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लॉकडाउन में बढ़े घरेलू हिंसा के मामले, वहीं बजट के अभाव में बंद पड़ी यूपी महिला हेल्पलाइन 181

"लॉक डाउन में ऑनलाइन माध्यम से हमें जितनी भी शिकायतें मिली हैं उसमें सबसे ज्यादा घरेलू हिंसा के मामले यूपी, दिल्ली और पंजाब से हैं। ऐसे में यूपी में महिला हेल्पलाइन 181 की बहुत जरूरत है। हम संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं कि यहाँ के कार्यकर्ताओं को संसाधन उपलब्ध कराए जाएं ताकि ऐसे समय में घरेलू हिंसा के मामलों पर कण्ट्रोल किया जा सके।"

Neetu SinghNeetu Singh   3 April 2020 3:46 PM GMT

लॉकडाउन में बढ़े घरेलू हिंसा के मामले, वहीं बजट के अभाव में बंद पड़ी यूपी महिला हेल्पलाइन 181

कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए जहाँ लोग घरों में कैद हैं वहीं इसका शिकार महिलाएं हो रही हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग के अनुसार लॉकडाउन के दौरान घरेलू हिंसा के मामले बढ़े हैं।

"लॉक डाउन के समय देश में घरेलू हिंसा के मामलों में दोगुने से भी ज्यादा की बढ़ोत्तरी हुई है।"

ये बात राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने गाँव कनेक्शन को फोन पर बताई।

राष्ट्रीय महिला आयोग के अनुसार लॉक डाउन के दौरान देशभर से घरेलू हिंसा की शिकायते ऑनलाइन आ रही हैं जो पहले की तुलना में ज्यादा हैं। देश भर से दो मार्च से आठ मार्च तक 116 मामले आये थे वहीं लॉकडाउन के दौरान 23 मार्च से 31 मार्च तक 257 घरेलू हिंसा के मामले ई-मेल के द्वारा मिलें। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा के अनुसार 24 मार्च से एक अप्रैल तक 69 मामले मिले, जो कि लॉक डाउन में दिन प्रतिदिन बढ़ रहे हैं। इस हिसाब से रोजाना एक या दो मामले आ रहे हैं। लॉक डाउन के दौरान महिलाएं घर बैठे घरेलू हिंसा के मामले सोशल मीडिया, ई-मेल, ऑनलाइन शिकायत के माध्यम से दर्ज करा सकती हैं।

"लॉक डाउन के दौरान हमें जितनी भी शिकायते मिल रही हैं हम सम्बन्धित जगह के अधिकारियों से सम्पर्क करके उनकी मदद कर रहे हैं," रेखा शर्मा ने बताया।


भारत के 21 दिन लॉकडाउन में घरेलू हिंसा के सबसे ज्यादा मामले यूपी, दिल्ली और पंजाब से मिले हैं। इस दौरान यूपी के 90 मामले आये हैं ऐसे में उत्तर प्रदेश की महिला हेल्पलाइन 181 केवल इसलिए बंद पड़ी है क्योंकि बजट के अभाव में यहाँ के कार्यकर्ताओं को ऑफिस आने-जाने के लिए विभाग की तरफ से कोई यातायात का संसाधन नहीं मुहैया कराया गया।

कोरोना वायरस के संक्रमण के दौरान सरकार ने तमाम रणनीतियां बनाई पर महिला हेल्पलाइन 181 कैसे चलेगी, महिलाओं के साथ अगर इस दौरान हिंसा होगी तो वो मदद के लिए कहां जायेंगी? इस तरफ किसी का ध्यान नहीं गया।
दूसरे राज्यों में भी महिला हेल्पलाइन की स्थिति ठीक नहीं है।

राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य चन्द्रमुखी देवी ने फोन पर बताया, "उत्तर प्रदेश महिला हेल्पलाइन में काम करने वाले कार्यकर्ताओं को पिछले आठ नौ महीने से सैलरी नहीं मिल रही थी ये मेरे संज्ञान में था, इस वजह से कई महीने से काम प्रभावित था। लेकिन अभी भी नहीं मिली ये मुझे आपसे पता चला। हम मुख्यमंत्री जी के संज्ञान में ये मामला पहुंचाते हैं।"

उन्होंने आगे बताया, "लॉक डाउन में ऑनलाइन माध्यम से हमें जितनी भी शिकायतें मिली हैं उसमें सबसे ज्यादा घरेलू हिंसा के मामले यूपी, दिल्ली और पंजाब से मिले हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश में महिला हेल्पलाइन 181 की बहुत जरूरत है। हम संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं कि यहाँ के कार्यकर्ताओं को संसाधन उपलब्ध कराए जाएं ताकि ऐसे समय में घरेलू हिंसा के मामलों पर कण्ट्रोल किया जा सके।"

महिला हेल्पलाइन 181 का ये है ऑफिस, जहाँ 90 टेली काउंसलर काम करती हैं.

