डीयू में स्टूडेंट्स को सलाह: स्कर्ट की तरह छोटा लिखें ई-मेल

डीयू में स्टूडेंट्स को सलाह: स्कर्ट  की तरह छोटा  लिखें ई-मेलबेसिक बिजनेस कम्यूनिकेशन नाम की किताब में लिखी गई बात (फोटो साभार: गूगल)

नई दिल्ली (भाषा)। सोशल मीडिया के दौर में आजकल कम शब्दों में बात करने और लिखने का ट्रेंड है। मंगलवार को पूर्व भारतीय खिलाड़ी वीरेंद्र सहवाग ने कोच की वैकेंसी पर अप्लाई करने के लिए बीसीसीआई को सिर्फ दो लाइन की सीवी लिखकर भेजी तो इस खबर बनने लगी।

ऐसे में प्रसिद्ध दिल्ली विश्वविद्यालय जहां एडमिशन लेना हजारों स्टूडेंट्स का सपना होता है, वहां भी कुछ इसी तरह की बात सिखाई जा रही है।

बीकॉम (ऑनर्स) की एक किताब में छात्रों को सलाह दी गई है कि वह स्कर्ट की तरह छोटा ईमेल लिखें जिससे रुचि बनी रहे। इसे लेकर विवाद पैदा हो गया है। ‘बेसिक बिजनेस कम्यूनिकेशन' नाम की किताब दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध एक कॉलेज में कॉमर्स डिपार्टमेंट के पूर्व प्रमुख सीबी गुप्ता ने लिखी है।

डीयू से संबद्ध अधिकांश कॉलेजों में बड़े पैमाने पर प्रोफेसरों द्वारा बीकॉम (ऑनर्स) के छात्रों को इस पाठ्यपुस्तक को पढ़ने की सलाह दी जाती है।

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इस किताब के प्रकाशन को एक दशक से ज्यादा हो चुका है। इसमें कहा गया है, ‘ईमेल संदेश स्कर्ट की तरह होने चाहिए, इतना छोटा हो कि उसमें रुचि बनी रहे और लंबा इतना हो कि सभी महत्वपूर्ण बिंदू इसमें शामिल हो जाएं।’ नाम नहीं जाहिर करने पर एक छात्र ने बताया, ‘सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर कुछ छात्रों में यह प्रवृत्ति होती है कि पाठ्यपुस्तक में लिखी हर चीज को याद कर लेते हैं, बिना यह महसूस किए कि ऐसी तुलना हमारे समाज में आकस्मिक लिंगवाद को वैधता देती है।' उन्होंने कहा, ‘गनीमत है, हम यह समझ सके और हमारे पाठ्यक्रम में इस तरह की किताबों की विश्वसनीयता पर सवाल उठा पाए। किसी ने किताब के इस बयान पर सवाल क्यों नहीं उठाया जबकि यह कई साल से बार-बार प्रिंट हो रहा है?’ प्रोफेसर सीबी गुप्ता ने लोगों की भावनाएं आहत होने पर खेद जताया है और कहा कि यह उपमा एक विदेशी लेखक के लेख से ली गई थी।

किताब से हटाई जाएगी आपत्तिजनक बात

गुप्ता ने बताया, ‘मैंने अपनी किताब से यह बयान हटा लिया है। मैं प्रकाशक को भी सलाह दूंगा कि वह नए एडीशन की छपाई से पहले यह सामग्री हटा लें।’ यह उपमा क्यों दी गई इस सवाल पर उन्होंने कहा कि यह उनकी तरफ से हुई एक गलती है और उन्होंने यह उपमा एक विदेशी लेखक के लेख से ली थी। गुप्ता ने कहा, ‘यह किसी को आहत करने के लिए नहीं था। मैंने एक विदेशी लेखक के लेख से यह उपमा ली थी।'

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