कुछ वर्षों बाद सिर्फ रेलवे के म्यूजियम में ही नजर आएंगे डीजल इंजन, रेलवे ने बनाया नया प्लान 

कुछ वर्षों बाद सिर्फ रेलवे के म्यूजियम में ही नजर आएंगे डीजल इंजन, रेलवे ने बनाया नया प्लान डीजल रेल इंजन

लखनऊ। भारतीय रेलवे में एक बार फिर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब ट्रेन डीजल इंजन से पटरियों पर नहीं दौड़ेंगी। डीजल इंजन पर रेल मंत्रालय रोक लगा रहा है। डीजल इंजन कुछ सालों बाद सिर्फ रेलवे के म्यूजियम में ही नजर आएंगे।

डीजल इंजनों को बंद करने के लिए जो फैसला लिया गया है वह आर्थिक तौर पर बिल्कुल सही कदम है, लेकिन इलैक्ट्रिफिकेशन का काम भारतीय रेलवे में बड़े पैमाने पर कई स्थानों पर होना बाकी है। भारतीय रेल मंत्री की ओर से डीजल इंजनों को जल्द बंद करके रेल पटरियों पर बिजली से चलने वाले इंजनों को दौड़ाने के लिए एक साल का समय दिया गया था, लेकिन अधिकारियों द्वारा इतने कम समय में काम पूरा न किए जाने का हवाला देते हुए दो वर्ष और बढ़ा दिया गया है।

2021 तक रेलवे डीजल इंजन का परिचालन कर देगा बंद

अगले चार वर्षों में डीजल इंजन से चलने वाली ट्रेनें देश भर में इतिहास बन जाएंगी। 2021 तक रेलवे अपने पूरे नेटवर्क पर डीजल इंजन के परिचालन को पूरी तरह से बंद कर देगा। इसके लिए रेलवे ने एक प्लान तैयार किया है।

रेलवे को हर साल बचेंगे 10,500 करोड़ रुपये

रेलवे ने जो प्लान तैयार किया है उसके मुताबिक हर साल डीजल इंजन के न होने से 10 हजार 500 करोड़ रुपये की बचत होगी। रेलवे ने इसके लिए 35 हजार करोड़ का बजट बनाया है। रेलवे का अभी 66 हजार किलोमीटर का नेटवर्क है जिस पर डीजल इंजन से ट्रेन चलती है।

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एक किलोमीटर ट्रैक पर आएगी इतनी कॉस्ट

रेलवे को एक किलोमीटर का ट्रैक तैयार करने पर एक करोड़ रुपये से अधिक की लागत आएगी। अभी केवल आधे से ज्यादा रेलवे ट्रैक का विद्युतीकरण किया जा चुका है। अभी रेलवे का हर साल डीजल पर 26,500 करोड़ रुपये खर्च होता है। चार साल बाद इसमें 16 हजार करोड़ रुपये का खर्चा आएगा।

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विश्व की कई कंपनियों के साथ रेल मंत्री करेंगे बात

अपनी इस योजना को अमली जामा पहनाने के लिए रेलवे एक कॉन्फ्रेंस का आयोजन कर रही है, जिसको रेल मंत्री पीयूष गोयल भी संबोधित करेंगे। इस कॉन्फ्रेंस में विश्व की कंपनियां भाग लेंगी।

बिजलीघरों से डायरेक्ट लेगी बिजली

इसके अलावा रेलवे अपने बिजली के बिल में कटौती करने के लिए सीधे बिजलीघरों से बिजली खरीदेगी। अभी रेलवे पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों से बिजली खरीदती है। इससे रेलवे को सालाना 2500 करोड़ की बचत होगी। हर साल रेलवे 15.6 बिलियन यूनिट का उपयोग करता है, जिसका खर्चा 9500 करोड़ रुपये बैठता है। इसके अलावा डीजल पर 17 हजार करोड़ का खर्च आता है।

रेलवे के पास है 4400 इलेक्ट्रानिक इंजन

रेलवे के पास वर्तमान में 4400 बिजली के इंजन हैं और अपनी योजना को अमली जामा पहनाने के लिए 600 इंजन की और आवश्यकता पड़ेगी। अभी रेलवे प्रतिवर्ष केवल 250 इंजन तैयार करता है।

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