रांची की चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोटेक्शन ऑफीसर पम्मी सिन्हा ने बताया, "अभी तक हमारे पास एक केस ही घरेलू हिंसा का आया है। हम कोशिश कर रहे हैं कि लॉक डाउन में उसे कैसे हैंडिल करें?"

महिलाओं को निशुल्क कानूनी सलाह प्रदान करने वाली एक गैर सरकारी संस्था आली जो उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड में काम कर रही हैं। आली संस्था की रेशमा सिंह जो झारखंड में काम करती हैं वो बताती हैं, "इस समय पूरा प्रसाशन कोरोना के मरीजों की तरफ ही ध्यान दे रहा है। महिलाओं के हिंसा के मामलों पर कोई गम्भीरता नहीं दिखाई जा रही है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि समय महिलाओं पर घर के काम की जिम्मेदारी पहले से ज्यादा बढ़ गयी है क्योंकि पूरा परिवार घर पर है जिसकी वजह से हिंसा भी बढ़ी है। महिला हेल्पलाइन रांची में पहले से ही ठीक से काम नहीं करती है, अभी हमारे इस दौरान तीन मामले आये जिनको हमने फोन से ही समझाया।"

वो आगे कहती हैं, "सम्बन्धित थाने इस समय घरेलू हिंसा के मामलों में बिलकुल ध्यान नहीं दे रहा क्योंकि उनकी प्राथमिकता अभी केवल कोरोना के मरीज ही हैं। आली ने यूपी, बिहार और झारखंड की महिलाओं के साथ इस लॉक डाउन के दौरान एक अधयन्न किया है जिसमें 23 फीसदी महिलाओं ने घरेलू हिंसा को स्वीकार किया है।"

लॉक डाउन के बाद से यूपी में महिला हेल्पलाइन 181 पूरी तरह से बंद है और यहाँ के कार्यकर्ताओं को अभी तक मानदेय नहीं मिला है इस सन्दर्भ में गाँव कनेक्शन ने उत्तर प्रदेश महिला कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव वीना मीना से भी बात करने की कोशिश की पर उनका भी फोन नहीं उठा। व्हाट्स एप के माध्यम से उन्हें मैसेज किया है बात होते ही खबर में अपडेट कर दिया जाएगा।

उत्तर प्रदेश में महिला कॉल सेंटर 181 और वन स्टॉप सेंटर का काम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देशभर में अपराधों को दर्ज करने वाली संस्था एनसीआरबी की वर्ष 2017 की रिपोर्ट के अनुसार देश भर में महिलाओं पर होने वाले अपराधों में उत्तर प्रदेश पहले नंबर पर है। हाल ही में जारी रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2017 में देशभर में 3.59 लाख मामले महिलाओं पर हिंसा के दर्ज़ हुए, जिनमें से 56,011 मामलों के साथ यूपी पहले नंबर पर था।

पहले सुदूर गाँव में घर बैठे महिलाओं की एक ही फोन काल से मदद मिल जाती थी.

घर बैठे एक फोन कॉल पर महिलाओं तक मदद पहुंचाने वाली उत्तर प्रदेश सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना महिला हेल्पलाइन 181 पिछले कई महीने से सरकारी उपेक्षा और फंड की कमी से शिथिल पड़ी हुई है। लेकिन लॉक डाउन के बाद से ये हेल्पलाइन पूरी तरह से बंद है। यहाँ काम करने वाले 390 कार्यकर्ताओं को आठ महीने से मानदेय नहीं मिला है जिससे अब इनकी मुश्किलें और भी बढ़ गयी हैं।

"भले ही हमें आठ महीने से मानदेय नहीं मिला है फिर भी हम ऑफिस लगातार ऑटो से आते थे लेकिन जबसे ये लॉकडाउन हुआ है मजबूरी है हमारी, लॉक डाउन के बाद से हम ऑफिस नहीं गये हैं। अगर हमें ऑफिस से गाड़ी मिल जाती तो हम जरुर जाते।" महिला हेल्पलाइन 181 में काम करने वाली एक टेली काउंसलर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया।

