'सुबह करीब 3 बजे सुनाई दी थी जेट एरोप्लेन्स की आवाज़, लगा जैसे भूकंप आया हो'

जम्मू और कश्मीर एवं राजस्थान के बॉर्डर से सटे गाँवों में सर्जिकल स्ट्राइक के समय क्या महसूस हुआ जानने के लिए गाँव कनेक्शन ने वहां बात की। जानिए लोगों ने क्या बताया...

Pragya BhartiPragya Bharti   26 Feb 2019 9:24 AM GMT

लखनऊ।

"दक्षिण कश्मीर में सुबह 3:30 बजे करीब जेट एरोप्लेन्स की आवाज़ें सुनाई दी थीं। बमों की आवाज़ तो नहीं आई लेकिन लग रहा था कि घर के बिल्कुल ऊपर से एरोप्लेन्स जा रहे हैं। ऐसा लगा था जैसे भूकंप आया हो।," - नाम न बताते हुए पुलवामा जिले के एक शख्स बताते हैं।

सर्जिकल स्ट्राइक के समय बॉर्डर के पास वाले इलाकों में लोगों को भूकंप जैसा महसूस हुआ, बमों की आवाज़ तो नहीं आई लेकिन ऐसा लगा जैसे एरोप्लेन सर के ऊपर उड़ रहे हैं। गांव कनेक्शन ने बॉर्डर इलाकों के कुछ लोगों से बात की और जानना चाहा कि इस सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में उनका क्या कहना है। बातचीत में सामने आया कि कश्मीर में डर और तनाव का माहौल है तो वहीं राजस्थान के गांव में खुशियां मनाई जा रही हैं; लोग मिठाई बांट रहे हैं, पटाखे फोड़ रहे हैं।

भारतीय वायु सेना ने 26 फरवरी 2019 की सुबह पाकिस्तान आधिकृत कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक की। विदेश सचिव विजय गोखले ने सुबह 11:30 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस हमले की पुष्टि की और कहा कि हमला आतंकवादियों पर था। उन्होंने कहा कि सिर्फ जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों को निशाना बनाया गया है।

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जम्मू और कश्मीर की राजधानी श्रीनगर से 12 किमी दूर पुलवामा जिले के ये शख्स बताते कि पाकिस्तान आर्मी ने जो ट्वीट्स किए थे उन्हीं से वहां के लोगों को पता चला कि सर्जिकल स्ट्राइक हुई है; कहते हैं, "पिछली बार लोगों ने नहीं माना था कि सर्जिकल स्ट्राइक हुई लेकिन इस बार लोग कह रहे हैं कि स्ट्राइक हुई है।"

"लोग नहीं चाहते हैं कि लड़ाई हो, जंग की तरफ नहीं बढ़ना चाहिए। कश्मीर मसले को बातचीत से खत्म करना चाहिए। जंग से केवल कश्मीर और यहां के लोगों को नुकसान होगा, हम शांति से रहना चाहते हैं,"- वो आगे कहते हैं।

इस व्यक्ति के साथ गाँव कनेक्शन की बातचीत आप यहां सुन सकते हैं-


पुलवामा जिले में 14 फरवरी को एक आत्मघाती हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हुए थे। इस हमले के बाद से ही घाटी में तनाव का माहौल है, पूरे देश में गुस्सा है। 14 फरवरी को यह हमला तब हुआ था जब सीआरपीएफ जवानों की एक बड़ी टुकड़ी विस्फोटकों और हथियारों के साथ जा रही थी। सेना की इस टुकड़ी में 40 से अधिक बसें थीं, जिसमें 2500 से ज़्यादा जवान सवार थे। इनमें से अधिकतर जवान छुट्टियां बिता कर वापस नौकरी पर लौट रहे थे। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने इस आत्मघाती हमले की ज़िम्मेदारी ली। हमलावर ने बस को टक्कर मारकर विस्फोट किया। इस आत्मघाती विस्फोट में फिदायीन हमलावर आदिल अहमद डार शामिल है।

पुलवामा जिले में एक लोकल न्यूज़ वेबसाइट में पत्रकार मुदासिर बताते हैं-

"पिछले 30 सालों से कश्मीर के हालत गंभीर है। यहां के लोग खून-खराबा नहीं चाहते हैं, यहां के लोग जो हैं वो अमन और शांति चाहते हैं। वो चाहते हैं कि बातचीत हो, कश्मीर समस्या का हल हो, चाहे वो भारतीय संविधान के अंतर्गत हो या उसके बाहर हो लेकिन इसका हल निकल जाए। भारत और पाकिस्तान बात करें या यहां के लोगों से बात करें लेकिन यहां की जो आम आवाम है वो इस खून-खराबे से निजाद चाहते हैं।"

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मुदासिर इंडिया न्यूज़ के साथ भी काम कर चुके हैं। वो बताते हैं कि कश्मीर का माहौल तनावपूर्ण है। आज सर्जिकल स्ट्राइक हुई है लोगों में डर है कि पाकिस्तान इसके जवाब में कुछ करेगा, यहां के लोग डर में रहते हैं जब भी कुछ हमला होता है तो तनाव होता है। वो नहीं चाहते हैं कि भारत और पाकिस्तान में लड़ाई हो क्योंकि वो आम लोगों को असर करता है, वो सामान्य जीवन जीना चाहते हैं।

