विदेशी बाजार में पहुंचने के लिए तरसता दशहरी और लंगड़ा 

Ashwani NigamAshwani Nigam   22 Jun 2017 6:39 PM GMT

विदेशी बाजार में पहुंचने के  लिए तरसता दशहरी और लंगड़ा दशहरी आम। फोटो: साभार इंटरनेट

लखनऊ। आम उत्तर प्रदेश की मुख्य बागवानी फसल है। प्रदेश में लगभग 40-45 लाख मीट्रिक टन आम का उत्पादन होता है। बावजूद इसके बाद भी स्थिति यह है कि एक लाख टन आम भी विदेशों में निर्यात नहीं हो पा रहा है, जिसके कारण यहां के आम की मुख्य किस्म दशहरी, लंगड़ा, लखनऊ सफेदा, चौसा, आम्रपाली और मल्लिका विदेशों में अपनी पहचान नहीं बना पा रही है।

प्रदेश में बड़ी मात्रा में आम के उत्पादन के बाद भी बड़ी मात्रा में इसके निर्यात नहीं होने से आम उत्पादक किसानों के साथ ही आम व्यापारियों को भी इसका नुकसान हो रहा है। उत्तर प्रदेश में आम के बड़े उत्पादक और आम के निर्यातक नदीम सिद्दकी ने बताया '' उत्तर प्रदेश में आम उत्पादकों और निर्यातकों को, जो सुविधाएं मिलनी चाहिए नहीं मिल रही है। यहां का दशहरी आम भी महाराष्ट्र के अल्फांसों की तरह विदेशी बाजार में बड़ा ब्रांड बन सकता है, लेकिन इसके लिए केन्द्र सरकार और राज्य सरकार के बागवानी और फल प्रसंस्करण विभाग का मिलकर काम करना होगा।''

आम।

देश में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के निर्यात के लिए वाणिज्य मंत्रालय भारत सरकार की तरफ से बनाई गई संस्था कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के सलाहकार विनोद कुमार कौल ने बताया '' उत्तर प्रदेश में पैदा होने वाले आम यूएसए, यूके, यूरोपियन यूनियन, दुबई, जापान, चीन, दुबई और दूसरे देशों में जितना निर्यात होना चाहिए नहीं हो रहा है। पिछले साल उत्तर प्रदेश में 45 लाख 12 हजार 705 मीट्रिक टन आम पैदा हुआ, लेकिन विदेशों में मात्र 1414.8 मीट्रिक टन ही आम निर्यात हुआ। ''

उन्होंने बताया कि यहां के आम विश्व बाजार में इसलिए पहचान नहीं बना पा रहा है, क्योंकि आम उत्पादकों को आम के रख-रखाव और पेस्टीसाइड का कितना प्रयोग करना है उसकी ट्रेनिंग नहीं दी जाती। यही नहीं आम का प्रचार-प्रसार विदेशों में जितना होना चाहिए नहीं हो रहा है।

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उत्तर प्रदेश में पैदा होने वाले आमों को विदेशों में निर्यात होने के लिए अलग-अलग देशों ने कुछ मानक तय किए हैं। इसमें जापान में निर्यात होने वाले आम के लिए वेपर हीट ट्रीटमेंट, चाइना के लिए हाॅट वाटर ट्रीटमेंट या वेपर हीट ट्रीटमेंट, मारिशस के लिए हाॅट वाटर हीट ट्रीटमेंट, साउथ कोरिया के लिए वेपर हीट ट्रीटमेंट, ईरान के लिए हाॅट वाटर ट्रीटमेंट, आस्ट्रेलिया के लिए हाॅट वाटर ट्रीटमेंट, न्यूजीलैंड के लिए वेपर हीट ट्रीटमेंट, यूरोप के लिए हाॅट वाटर ट्रीटमेंट और अमेरिका के लिए इररेडिएशन करना होता है। हालांकि उत्तर प्रदेश में समेत देश में इस प्रकार की जांच की व्यवस्था कम है। इसके अलावा किसानों को भी इसकी जानकारी नहीं दी जाती है, जिसके कारण निर्यात प्रभावित होता है।

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उत्तर प्रदेश में सहारपुर, मेरठ, मुरादाबाद, वाराणसी, लखनऊ और उन्नाव आम फल पट्टी क्षेत्र घोषित किए गए हैं। लखनऊ फल पट्टी क्षेत्र के 26.400 हेक्टेयर क्षेत्रफल में दशहरी, लंगड़ा, लखनऊ सफेदा और चौसा का उत्पादन होता है। उत्तर प्रदेश के आमों की विदेश में निर्यात नहीं से जुड़ी स्थिति पर जानकारी देते हुए अवध मैंगो गोवर्स एसोसिएशन के निदेशक और आम किसान माधवेन्द्र देव सिंह ने बताया कि ''उत्तर प्रदेश के आमों की ब्राडिंग के लिए भारत सरकार की तरफ से जो प्रयास होना चाहिए, नहीं हुआ है। हम लोगों की तरफ से मैंगो फेस्टिवल कराकर इसका प्रयास किया जा रहा है।''

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