ये हेल्पलाइन बंद है इसकी सूचना महिला हेल्पलाइन 181 के प्रोजेक्ट हेड आशीष वर्मा के द्वारा व्हाट्सएप के माध्यम से 26 मार्च को प्राप्त हुई। उनका स्वास्थ्य खराब होने की वजह से उनसे फोन पर बात नहीं हो पायी।

"हेल्पलाइन बंद नहीं है, चल रही है," उत्तर प्रदेश महिला एवं बाल विकास कल्याण के निदेशक मनोज राय ने बताया। जब रिपोर्टर ने उनसे दोपहर के करीब ढाई बजे फोन करके पूछा कि हमने खुद कई बार 181 पर कॉल की है पर कॉल रिसीव नहीं हुई इसके जबाब में उन्होंने कहा, "लॉक डाउन का समय चल रहा है हो सकता है साधन न मिला हो इसलिए अभी कोई न पहुंचा हो।"

इस हेल्पलाइन सेंटर में काम करने वाली कई कार्यकर्ताओं और टीम लीडर से बात की तो उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि लॉकडाउन के बाद से ये हेल्पलाइन पूरी तरह से बंद है। जिसकी मुख्य वजह स्टाफ को विभाग की तरफ से यातायात का कोई साधन उपलब्ध नहीं कराना है।

पहले इन्हें आने-जाने के लिए विभाग की तरफ से गाड़ी मिलती थी लेकिन पिछले दो तीन महीने पहले वो भी बंद कर दी गयी। तबसे यहाँ के कार्यकर्ता सुबह, दोपहर, रात तीनों शिफ्ट में अपने साधनों से या लोकल यातायात से ऑफिस आ रहे थे।

"अपने घर से रोजाना 24 किलोमीटर साइकिल से आते थे और 24 किलोमीटर जाते थे। लेकिन जबसे ये लॉक डाउन हुआ तबसे घर से नहीं निकल पायी। मैं छह महीने की गर्भवती हूं, पैसे न मिलने से बहुत दिक्कत में हूँ। राशन ही मिल जाता, ऐसे समय में इतनी मुश्किल से तो दिन न कटते," यहाँ काम करने वाली एक महिला ने अपनी आपबीती बताई।



घरेलू हिंसा से पीड़ित सुदूर क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं की घर बैठे नि:शुल्क मदद हो सके इस मंशा से महिला हेल्पलाइन 181 की शुरुआत आठ मार्च 2016 में की गयी थी। इस हेल्पलाइन के जरिए उत्तर प्रदेश में अबतक पांच लाख से ज्यादा पीड़ित महिलाओं की मदद हो चुकी है। फंड न मिलने की वजह से अब ये हेल्पलाइन पूरी तरह से बंद हो गयी है।

जबकि प्रदेश में निर्भया फंड का 119 करोड़ रुपए का बजट है जिसमें अभी तक मात्र तीन करोड़ 93 लाख रूपये ही खर्च हुए हैं इसके बावजूद महिला सुरक्षा की महत्वपूर्ण योजनाएं बंद होने के कगार पर हैं।

"कोरोना की वजह से जबसे लोग घरों में ज्यादा रह रहे थे तबसे घरेलू हिंसा की फोन काल्स पहले से कुछ ज्यादा आ रही थीं। महिलाएं कह रही थीं अब पुरुष पूरे दिन घर में खाली पड़े रहते हैं, पैसे की दिक्कत है तभी वो मारपीट और गालीगलौज ज्यादा करते हैं। लेकिन जबसे 21 दिन का लॉक डाउन हुआ तबसे हम ऑफिस नहीं जा पाए," एक टीम लीडर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया।

प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने 23 मार्च को रात आठ बजे जनता को संबोधित करते हुए कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए रात 12 बजे 21दिन लॉक डाउन की घोषणा कर दी थी। राज्य सरकारों को आदेश दिया गया था कि इस समय किसी का भी वेतन न रोका जाए और नौकरी से भी न निकाला जाए।

मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी द्वारा 30 मार्च को ये लेटर जारी किया गया.

