Top

शर्मनाक : खुदकुशी कर चुके महाराष्ट्र के किसानों के बच्चों को मॉल में जाने से रोका

Mithilesh DharMithilesh Dhar   21 July 2017 5:40 PM GMT

शर्मनाक : खुदकुशी कर चुके महाराष्ट्र के किसानों के बच्चों को मॉल में जाने से रोकाजंतर-मंतर पर अपने किसान पिता की अस्थियों के साथ आए बच्चे।

लखनऊ। आजादी के बाद से देश में अब तक लाखों किसान आत्महत्या कर चुके हैं। किसानों को कर्जमाफी के नाम पर झुनझुना थमा दिया जाता है। किसान और बदहाल ही होता जा रहा है। हमारी सरकारें वादे के अलावा कुछ नहीं कर रहीं।

किसानों के प्रति हमारी संवेदनाएं भी मरती जा रही हैं। मेट्रो शहरों में रहने वाले लोग किसान और उनके परिवार को हीन भावना से देखते हैं। किसान भले ही देश का पेट भरता हो लेकिन उसे वो होता गरीब ही है। इस गरीबी की सजा किसान ही नहीं, उसके परिवार वाले भी भुगतते हैं। किसान तो आत्महत्या करके अपनी इहलीला समाप्ता कर लेता है, लेकिन उसका परिवार सजा भुगतता रहता है। दिल्ली की घटना ताजा उदाहरण है।

दिल्ली के डीएलएफ साकेत मॉल में गुरुवार को महाराष्ट्र के मृत किसानों के बच्चों को मॉल में नहीं जाने दिया गया। मॉल के अधिकारियों ने बच्चों के अंदर घूमने पर रोक लगाई और कहा कि मॉल में जाने के लिए आपको विशेष अनुमति लेनी पड़ेगी।

ये भी पढ़ें-22 महीने में 850 किसानों ने की आत्महत्या, योगी आदित्यनाथ दें ध्यान: भारतीय किसान यूनियन

बुधवार को जंतर-मंतर पर हुए किसान मुक्ति संसद में महाराष्ट्र के किसान परिवारों के 40 अनाथ बच्चे अपनी पीड़ा और किसान परिवार की समस्या बताने आये थे। ये वे बच्चे हैं, जिनके अभिभावक खेती करने के लिए गए कर्ज तले दबकर आत्महत्या कर चुके हैं। ये बच्चे नासिक के चिल्ड्रेन होम में रहते हैं। स्वराज इंडिया नई दिल्ली के अध्यक्ष अनुपम ने बताया कि ये बच्चे दिल्ली घूमना चाहते थे, लेकिन इन्हें यहां निराशा ही हाथ लगी। जब बच्चे मॉल गए तो उनके साथ स्वराज इंडिया के वॉलंटियर्स भी थे। मॉल कर्मचारियों के व्यवहार का उन्होंने विरोध किया।

इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना से यह भी पता चलता है कि खुदकुशी कर चुके किसानों के छोटे बच्चों के प्रति संवेदना होना तो दूर, दिल्ली के मॉल वाले और शहरी आबादी वाले इन बच्चों की पीड़ा से भी अनजान हैं।

जंतर-मंतर में मृत किसान के बच्चों ने अपनी मांगें रखीं।

बाद में मॉल ने बयान जारी करते हुए कहा, "गुरुवार शाम, बच्चों और वयस्कों का एक समूह मॉल में घूमना चाह रहा था। वे बड़ी संख्या में थे। उनके कपड़े भी एक जैसे थे। हमारे सुरक्षा गार्ड ने इन्हें रोका और पूछा कि आप लोग अंदर किस काम से जाना चाहते हैं। बाद में मामला साफ हो जाने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने बच्चों को मॉल घुमाया और जलपान भी कराया। बच्चों ने स्वराज इंडिया के प्रदर्शन में अपनी पीड़ा का मंचन भी किया।

ये भी पढ़ें-50 बोरी आलू का मंडी में किसान को मिला एक रुपया, ‘पंजाब-हरियाणा में 70 आलू किसानों ने की आत्महत्या’

अंग्रेजी स्कूलों में पढ़ने वाले सैकड़ों बच्चे एक साथ मॉल घूमने जाते हैं, उन्हें तो कभी नहीं रोका जाता। आश्रम से आए बच्चे ब्रांडेड कपड़ों में तो नहीं आएंगे। ये व्यवहार बाताता है कि हम शहर में रहने वाले लोग किसान और उनके परिवारों से कितने दूर हैं।
अनुपम, अध्यक्ष, स्वराज इंडिया, नई दिल्ली

ये भी पढ़ें- कर्ज माफी के ऐलान के बाद भी आखिर क्यों जारी है किसानों की आत्महत्या का सिलसिला ?

ये भी पढ़ें-किसानों की उम्मीदों पर सरकार ने फेरा पानी, लागत से 50 फीसदी ज्यादा समर्थन मूल्य देने से इनकार

एक क्लिक में जानिए, क्या है स्वामीनाथ आयोग की रिपोर्ट

Next Story

More Stories


© 2019 All rights reserved.