सर्वे: गाड़ियों के धुएं से दिल्ली की हवा सबसे जहरीली, लखनऊ पांच बेहतर शहरों में

सीएसई ने हाल ही में 'द अर्बन कम्यूट' शीर्षक से यह रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट में 14 शहरों में गाड़ियों से होने वाले कार्बन डाइ ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर जैसे प्रदूषकों के अलावा ईंधन की खपत को आधार बनाया गया है।

सर्वे: गाड़ियों के धुएं से दिल्ली की हवा सबसे जहरीली, लखनऊ पांच बेहतर शहरों में

गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण की वजह से दिल्ली की हवा देश में सबसे जहरीली है वहीं इस अधार पर लखनऊ की गिनती देश के पांच बेहतर शहरों में की गई है। सबसे बेहतर स्थिति भोपाल की रही। सेंटर फॉर साइंस ऐंड एन्वायरनमेंट (सीएसई) की 14 शहरों में सर्वे के बाद आई ताजा रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। रिपोर्ट में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नै, बेंगलुरु और हैदराबाद (छह मेगासिटी) और आठ मेट्रोसिटी अहमदाबाद, पुणे, जयपुर, लखनऊ, कोच्चि, भोपाल, विजयवाड़ा और चंडीगढ़ शामिल किए गए थे।

सीएसई ने शुक्रवार को कोलकाता में 'द अर्बन कम्यूट' शीर्षक से यह रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट में 14 शहरों में गाड़ियों से होने वाले कार्बन डाइ ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर जैसे प्रदूषकों के अलावा ईंधन की खपत को आधार बनाया गया है। शहरों की तुलना गाड़ियों की संख्या, जनसंख्या के मुताबिक यात्रा की जरूरत, यातायात के विभिन्न साधनों की भूमिका (पब्लिक ट्रांसपोर्ट, पैदल चलना, साइकल चलाना, निजी वाहन), दैनिक यात्रा की औसत दूरी, गाड़ियों में इस्तेमाल तकनीक और ईंधन के आधार पर की गई है।

दिल्ली क्यों सबसे ज्यादा प्रदूषित

गाड़ियों से निकलने वाले जहरीले धुएं, कार्बन डाइ ऑक्साइड के उत्सर्जन और ईंधन की खपत के आधार दिल्ली को देश में सबसे ज्यादा प्रदूषित महानगर माना गया है। हैरानी की बात यह है कि कुछ मानकों पर दिल्ली का प्रदर्शन दूसरे महानगरों से बेहतर है, जैसे, यात्राओं की संख्या, यात्रा की औसत लंबाई और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के इस्तेमाल के मामले में।

दिल्ली में प्रदूषण ज्यादा होने के पीछे गाड़ियों की अधिक संख्या और तुलनात्मक रूप से अधिक जनसंख्या को वजह माना गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2017 में दिल्ली की जनसंख्या मुंबई की 1.25 गुना, बेंगलुरु की 2.5 गुना, कोलकाता की 1.8 गुना, हैदराबाद की 2.9 गुना और चेन्नै की 2.6 गुना थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली के पास सीएनजी जैसा साफ ईंधन का विकल्प है दूसरे मेगाशहरों की तुलना में उसके यात्रा मानक अच्छे हैं लेकिन बहुत अधिक जनसंख्या, बेशुमार गाड़ियां और दैनिक मुसाफिरों की यात्राएं दिल्ली की इन अच्छाइयों पर हावी हो जाती हैं।


लखनऊ फिलहाल बेहतर पर समय रहते उठाने होंगे और कदम

लखनऊ की स्थिति इसलिए बेहतर है क्योंकि यहां वाहनों से निकलने वाले प्रदूषकों की मात्रा अभी ज्यादा नहीं है। रिपोर्ट में इसके पीछे मूल वजह गाड़ियों की कम संख्या और कम दैनिक यात्राएं माना गया है। लेकिन यहां हर यात्रा में होने वाला उत्सर्जन बहुत ज्यादा है क्योंकि यहां कारों का बहुत ज्यादा इस्तेमाल होता है। इसके अलावा मेट्रो शहरों में गाड़ियों की संख्या में भी बहुत तेजी से वृद्धि हो रही है। लखनऊ के लिए यह वृद्धि दर 17.8 प्रतिशत है, भोपाल के लिए 15 प्रतिशत, पुणे के लिए 18.3 प्रतिशत और कोच्चि के लिए 26.5 प्रतिशत है। वहीं दूसरी तरफ वाहनों की वृद्धि दर मेगा शहर मुंबई में यह 9.9 प्रतिशत, दिल्ली में 11 प्रतिशत और बेंगलुरु में 14 प्रतिशत है।

