नवजात शिशुओं के टीकाकरण पहल को धर्मगुरुओं का मिला समर्थन,  धार्मिक कार्यक्रमों में करेंंगे प्रचार

नवजात शिशुओं के टीकाकरण पहल को धर्मगुरुओं का मिला समर्थन,  धार्मिक कार्यक्रमों में करेंंगे प्रचारमातृ-शिशु। 

सांची (मप्र, भाषा)। सरकार द्वारा चलाई जा रही शिशु मृत्यु दर को घटाने एवं मातृ स्वास्थ्य देखभाल की पहल को आज सांची में विभिन्न धर्मगुरुओं ने अपना समर्थन प्रदान किया। एक विज्ञप्ति के अनुसार नवजात शिशु और मातृ स्वास्थ्य देखभाल तथा स्वास्थ्य व पोषित पीढ़ी के लिए टीकाकरण के महत्व पर सांची में आयोजित एक संवाद कार्यक्रम के बाद विभिन्न धर्मगुरुओं ने शिशु मृत्यु दर को घटाने की पहल को अपना समर्थन दिया।

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भोपाल के गैर सरकारी संगठन ‘स्पंदन' ने यूनिसेफ मध्यप्रदेश के सहयोग से ‘नवजात शिशु देखभाल और टीकाकरण' पर धर्मगुरुओं के इस संवाद का आयोजन किया था। संवाद में लगभग 50 धर्मगुरु शामिल हुए। इसमें कहा गया है कि हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध और जैन जैसे प्रमुख धर्मों और पंथों का प्रतिनिधित्व करने वाले गुरुओं ने सहमति व्यक्त की है। शिशु एवं मातृ मृत्यु दर को रोकने के लिए उनके स्वास्थ्य की देखभाल और पूर्ण टीकाकरण पर उन्होंने जोर दिया। साथ ही सहमति व्यक्त की कि उनके समुदायों में स्वास्थ्य के प्रति यह संदेश देने के लिए धार्मिक आस्था मंचों का सहयोग लिया जा सकता है। संवाद के निष्कर्ष में उन्होंने इस पहल में सरकार और कार्य कर रहे विभिन्न संगठनों को अपना अधिकतम सहयोग प्रदान करने के संकल्प पर हस्ताक्षर किए।

इससे पूर्व प्रमुख सचिव स्वास्थ्य गौरी सिंह ने नवजात शिशु और मातृ स्वास्थ्य का वर्तमान परिदृश्य रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग सभी सुविधाएं और सेवाएं प्रदान कर रहा है, लेकिन समुदाय से जुड़ाव नहीं है। उन्होंने कहा कि धर्मगुरुओं के अनुयायी बड़ी संख्या में हैं और लोग उनकी बातों को महत्व देते हैं, इसलिए इस पहल में सहयोग करने के लिए धर्मगुरुओं को आगे आना चाहिए। पूर्व प्रमुख सचिव ने कहा कि इसके लिए बच्चे के जन्म के पहले घंटे के अंदर बाद स्तनपान करवाने और बच्चे की छह माह की उम्र तक केवल स्तनपान करवाने समेत दो वर्ष की उम्र तक टीकाकरण के सभी चक्रों को पूर्ण करने चाहिए। साथ ही समय से पूर्व जन्म लेने वाले व कम वजन के बच्चों तथा कुपोषित बच्चों की विशेष देखभाल के संदेश का प्रचार करना चाहिए।

मध्य प्रदेश में एक लाख से ज्यादा बच्चे नहीं मना पाते अपना पांचवा जन्मदिन

यूनिसेफ के प्रभारी अधिकारी मनीष माथुर ने कहा कि मध्यप्रदेश में 1,16,820 बच्चों की अपना पांचवां जन्मदिन मनाने के पहले ही मृत्यु हो जाती है। जबकि इनमें से 64,063 बच्चों की मृत्यु जन्म के एक माह के अंदर हो जाती है। यूनिसेफ के स्वास्थ्य अधिकारी मितल संकेत शाह ने जिज्ञासाओं का समाधान किया तथा नवजात की शीघ्र देखभाल के महत्व को बताया। स्पंदन के अनिल सौमित्र ने संवाद के उद्देश्यों की जानकारी दी। संचार विशेषज्ञ यूनिसेफ अनिल गुलाटी ने बच्चों के लिए धर्मगुरुओं के एक मंच निर्माण की संभावनाओं पर चर्चा की।

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