मुदासिर कहते हैं, "कोई भी अपना घर छोड़कर नहीं जाना चाहता, लड़ाई के कारण लोगों को घर छोड़ना पड़ता है। आप भी दो दिन बाहर रहोगे तो उसके बाद घर जाना चाहोगे, अपना घर सबको प्यारा होता है। कोई नहीं चाहता कि वो घर छोड़कर दूसरी जगह बसें, सब चाहते हैं कि अमन से रहें।"

मुदासिर के साथ गाँव कनेक्शन की बातचीत आप यहां सुन सकते हैं-

राजस्थान राज्य के बॉर्डर पर स्थित गाँवों में भी सर्जिकल स्ट्राइक का असर देखने को मिला। बॉर्डर से लगभग 10 किमी दूर जैसलमेर जिले की फतेहगढ़ तहसील में रहने वाले रंजीत सिंह कहते हैं, "यहां कोई डर का महौल नहीं है। हम सबमें जोश है, जज्बा है। हम सब भारतीय सेना के साथ हैं। हम चाहते हैं कि आतंकवाद के सभी अड्डे खत्म हों।"

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"लोग सामान्य जीवन जी रहे हैं। बुज़ुर्ग जो 71 की लड़ाई में थे वो चाहते हैं कि उनके अनुभव को भी इस्तेमाल किया जाए, बिल्कुल जोश और जज्बा है। किसी भी तरह का डर नहीं है।"

रंजीत सिंह के साथ गाँव कनेक्शन की बातचीत आप यहां सुन सकते हैं-


जैसलमेर से ही कुछ 150 किमी दूर बाड़मेर जिला है। यहां रहने वाले पर्यावरणविद नरपत सिंह बताते हैं कि वहां लोगों में खुशिया हैं। वो कहते हैं-

"यहां मिठाइयां बांटी जा रही है, ढोल बजाए जा रहे हैं, लोग पटाखे फोड़ रहे हैं। पुलवामा हमले के बाद लोगों में आग की तरह गुस्सा फैल गया था। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने जो बयान दिया उसके बाद यहां पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगे थे, लोगों ने प्रदर्शन किया था। मोमबत्ती जलाकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई थी। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद यहां सब लोग खुश हैं।"

नरपत सिंह पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए देश में जगह-जगह घूमते हैं। फिलहाल भी वह एक ऐसी ही यात्रा पर निकले हुए हैं। वो कहते हैं कि उनके गाँव में बहुत खुशी का माहौल है।

पुलवामा जिले में 14 फरवरी को हुए आतंकी हमले के बाद से वहां के हालात नाज़ुक बने हुए हैं। पुलवामा टाउन में रहने वाले आकाश बताते हैं कि वहां लोगों को बहुत मुश्कलात (मुश्किलों) का सामना करना पड़ रहा है। वहां पर एलपीजी उपलब्ध नहीं है, पैट्रोल नहीं है। इस कारण आम लोगों में आपस में लड़ाई हो रही है। वो कहते हैं-

"हालत बहुत खराब हैं यहां पर। ट्रांसपोर्ट बंद हो गया है। स्कूल और दुकानें बंद हैं। सब्ज़ियां और राशन की चीज़ें भी नहीं मिल रही हैं। पिछले कुछ दिनों में दुश्वारियां बहुत बढ़ गई हैं।"

इन्हें खबरों और सोशल मीडिया के ज़रिए ही पता चला कि भारत की तरफ से सर्जिकल स्ट्राइक हुई है। जिसके बाद से कश्मीर में हालत नाज़ुक बने हुए हैं। आकाश कहते हैं, "हम नहीं चाहते हैं कि लड़ाई हो, दोनों ओर नुकसान होता है।"

बकौल आकाश सब लोग घर पर बंद रहने को मजबूर हैं। रात के 8 बजे के बाद वो बाहर नहीं निकल सकते। वो कहते हैं, "फौजी आते हैं और हमें उठा कर ले जाते हैं। हमारे मोहल्ले के ही पड़ोस में एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया है।"

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27 फरवरी 2019 की सुबह भारत और पाकिस्तान ने दावा किया कि उन्होंने एक-दूसरे के विमान मार गिराए। समाचार एजेन्सी एएनआई के मुताबिक नौशेरा सेक्टर में भारत ने पाकिस्तान वायु सेना का एक विमान एफ-16 मार गिराया गया। पाकिस्तान सीमा के लाम वैली में 3 किमी भीतर ही भारतीय सेना की गोलीबारी में ये विमान ध्वस्त हो गया। वहीं भारत का भी एक मिग विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

