Top

दिल्ली: कोरोनो महामारी के कारण छठ पूजा में भी बाजारों में नहीं दिखी रौनक, छोटे, मंझोले व्यापारियों पर ज्यादा असर

छठ पूजा के समय इससे पर दिल्ली के बाजारों में खूब भीड़ रहती थी। लोग खूब खरीदारी भी करते थे, लेकिन इस साल कोरोना के कारण छोटे और मंझोले व्यापारियों का काम बहुत प्रभावित हुआ है।

Amit PandeyAmit Pandey   20 Nov 2020 8:15 AM GMT

दिल्ली: कोरोनो महामारी के कारण छठ पूजा में भी बाजारों में नहीं दिखी रौनक, छोटे, मंझोले व्यापारियों पर ज्यादा असरउत्तर प्रदेश, बिहार की एक बड़ी के आबादी के अपने घर लौट जाने की वजह से भी व्यापार प्रभावित हुआ है। (सभी तस्वीरें- अमित पांडेय)

दिल्ली और देश के अन्य राज्यों में छठ पर्व की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन देश की राजधानी दिल्ली के बाज़ारों में कोरोना महामारी के कारण भीड़ नदारद नज़र आई। दिल्ली की आज़ादपुर मंडी, जहाँ पिछले साल तक छठ की मुख्य ख़रीदारी के लिए भीड़ रहती थी, वहाँ आज छोटे और मँझोले व्यापारी ग्राहकों की कम संख्या से नाखुश हैं।

कोरोना के बढ़ते मामले और घाट पर पूजा की अनुमति ना होने के कारण छठ पूजा की समाग्री की बिक्री बहुत कम कम हुई। आज़ादपुर मंडी के बाहर दस वर्ष से पूजा की टोकरी बेचने वाले कासिम खान बताते हैं, "इस बार व्यापर 76 प्रतिशत कम हो गया है। वहीं एक दूसरे व्यापारी वसीम बताते हैं कि टोकरी बिहार से आती है और इस बार ये टोकरी सस्ती खरीदी है और सस्ती बेच भी रहे हैं, लेकिन फिर भी ख़रीदने वाला कोई नहीं है।

आज़ादपुर मंडी जहाँ अक्सर दुकानदार छठ का सामान खरीदने आते हैं, वे इस वर्ष कुछ ख़ाली नज़र आयी। मंडी में सामान ढाने करने वाले आशीष चाय पीते हुए कहते हैं, "ये भीड़ कुछ भी नहीं है, पिछले साल खड़े होने की भी जग़ह नहीं मिलती थी।" उनसे इसका कारण पूछने आशीष फट से जवाब देते हैं, "ये दिल्ली बिहारी लोगों से भरी है, तालाबन्दी के समय सभी बिहारी भाई अपने गाँव चले गए तो कौन बनाएगा छठ ?"

कोरोना के कारण बड़ी संख्या में लोग अपने घर लौट गये हैं। बाजार पर इसका भी असर पड़ा है।

मंडी में पिछले 30 साल से छठ के समय फल बेचने वाले राजकुमार दास बताते हैं कि सुबह से 500 रुपए की कमाई भी नहीं हुई। राजकुमार को खरीदे हुए सामान न बेच पाने का डर है। वे कहते हैं, "आस थी कि इस साल कमाई से कर्जा थोड़ा कम हो जायेगा पर अब लगता है कि कहीं सामान बर्बाद न जाये।" जमीन पर दुकान लगाकर बैठी हुए उनकी माँ आशा देवी कहती हैं, "छठ पर पूजा बंद है, यहाँ बाजार में भी बिलकुल एक ही हाल है। अगर छठ पूजा घाट पर होती तो दुकानदारी अच्छी होती। सुबह 3 बजे से परिवार के चार लोग ये दुकान चला रहे हैं पर खरीद न के बराबर हुई है। ये फल भी अब ख़राब होने लगे हैं न जाने कोई खरीदेगा भी या नहीं।"

यह भी पढ़ें- क्यों मनाया जाता है छठ पर्व, कैसे होती है पूजा ?

पूजा की सामग्री जैसे कपूर, पान, सबूत सुपारी, कुमकुम और चंदन बेचने वाले शंकर हलके स्वर में हंसते हुए कहते हैं, "दुकानदारी आप लोग देख ही सकते हैं, सब सूना है। एक तो इनका समान मुश्किल से 5 -10 रुपए का है जिस कारण लाभ कम होता है और इस बार इस महामारी के कारण वह भी शून्य हो गया।"

18 नवंबर से बिहार और उत्तर प्रदेश का प्रमुख त्योहार छठ शुरू हो चुका है। इस चार दिवसीय त्योहार का समापन 21 तारीख को सूर्य को अर्घ्य देकर किया जाएगा। छठ पर्व के पहले दिन नहाए - खाए की रीति का पालन किया जाता है। इस दिन लोग, सुबह नदी में स्नान करके भोजन ग्रहण करते हैं। पूजा के दूसरे दिन खरना या लोहंडा मनाया जाता है। इस दिन छठ पूजा करने वाला व्यक्ति पूरे दिन व्रत करता है और पूजा का मुख्य प्रसाद और गन्ने खीर बनाई जाती है। अगले दो दिन , भक्त सूर्यास्त और सूर्योदय को अर्घ्य देते हैं।

यह भी पढ़ें- आस्था और प्रकृति का संगम है छठ महापर्व

दिल्ली की मंडियों में पहले की अपेक्षा इस साल छठ पर कम भीड़ दिखी।

इस वर्ष, देश में कई राज्यों में छठ पूजा सार्वजनिक जगहों पर करने पर रोक लगा दिया है। यह प्रतिबंध कोरोना महामारी को बढ़ने से रोकने के लिए लगाया गया है। देश की राजधानी नई दिल्ली में भी कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए सार्वजनिक स्थानों पर पूजा करने पर पाबंदी है। दिल्ली में बिहार और उत्तर प्रदेश के प्रवासी बड़ी संख्या में मौजूद हैं। इस मुद्दे पर दिल्ली की भाजपा इकाई ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास के बाहर धरना प्रदर्शन भी किया। आने वाले दिनों में ये व्यापारी अपने सामान पूरी तरीके से बिकने की आशा करते हैं। दिल्ली सरकार ने 20 तारीख़ को छठ का अवकाश घोषित किया है। दिल्ली में कोरोना के मामले फिर से बढ़ने लगे हैं। जिस कारण प्रदेश सरकार फिर से लॉकडान लगाने पर विचार कर रही है।

Next Story

More Stories


© 2019 All rights reserved.