शर्मनाक : श्मशान भूमि पर दबंगों का कब्जा, अंतिम संस्कार के लिए घंटों पड़े रहे शव

शर्मनाक : श्मशान भूमि पर दबंगों का कब्जा, अंतिम संस्कार के लिए घंटों पड़े रहे शवअधिकारी पहुंचे तब हुआ अंतिम संस्कार।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क/गाँव कनेक्शन

मोहम्मद आमिल/अल्पना राजपूत

एटा। ग्रामीण इलाकों में भू-माफिया और दबंगों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि वे श्मशान की भूमि को भी नहीं बख्श रहे। ताजा मामला जिले के अलीगंज ब्लॉक की ग्राम पंचायत दादूपुर खुर्द के नगला बल्लभ गाँव का है। यहां श्मशान भूमि पर दबंगों का कब्जा होने से शुक्रवार को गाँव के दो शवों को घंटों घर में रखना पड़ा। ग्रामीणों के आक्रोश और ग्राम प्रधान की पहल पर मामला जब जिले के अधिकारियों तक पहुंचा तो किसी तरह शव का अंतिम संस्कार कराया गया।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, बीमारी के चलते गाँव की शकुंतला देवी पत्नी जयपाल सिंह व राम रहीस पुत्र पनमेश्वरी की मौत हो गई थी। मृतकों के परिजन शवों के अंतिम संस्कार की तैयारी में जुट गए, लेकिन गाँव की शमशान भूमि पर दबंगों का कब्जा होने से अंतिम संस्कार नहीं हो पाया। ऐसे में शव को घंटों घर में ही रखना पड़ा। हालांकि बाद में मृतका शकुंतला देवी के परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार अपने खेत में कर दिया, लेकिन दूसरे मृतक राम रहीस के परिजनों के पास कोई जमीन न होने और आर्थिक स्थिति खराब होने उसके शव का अंतिम संस्कार नहीं हो पाया।

विरोध करते ग्रामीण।

वर्जनमौके पर दो लेखपालों को भेज दिया गया है। जिन लोगों ने श्मशान की भूमि पर कब्जा किया है, न सिर्फ उस भूमि को कब्जा मुक्त कराया जाएगा, बल्कि अवैध कब्जेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
रामदत्त राम, एसडीएम, अलीगंज

ग्रामीणों में समस्या के निदान के लिए पंचायत हुई। इसके बाद जब गाँव के प्रधानपति मनोज कुमार ने मामले की जानकारी पहले एसडीएम अलीगंज और फिर जिलाधिकारी अमित किशोर को दी तो डीएम ने तत्काल मौके पर राजस्व विभाग की टीम भेजी। आखिरकार मौके पर लेखपाल संजीव व कानूनगो प्रदीप पहुंचे और उन्होंने शमशान की भूमि पर ही राम रहीस के शव का अंतिम संस्कार कराया। लेखपाल ने दो दिन में भूमि की पैमाइश कराकर कब्जा मुक्त कराने की बात कही।

नगला बल्लभ गाँव के भीमसेन (उम्र 70 वर्ष) ने बताया, "मरघट पर कुछ लोगों का कब्जा है। अंतिम संस्कार के लिए यहां कहीं जगह नहीं है। प्रधान ने अधिकारियों से इसकी शिकायत भी की थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ।" गाँव के ही शीलेन्द्र सिंह (उम्र 30 वर्ष) ने बताया, "हमारे श्मशान अलग हैं, लेकिन ग्राम पंचायत के श्मशान पर लोगों ने कब्जा कर रखा है। वहां जाने के लिए भी चकरोड भी नहीं है, प्रधान ने भी शिकायत की थी।"

ग्राम प्रधान ने कब्जा हटाने के लिए फरवरी में की थी डीएम से लिखित शिकायत

ऐसा नहीं है कि श्मशान भूमि पर अवैध कब्जे की जानकारी जिले के उच्चाधिकारियों को नहीं थी। ग्राम पंचायत दादूपुर खुद के प्रधानपति मनोज कुमार ने बताया कि प्रधान सन्नो देवी ने इसी वर्ष 6 फरवरी को इस संबंध में जिलाधिकारी से लिखित शिकायत की थी। डीएम ने एसडीएम को मामले की जांच कर शमशान को कब्जा मुक्त करने के निर्देश दिए थे, लेकिन उस वक्त इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद प्रधान ने 28 जून 2017 को दोबारा एसडीएम को लिखित शिकायत दी। एसडीएम ने तहसीलदार को कार्रवाई करने के आदेश दिए, लेकिन कोई स्थाई समाधान नहीं निकल सका।

दबंगों ने श्मशान भूमि पर उगा दी मक्के की फसल

गाँव के भू-माफिया और दबंगों ने श्मशान भूमि पर अवैध कब्जा ही नहीं किया, बल्कि इस पर मक्के की फसल बो दी। करीब दो बीघा श्मशान भूमि पर मक्के की फसल लहलहा रही है। इस वजह से गाँव के आसपास के लोगों को अपने परिजनों के दाह-संस्कार में दिक्कत आ रही है।

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