इसके बाद पाकिस्तान ने दावा किया था कि भारत के दो वायु सैनिक उनके कब्ज़े में हैं। बाद में पाकिस्तान सरकार ने कहा है कि भारतीय वायुसेना का सिर्फ एक जवान अभिनन्दन उनके कब्जे में है। भारत सरकार ने भी यह स्वीकार कर लिया। विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान की निंदा की और कहा कि जिनेवा समझौते के उलट उनके सैनिक को पाकिस्तान में पीटा गया। मंत्रालय ने कहा कि वह सैनिक को वापस लाने के लिए जरूरी कार्रवाई कर रहे हैं।

इससे एक दिन पहले भारत की तरफ से हुई सर्जिकल स्ट्राइक और उसके बाद से पाकिस्तान की ओर से हो रही सीज़ फायर के कारण जम्मू को बॉर्डर इलाकों में दहशत का माहौल है। जम्मू जिले के वॉर्ड 62 के पार्षद सुभाष बताते हैं कि वहां हालत फिलहाल तो ठीक हैं लेकिन लोगों में थोड़ी दहशत है। वो कहते हैं-

"हम बॉर्डर के पास रहते हैं। जब भी लड़ाई होती है तो जम्मू का जो बॉर्डर है उसके पास रहने वाले लोगों को बहुत नुकसान होता है। गाँव के गाँव खाली करने पड़ते हैं। साल में दो-चार बार बॉर्डर के गाँवों में रहने वालों को घर छोड़कर जाना पड़ता है। जब भी सीज़ फायर का उल्लंघन होता है तो उन्हें अपना घर खाली करना पड़ता है। उन्हें ही सबसे ज़्यादा नुकसान होता है। गरीब लोग हैं, ट्रेक्टर में सामान शिफ्ट करते हैं, सामान भी टूट जाता है। सरकार उन्हें उतनी सुविधाएं नहीं देती जितनी श्रीनगर वालों को। जो लोग कश्मीर बॉर्डर से विस्थापित होकर आते हैं सरकार उन्हें हर महीने 13 हज़ार रुपए और राशन देती है लेकिन जम्मू बॉर्डर से विस्थापित होने वाले लोगों को कुछ नहीं मिलता।"

सुभाष ये भी बताते हैं कि नौशेरा, अखनूर और पीओके के पास के गाँवों को खाली कराया गया है।

पुलवामा से पांच किमी दूर अवन्तिपुर एयरपोर्ट के नज़दीक एक गाँव में रहने वाले राजा परवेज बताते हैं कि उरी की तरफ बॉर्डर इलाकों एक न्यूज़ एजेंसी कश्मीर क्राउन गई थी। वहां पर लोगों का कहना है कि वो अमन चाहते हैं या तो एक ही बार जंग होना चाहिए क्योंकि पिछले 70 सालों से हम बॉर्डर इलाकों में गैर महफूज रह रहे है। बॉर्डर के लोग डर में रह रहे हैं। हम इस मसले का हल चाहते हैं। हम एक ही बात चाहते हैं कि हल निकले तो जंग से ही निकल जाए नहीं तो भारत और पाकिस्तान में बात होनी चाहिए।

राजा जो कहते हैं कि भारत और पाकिस्तान में बात होनी चाहिए ऐसा ही कुछ कश्मीर में एक पत्रकार भी गाँव कनेक्शन से फोन पर बात करते हुए बताते हैं। वो कहते हैं-

"यहां के लोग यही चाहते हैं कि बात हो, चाहे पाकिस्तान-हिन्दुस्तान बैठ कर बात करें या कश्मीर को भी बैठा लें लेकिन बात हो बैठ कर।"

"पुलवामा हमले के बाद कश्मीर में बहुत ही ज़्यादा डर का माहौल है। कार्रवाई के लिए दो-ढाई घण्टों तक ट्रॉफिक रूका रहता है। मैंने कई लोगों की पिटाई लगती देखी है। इसके बाद सरकार ने कई मशवरे जारी किए कि पैट्रोल कम दिया जाए, राशन स्टॉक करके रख लें, इन सबसे लोगों में और ज़्यादा डर का माहौल था। लोगों को यही लगता है कि हम बीच में फंस गए हैं,"- वह आगे कहते हैं।

वह बताते हैं कि पुलवामा हमले के बाद वहां लोग गिरफ्तार हो रहे हैं। एनआईए (नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेन्सी) लगातार रैड कर रही है, अबतक 250 से ज़्यादा लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।

"लोग यही चाहते हैं कि दोनों देशों में बातचीत हो। कश्मीरी लोगों को अच्छे से समझ आता है कि जंग किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। पिछले 30 सालों से वो इस ही में रह रहे हैं। हर दूसरे-तीसरे दिन 8 लोग, 10 लोग मर रहे हैं, चाहे आर्मी के लोग हों या आम लोग हों या मिलिटेंट्स हों लेकिन हैं तो लोग ही। यहां के लोग अच्छी तरह जानते हैं कि जंग आपके दरवाजे पर क्या लेकर आती है। हम लोग हर रोज़ खून देखते हैं। यहां के लोग यही चाहते हैं कि बात हो, चाहे पाकिस्तान-हिन्दुस्तान बैठ कर बात करें या कश्मीर को भी बैठा लें लेकिन बात हो बैठ कर," - पत्रकार आगे कहते हैं।

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