सरकार गंगा के संरक्षण के लिये 20000 करोड़ मंजूर कर चुकी है, फिर भी बैठना पड़ा था एक साधु को ११२ दिन अनशन पर

वह (नरेंद्र मोदी) जो अपना जन्मदिन वाराणसी में मना रहे हैं यह दिखाने के लिये कि वह गंगा की बात करते हैं... वह श्रद्धा नहीं रखते। वह गंगा जी का निरन्तर अपमान कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी सोमवार को बनारस में होंगे जहां वह अपना जन्मदिन मनायेंगे, एक स्कूल में बच्चों से मिलेंगे और भगवान विश्वनाथ से आशीर्वाद लेंगे। प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे को लोकसभा चुनाव की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। लेकिन बनारस से करीब 1000 किलोमीटर दूर हरिद्वार के मातृसदन में एक साधु पिछले 3 महीने से गंगा संरक्षण की मांगों को लेकर उपवास पर है जिसे लगता है कि प्रधानमंत्री का बनारस दौरा महज़ सियासी ढकोसला है।

"वह (नरेंद्र मोदी) बनारस जाकर गंगा के घाट पर जन्मदिन मनाने जा रहे हैं। पहले विश्वनाथ जी के दर्शन करेंगे... उनसे आशीर्वाद लेंगे। मैं मानता हूं कि यह एक अंधविश्वास है। वह मूर्ति आशीर्वाद देगी? विश्वनाथ भगवान तो अगर वह अच्छा काम करते तो कहीं से भी आशीर्वाद दे सकते थे। वह जो अपना जन्मदिन वाराणसी में मना रहे हैं यह दिखाने के लिये कि वह गंगा की बात करते हैं... वह श्रद्धा नहीं रखते। वह गंगा जी का निरन्तर अपमान कर रहे हैं। गंगा जी को धोखा दे रहे हैं, "उन्होंने गांव कनेक्शन से कहा।


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आईआईटी कानपुर में पढ़ा चुके प्रो जी डी अग्रवाल केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पहले सदस्य सचिव थे। उन्होंने अमेरिका में बर्कले से अपनी पीएचडी की और कई सालों तक गंगा संरक्षण के लिये लड़ने के बाद कुछ साल पहले संन्यास ले लिया। उन्हें अब स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के नाम से भी जाना जाता है। इससे पहले भी वह 4 बार गंगा के लिये उपवास कर चुके हैं और उनका यह उपवास पिछली 22 जून से चल रहा है।

प्रो जी डी अग्रवाल गंगा की पवित्रता और अविरलता को सर्वोपरि मानते हैं। आज उत्तराखंड में नदियों पर 100 से अधिक छोटे बड़े बांध चल रहे हैं और कई निर्माणाधीन हैं। प्रो अग्रवाल का कहना है कि भागीरथी और उसकी दो प्रमुख सहायक नदियों पर अब कोई बांध न बने ताकि गंगा की सड़ननाशक क्षमता बनी रहे। इसके लिये प्रो अग्रवाल नागपुर स्थित नेशनल इन्वायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च संस्थान (नीरी) की रिपोर्ट का हवाला देते हैं जो साफ कह चुकी हैं कि गंगा के पानी में सड़ननाशक बैक्टीरियां हैं।

प्रो अग्रवाल गंगा संरक्षण के लिए नये कानून का मसौदा भी प्रस्तुत कर चुके हैं। इन दिनों सरकार ने भी एक प्रस्तावित विधेयक का ड्राफ्ट उनसे साझा किया है जिससे वह कतई सहमत नहीं है। प्रो अग्रवाल का कहना है कि सरकार अपने कानून के ज़रिये गंगा मंत्रियों और नौकरशाहों के हवाले करना चाहती है जो स्वीकार नहीं किया जा सकता।

प्रो अग्रवाल कहते हैं कि इसी वजह से वह इतना लम्बा उपवास करने को मजबूर हुये हैं। वह कहते हैं कि मोदी जी ने (2014 में) बनारस से अपना नामांकन भरते हुये कहा कि मैं यहां आया नहीं हूं। मुझे तो गंगा मां ने बुलाया है। लेकिन उन्होंने गंगा को क्या दिया? अगर वह जन्मदिन पर बनारस जाने के बजाय यहां आकर मुझसे चर्चा करते तो उन्हें गंगा को लेकर कई बातें पता चल सकती थीं। उनका कहना है, "सरकार गंगा के प्रति बिल्कुल संवेदनशील नहीं है। सरकार ने जो ड्राफ्ट (प्रस्तावित कानून के) मुझसे साझा किये हैं उसमें मंत्री भरे पड़े हैं। सरकार जल, भूमि, खनिज और वन सभी को संसाधन मात्र मानते हुये वोट के लिये इस्तेमाल करना चाहती है। ताकि वह सत्ता में बनी रहे।"

महत्वपूर्ण है कि सरकार गंगा के संरक्षण के लिये 20000 करोड़ मंजूर कर चुकी है लेकिन उसका 20 प्रतिशत से भी कम खर्च हो पाया है।

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