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दलितों पर अत्‍याचार: 2018 में दर्ज हुए 42793 केस, चौथे नंबर पर राजस्‍थान - NCRB

दलितों पर अत्‍याचार: 2018 में दर्ज हुए 42793 केस, चौथे नंबर पर राजस्‍थान - NCRBराजस्थान के नागौर में चोरी के आरोप दलित युवक को पीटा गया।

राजस्थान के नागौर में चोरी के आरोप में दो दलित भाइयों को पीटने का मामला सामने आया है। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है, जिसमें कुछ लोग एक दलित युवक के प्राइवेट पार्ट पर पेट्रोल डाल रहे हैं। इस मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 7 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

देश में दलितों पर अत्‍याचार (Atrocities against SCs) की ऐसी घटनाएं वक्‍त वक्‍त पर सामने आती रहती हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्‍यूरो (NCRB) की रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 में दलितों पर अत्याचार के 42793 मामले दर्ज हुए। 2017 में यह आंकड़ा 43,203 का था, जबकि 2016 में दलितों पर अत्‍याचार के 40,801 मामले दर्ज किए गए।

NCRB के यह आंकड़े बताते हैं कि दलितों पर अत्‍याचार के मामले गुजरे जामने की बात नहीं हैं। यह अब भी हो रहे हैं और बहुतायत में हो रहे हैं। अब भी कई ऐसी खबरें आती हैं कि दलितों की शादी में दूल्‍हे के घोड़ी चढ़ने पर बवाल हो गया। साल 2020 के फरवरी महीने में ही गुजरात के बनासकांठा से ऐसी खबर आई थी। बनासकांठा के सांदीपाडा गांव में एक दलित युवक को शादी के दौरान घोड़ी पर चढ़ने से ऊंची जाति के लोगों ने रोका और इसके बाद उनलोगों ने पथराव भी किया।


ऐसी घटनाएं इस बात का सबूत हैं कि दलितों को लेकर समाज का एक बड़ा तबका अब भी पुरानी सोच से बंधा हुआ है। NCRB की रिपोर्ट भी इस बात की गवाही देती है। रिपोर्ट में राज्‍यों के हिसाब से दलित अत्‍याचार की घटनाएं भी बताई गई हैं। साल 2018 के आंकड़े देखें तो इसमें दलितों पर अत्‍याचार में सबसे आगे यूपी है। वहीं, राजस्‍थान चौथे स्‍थान पर है।

NCRB की रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी में 2018 में 11924 मामले दर्ज हुए। यूपी के बाद बिहार दूसरे नंबर पर है, जहां दलित अत्‍याचार के 7061 मामले दर्ज हुए। यूपी और बिहार के बाद मध्‍य प्रदेश और राजस्‍थान में सबसे ज्‍यादा मामले दर्ज किए गए हैं। मध्‍य प्रदेश में 4753 मामले और राजस्‍थान में 4607 मामले दर्ज हुए हैं।

हालांकि दलितों पर अत्‍याचार रोकने के लिए कड़े कानून बनाए गए हैं, लेकिन वक्‍त वक्‍त पर इस कानून के दुरुपयोग करने की बात उठती रहती है। इसी का हवाला देते हुए 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक फैसला दिया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि 'हाल के दिनों में एससी-एसटी एक्ट के दुरुपयोग के गंभीर मामले सामने आए हैं। इसलिए एक्ट में तुरंत गिरफ्तारी और बिना जांच के एफआईआर लिखने के प्रावधान को खत्म किया जाए।'

SC के इस फैसले का दलित संगठनों ने जमकर विरोध किया था। बाद में केंद्र सरकार ने एक्‍ट को पुराने स्‍वरूप में लाने के लिए एक बिल पेश किया और एक्‍ट को दोबार से उसी स्‍थ‍िति में लेकर आए। फिर सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने फैसले को पलटते हुए एक्ट को पुराने स्वरूप में मंजूर किया।



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