पशुओं की संख्या पर नियंत्रण के लिए दिल्ली सरकार बना सकती है कल्याण नीति

पशुओं की संख्या पर नियंत्रण के लिए दिल्ली सरकार बना सकती है कल्याण नीति

नई दिल्ली (भाषा)। पशुओं के कल्याण से जुड़े समूहों और पशु चिकित्सा विशेषज्ञों ने दिल्ली सरकार से जानवरों के कल्याण के लिये कुछ सिफारिशें की हैं। इनमें बंदरों के जन्म को नियंत्रित करना, आवारा कुत्तों की नसबंदी और जानवरों के पालकों की पहचान के लिये इलैक्ट्रोनिक चिप का इस्तेमाल करने जैसी सिफारिशें शामिल हैं।

उन्होंने 'एनिमल हेल्थ एंड वेलफेयर पॉलिसी 2018' पर विकास मंत्री गोपाल राय के साथ चर्चा के दौरान दक्षिण दिल्ली के घुमन्हेरा में गौशाला बनाने का भी प्रस्ताव रखा है, जहां एक अनूठे सह अस्तत्वि के तहत गायों को वृद्ध लोगों के साथ रखा जा सकेगा। बैठक के बाद गोपाल राय ने कहा, '' अभी तक बंदरों और आवारा कुत्तों से होने वाले नुकसान जैसे पूरी तरह दबे हुए मुद्दों और पशुओं के कल्याण को लेकर किसी भी नीति पर विचार नहीं किया गया था।"

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मंत्री ने कहा कि नीति में सुझाव दिया गया हैं कि पालतू जानवरों और गायों के इलैक्ट्रोनिक चिप से जोड़ने से उनके पालकों की पहचान की जा सकेगी और आगे कदम उठाए जा सकेंगे। नीति में पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) कार्यक्रम के तहत बंदरों के जन्म को नियंत्रित करने का भी सुझाव दिया गया है। इसमें माना गया है कि गैर सरकारी संगठनों द्वारा आवारा कुत्तों की नसबंदी के नतीजे उम्मीद के मुताबिक हासिल नहीं हुए हैं।

नीति के मसौदे के मुताबिक, इसके (नसबंदी कार्यक्रम के) दोष जानने के लिये आगे भी पुन : मूल्यांकन करने और इसे मजबूत बनाने के लिये जरूरी कदम उठाने की आवश्यकता है। नीति में ढांचागत सुधार के पशुओं के अस्पताल, पॉलीक्लीनिक, चिड़ियाघर बनाने, जानवरों और पक्षियों के लिये हेल्पलाइन नंबर और एंबुलेंस सेवाएं शुरू करने समेत कई सिफारिशें की गई हैं।

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नीति के मुताबिक सभी जिलों में 24 घंटे सातों दिन चलने वाले पॉलीक्लीनिकों के जरिए पशु स्वास्थ्य और चिकित्सा सेवाओं को मजबूती मिलेगी। इसके अलावा जिला स्तर के चिड़ियाघरों में पशुओं की जरूरतों का भी ख्याल रखा जाएगा। इसके अलावा 16 जनवरी को तीस हजार में चौबीसों घंटे चलने वाले एक पशु चिकित्सा अस्पताल का भी उद्घाटन किया जाएगा।

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