वहीं 30 मार्च को मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी ने सभी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव को एक लेटर जारी किया जिसमें लिखा था कि सभी कर्मचारियों का मार्च महीने का वेतन अप्रैल के पहले सप्ताह में मिल जाना चाहिए।

"सरकार इस समय हर किसी की मदद के लिए आगे आ रही है पर हम लोगों की कोई सुनवाई नहीं। उम्मीद थी कि मार्च में पैसा मिल जाएगा लेकिन अब अधिकारी कह रहे हैं अप्रैल के बाद मिलेगा। लॉक डाउन के बाद से अपने अधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री तक मेल कर चुके हैं कि हम लोग बहुत समस्या में हैं, हमें वेतन दिया जाए पर कोई ध्यान नहीं दे रहा," एक कार्यकर्ता ने अपनी मुश्किल बताई।

कोरोना माहमारी में सरकार की तमाम घोषणाओं के बावजूद यहाँ काम करने वाले कर्मचारी इस समय राशन के लिए परेशान हैं। अब ये लोग वेतन की बजाए अपने अधिकारी से राशन की ही गुहार लगा रहे हैं।

"अब तो हम राशन तक के लिए परेशान हैं। हमने अपने सीनियर से निवेदन किया था पैसा नहीं कमसेकम ऐसे समय में राशन ही थोड़ा बहुत दिला दें, हम 20 लोगों ने अपने नाम पता लिखकर दिए थे पर वहां से कोई जवाब नहीं मिला। जबसे लॉक डाउन हुआ है तबसे पूछिए मत कैसे गुजारा हो रहा है? दूसरों की मदद करते-करते अब हम खुद मानसिक रूप से प्रताड़ित हैं पर क्या करें? किससे कहें? मीडिया के सामने कुछ बोल दो तो नौकरी से निकालने की धमकी मिलती है," आठ महीने से वेतन न मिलने वाली एक कार्यकर्ता ने अपनी तकलीफ बताई।

ये महिला हेल्पलाइन पूरे प्रदेश के लिए है। इसका हेड ऑफिस लखनऊ में है जिसमें 90 टेली काउंसलर काम करती हैं। हर जिले में फील्ड काउंसलर और 181 की रेस्क्यू वैन है जिससे जिले की टीम महिलाओं के घर तक पहुंचकर मदद करती थी। पैसे के अभाव में 181 की रेस्क्यू वैन लगभग एक साल से खड़ी है। फील्ड कार्यकर्ता गाड़ी के अभाव में सुदूर गाँव में रहने वाली महिलाओं तक नहीं पहुंच पा रही हैं।

विभाग की तरफ से फंड रिलीज न होने की वजह से लगभग एक साल से 181 पर आने वाली काल्स के जरिये जितने मामले फोन द्वारा सुलझाए जा सकते थे वो सुलझाए जा रहे थे लॉकडाउन के बाद से वो भी बंद हो गये। यहाँ काम करने वाली ज्यादातर महिलाएं एकल या तलाकशुदा हैं, कुछ किराये के घरों में रहती हैं जिनके लिए अब ये मुश्किल घड़ी है।

"मैं किराए के मकान में रहती हूँ। मकान मालिक बहुत समय से घर खाली कराने के लिए कह रहे हैं। हमने मार्च में उन्हें आश्वासन दिया था लेकिन अब अधिकारी कह रहे हैं लॉक डाउन की वजह से तुम लोगों का वेतन अप्रैल के बाद मिलेगा।हम तो तलाकशुदा हैं हमारी जितनी सेविंग्स थी वो बहुत पहले खत्म हो गयी थी। उधार लेकर काम चला रहे थे, ऐसे में कौन उधार देगा," एक महिला ने बताया।

घट रहा कॉल्स का ग्राफ

इस हेल्पलाइन में मार्च 2016 से मार्च 2017 जब 11 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट था तब कुल 13,30,139 फोन कॉल्स आयीं थीं, अप्रैल 2017 से मार्च 2018 तक 17,93402 कॉल्स, अप्रैल 2018 से मार्च 2019 तक 21,56173 कॉल्स वहीं अप्रैल 2019 से अगस्त 2019 तक मात्र 8,15,359 ही कॉल्स आयीं।

इस योजना के संचालन की जिम्मेदारी निजी क्षेत्र की कम्पनी 'जीवीके एमआरआई' को पांच वर्षों के लिए दी गयी थी। विभाग की तरफ से फरवरी 2019 से इस कम्पनी का भुगतान रोक दिया गया था। कम्पनी ने कर्मचारियों को जून महीने तक का वेतन खुद से दिया जिससे ये योजना ठप्प न हो, लेकिन फिर भी बजट पास नहीं हुआ।

'जीवीके एमआरआई' के एचआर हेड आशीष शर्मा से भी गाँव कनेक्शन ने बात करने की कोशिश की पर उनका फोन नहीं उठा।


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