना कर सकते हैं

एनईसी के अनुसार इस सप्ताह दिल्ली में अंडे की कीमत 396 रुपए प्रति कैरेट हो गई, जो कि पिछले महीने 447 रुपए थी। यही नहीं दिल्ली में ब्रॉयलर चिकन की कीमत जनवरी के तीसरे सप्ताह के मुकाबले 86 रुपए से गिरकर 78 रुपए प्रति किलो गई है। इसी तरह देश के ज्यादातर हिस्सों में चिकन के दाम कम गिरे हैं। जबकि सर्दियों में पोल्ट्री और अंडे की अधिक मांग होती है।

पांच हजार से ज्यादा पोल्ट्री कारोबारियों के संगठन उत्तर प्रदेश पोल्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष अली अकबर कहते हैं, "अफवाह फैलने से बिक्री में कमी तो आयी है, जबकि पहले से ही पोल्ट्री व्यवसाय घाटे में चल रहा है, ब्रायलर और अंडे दोनों पर इसका असर पड़ा है। ब्रायलर पर तो दस-पंद्रह रुपए की कमी आ गई है। जबकि सर्दियों में अच्छा रेट मिलता था। उत्तर प्रदेश में तो 40 प्रतिशत फार्म पहले से ही बंद हो चुके हैं। जबकि अभी सवा करोड़ अंडा अभी भी बाहर से आता है।"


कोरोना की वजह से सिर्फ चिकन और अंडे पर ही असर नहीं पड़ा है, सोशल मीडिया पर बकरे के मीट से कोरोना वायरस की अफवाह चल रही हैं। राजस्थान के अजमेर में बकरी फार्म चलाने वाले अजीत सिंह राठौर के पास अलग-अलग नस्ल के चार सौ बकरे-बकरियां हैं बताते हैं। वो बताते हैं "सोशल मीडिया पर बहुत से वीडियो और खबरें चल रहीं हैं, जिसमें बताया जा रहा है कि राजस्थान में भी कोरोना वायरस फैल गया है, जिस वजह से हमें सस्ते दाम में बकरे बेचने पड़ रहे हैं, अगर हम बकरो को मंडी में ले जाते हैं।"

देश में पोल्ट्री उद्योग का कुल कारोबार 90 हजार करोड़ रुपए का है, जिसमें 65 प्रतिशत हिस्सा चिकन मीट का और 35 फीसदी हिस्सा अंडे का है। पोल्ट्री इंडस्ट्री का भारत में तेजी से विस्तार हुआ है। तेलंगाना, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश से लेकर से पंजाब-हरियाणा और उत्तर प्रदेश में करोड़ों लोग इस कारोबार से जुड़े हैं।

"पोल्ट्री के माध्यम से कोरोना फैलने की बात सिर्फ अफवाह ही है, मंत्रालय ने इसके लिए सूचना भी जारी की है। लोगों को भी चाहिए की ऐसी अफवाहों पर ध्यान ही न दें, "केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. वीके सक्सेना ने कहा। भारत सरकार के मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय ने 10 फरवरी को एडवाइजरी जारी की थी। इसमें बताया गया कि पोल्ट्री उत्पाद पूरी तरह सुरक्षित हैं। अभी तक पूरे विश्व में ऐसा कोई केस नहीं मिला, जिसमें कहा जा सके कि कोरोना का इस पर असर है।

भारत सरकार के मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय ने 10 फरवरी को एडवाइजरी जारी की थी। इसमें बताया गया कि पोल्ट्री उत्पाद पूरी तरह सुरक्षित हैं। अभी तक पूरे विश्व में ऐसा कोई केस नहीं मिला, जिसमें कहा जा सके कि कोरोना का इस पर असर है।

मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक देश में पोल्ट्री मीट का उत्पादन 3.46 मिलियन टन है, जो वर्ष 2015-16 के (3.26) मुकाबले 2016-17 में 3.46 मिलियन टन था।

पोल्ट्री किसानों के साथ इस व्यवसाय से जुड़ी बड़ी कंपनियों को भी नुकसान हो रहा है। उत्तर प्रदेश के पूर्वाचल इलाकों में चूजों को सप्लाई करने वाली कंपनी सनराइज हैचरी के निखिल गुप्ता बताते हैं, "पोल्ट्री उद्योग मंदी के दौर से गुजर रहा है अब इसको कोई पालना ही नहीं चाहता है। हम लोगों के पास 70 पोल्ट्री फार्म थे, जिसमें 25 बंद हो गए। जो 50 चल रहे हैं, उनको भी चलाने में दिक्कत आ रही है जबकि कंपनी चूजा, फीड और दवा की लगात खुद उठाती है लेकिन कंपनी ही घाटे में तो किसान को पालने के लिए कहां से देगी।"

देश में कई कंपनियां किसानों से ठेके पर ब्रायलर और लेयर पालन करवाती हैं। इस काम में जगह, स्ट्रक्चर और देखरेख किसान की होती है, वहीं चूजा, फीड और दवा की लागत कंपनियां उठाती हैं। बदलते में किसान को तैयार चूजे पर प्रति किलो के हिसाब से कमीशन मिलता है। जैसे यूपी के कई इलाकों में ये 6 रुपए किलो है।


गोरखपुर और आसपास के जनपदों में हर माह करीब 50 लाख मुर्गों की खपत होती है। पिछले कुछ दिनों से ग्रामीण क्षेत्रों में 60 जबकि शहर में डिमांड 25 फीसद कम हो गई है। जिस फार्म पर 20 हजार मुर्गों का उत्पादन था वहां 10 हजार प्रति माह कर दिया गया है। सामान्य दिनों में जहां से 25 कुंतल चिकन की आपूर्ति होती थी वहां से 18-20 कुंतल ही चिकन ही जा रहा है।

कई राज्यों में अफवाहों पर रोक लगाने के और जागरुक करने के लिए चिकन मेला का भी आयोजन हो रहा है। छत्तीसगढ़ के महासमुंद में चिकन मेला लगाने वाले अलोक कुमार पांडेय भी पोल्ट्री व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। वो बताते हैं, "पिछले कुछ दिनों में लोगों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है, इसी लिए हम जगह-जगह पर मेला का आयोजन करा रहे हैं, ताकि पोल्ट्री व्यवसाय से जुड़े लोगों का कुछ तो फायदा हो जाए। हमारे यहां तो कई जिलों में ये मेला लगाया गया है और आगे मार्च तक कई और जिलों में लगेगा। इसमें हम 50 रुपए के कूपन से चिकन बिरयानी, चिकन करी, अंडा करी यहां खाने और साथ ही पार्सल के लिए भी देते हैं।"

महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश जैसे कई राज्यों चिकन मेला का आयोजन हो रहा है

वहीं मध्य प्रदेश के जबलपुर में चिकन मेला का आयोजन करने वाले देवराज सिंह कहते हैं, "मेरे पास पचास हजार मुर्गियां ब्रायलर हैं और देसी नस्ल की मुर्गियां हैं, किसी को तो आगे आना पड़ेगा कि लोगों को जागरुक करे, जबकि मंत्रालय से कहा गया है कि चिकन से कोरोना वायरस का कुछ लेना-देना नहीं है। इसीलिए हम ऐसे आयोजन कर रहे हैं। अभी हमने जबलपुर में मेला लगाया था सैकड़ों की संख्या में लोग पहुंचे थे।"


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