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समय रहते जाग गया भोपाल

भोपाल ने अपने पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम में समय रहते सुधार कर लिया इसका नतीजा रिपोर्ट में दिखा है। सर्वे में शामिल 14 शहरों में भोपाल में दैनिक यातायात के दौरान सबसे कम ईंधन खर्च होता है। इसी वजह से यहां हवा में पार्टिकुलेट मैटर, कार्बन डाइ ऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड बहुत कम है। कम जनसंख्या, वाहनों की कम तादाद और छोटी यात्राओं की वजह से भोपाल को यह लाभ मिला है। सर्वे में यह भी पता चला है कि भोपाल में दैनिक यात्रा का 47 प्रतिशत पैदल चलकर और साइकिल चला कर पूरा किया जाता है। इसके अलावा भोपाल में शेयरिंग बाइक टैक्सी के रूप में सार्वजनिक यातायात सेवा शुरू की गई है।

छह महानगरों में कोलकाता और मुंबई बेहतर

कुल ईंधन खपत और गैसों के उत्सर्जन के आधार पर कोलकाता का स्थान 14 शहरों में छठे नंबर पर है। लेकिन महानगरों में उसकी स्थिति सबसे बेहतर है, दूसरे महानगरों की अपेक्षा कोलकाता में ग्लोबल वॉर्मिंग के लिए जिम्मेदार ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन और ईंधन की खपत सबसे कम है।

इसकी वजह है कोलकाता का विविधतापूर्ण पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम। इसके अलावा दूसरे महानगरों की तुलना में कोलकाता में निजी वाहन कम और सार्वजनिक यातायात का इस्तेमाल काफी ज्यादा है।

छह महानगरों में कोलकाता के बाद मुंबई का प्रदर्शन बेहतर है। इसके पीछे भी उसकी सार्वजनिक यातायात सेवा का ही हाथ है। रिपोर्ट के मुताबिक, मोटर से होने वाली मुंबई की दैनिक यात्राओं का 89 प्रतिशत हिस्सा सार्वजनिक यातायात के जरिए होता है। मुंबई की लोकल रेल सेवा प्रदूषण रहित है और इसी की बदौलत ईंधन की खपत और प्रदूषकों के उत्सर्जन का स्तर काफी कम रहता है।

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जल्द अपनाने होंगे नए उपाय

रिपोर्ट के मुताबिक, देश में वाहनों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ी है। शुरूआती 60 बरसों (1951-2008) में भारत में 10.5 करोड़ गाड़ियों का पंजीकरण हुआ था। लेकिन दोबारा 10.5 करोड़ वाहनों का पंजीकरण महज महज छह बरसों (2009-15) में हो गया। दूसरी तरफ सार्वजनिक यातायात का इस्तेमाल कम होता जा रहा है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि शहरों में यात्रा के लिए सार्वजनिक यातायात व्यवस्था का प्रयोग 2000-01 के 75.5 प्रतिशत से गिरकर 2030-31 में महज 44.7 प्रतिशत रह जाएगा।

ऐसी स्थिति में इस रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि तय समय सीमा में सार्वजनिक यातायात को सुधारने के लिए कदम उठाए जाएं। पार्किंग पॉलिसी, लो इमिशन जोन जैसे कदमों का इस्तेमाल करके जनता में निजी वाहन इस्तेमाल करने की आदत को हतोत्साहित किया जाए। स्वच्छ ईंधन और ईंधन-कुशल वाहन प्रौद्योगिकियों के साथ शहरी यातायात के लिए बेहतर रणनीति विकसित की जाए।

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