एक साल की देर के बावजूद जेएनयू के जेंडर पैनल के चुनाव आगे बढ़ाए जाने के आसार 

एक साल की देर के बावजूद जेएनयू के जेंडर पैनल के चुनाव आगे बढ़ाए जाने के आसार जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय

नई दिल्ली (भाषा)। यौन उत्पीड़न की शिकायतों की जांच करने के लिए गठित, जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय के जेंडर पैनल के लिए चुनावों को परिसर में चल रही अशांति के चलते, एक साल के विलंब के बावजूद अगले अकादमिक सत्र तक आगे बढाए जाने की संभावना है। ‘जेंडर सेन्सिटाइजेशन कमेटी अगेन्स्ट सेक्सुअल हरासमेंट' (जीएससीएएसएच) के छात्र प्रतिनिधियों के पद के लिए हर साल अप्रैल में चुनाव कराया जाता है।

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पिछली बार राजद्रोह विवाद के चलते तीन छात्रों को गिरफ्तार किया गया था, जिसके कारण परिसर में कई विवाद हुए थे। इसकी वजह से चुनाव नहीं कराए जा सके थे। जेएनयूएसयू (जेएनयू छात्र संघ) के अध्यक्ष मोहित पांडेय ने बताया, ‘‘हम कुछ ही माह में जीएससीएएसएच के चुनाव कराने पर विचार कर रहे हैं क्योंकि यह अत्यंत महत्वपूर्ण निकाय है। लेकिन कुछेक मुद्दे लगातार बने हुए हैं। हम यह नहीं कह सकते कि चुनाव कब कराए जा सकते हैं। यह यूनियन की बैठक में तय करना होगा।'' मई में परीक्षाएं संपन्न होने के बाद वर्तमान अकादमिक सत्र समाप्त हो जाएगा। इसलिए चुनाव अगले सत्र में ही कराए जाने की संभावना है।

पूर्व में जीएससीएएसएच के चुनाव की तारीखें जेएनयूएसयू के चुनाव की तारीखों के साथ साथ पड़ती थीं। चूंकि जेंडर पैनल एक गैर राजनीतिक निकाय है अत: इसकी पवित्रता बनाए रखने के लिए, तीन साल पहले तय किया गया कि दोनों चुनाव अलग अलग कराए जाएं। इस पैनल के चुनाव संगठन या प्रत्याशी की राजनीतिक विचारधारा के आधार पर नहीं लड़े जाते और ज्यादातर प्रत्याशियों का समर्थन परिसर के ही संगठनों द्वारा किया जाता है।

एक स्वायत्त निकाय की तरह काम करने वाले जीएससीएएसएच का गठन वर्ष 1999 में किया गया था। इनके तीन मुख्य कार्य लैंगिक उत्पीड़न को लेकर संवेदनशीलता जाग्रत करना और ओरियंटेशन, संकट प्रबंधन तथा मध्यस्थता एवं औपचारिक जांच एवं निवारण हैं। दिल्ली में पिछले दो साल में जेएनयू को किसी अन्य शैक्षिक संस्थान की तुलना में यौन उत्पीड़न की सर्वाधिक शिकायतें मिलीं जिसके कारण पैनल की भूमिका अहम रही है।

मानकों के मुताबिक, छात्र संघ प्रशासन से संपर्क कर चुनाव कराने का प्रस्ताव रखेगा, जिसके बाद चुनाव के लिए एक तारीख तय की जाएगी। छात्र संघ चुनाव की तरह ही इस चुनाव की पूरी प्रक्रिया का प्रबंधन भी छात्र ही करेंगे।

हालिया महीनों में कुछ मुद्दों को लेकर छात्रों और जेएनयू प्रशासन के बीच टकराव होता रहा है। इन मुद्दों में पिछले साल नौ फरवरी को हुआ वह कार्यक्रम भी था, जिस दौरान कथित तौर पर भारत विरोधी नारे लगाए गए थे। इसके अलावा परिसर से एक छात्र के लापता होने, अनुशासन मानकों का कथित उल्लंघन करने के लिए कुछ छात्रों की डिग्री रोके जाने, विश्वविद्यालय के प्रशासनिक ब्लॉक में प्रदर्शनों पर प्रतिबंध तथा परिषद की बैठक में कथित व्यावधान डालने के आरोप में छात्रों के निलंबन के मुद्दे भी छात्रों और जेएनयू प्रशासन के बीच टकराव का कारण रहे।

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